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मध्य प्रदेश : ‘जुमे की नमाज के बाद पूरे शहर को जला देंगे’ ; हिन्दुओं को बताया ‘सूअर’ : मुस्लिम भीड़ की खुलेआम धमकी

मध्य प्रदेश के इंदौर में जुमे की नमाज़ के बाद शहर जला देने की धमकी (चित्र साभार: वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)
मध्य प्रदेश के इंदौर में भड़काऊ नारे लगा कर साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने की साजिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि ये भड़काऊ नारे ‘सिर तन से जुदा’ गैंग ने लगाए हैं। वायरल हो रहे एक वीडियो में मुस्लिमों की भीड़ इंदौर को जला देने और कुछ लोगों के लिए सूअर शब्द का इस्तेमाल कर रही है। वीडियो में हिंसा के लिए जुमे की नमाज़ के बाद का समय खुलेआम तय किया जा रहा है। ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ राष्ट्रीय प्रवक्ता ने वीडियो में दिखाई दे रहे आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

29 जनवरी, 2023 को विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने 2 मिनट 2 सेकेंड का एक वीडियो ट्वीट किया है। इंदौर के बताए जा रहे इस वीडियो में भीड़ में एक व्यक्ति खुलेआम इंदौर को जलाने की धमकी दे रहा है। वहीं दूसरा व्यक्ति इसके लिए जुमे की नमाज़ का समय मुकर्रर कर रहा है। वीडियो बना रही सामने खड़ी भीड़ में किसी ने भी उन्हें रोकने या समझाने की कोशिश नहीं की उलटे उनकी बयानबाजी का उत्तेजक नारे लगा कर समर्थन किया। इस दौरान दूसरे धर्म के लोगों को सुअर और खुद को शेर जैसे शब्द भी बोले गए।

विनोद बंसल ने मध्य प्रदेश के गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा को टैग करते हुए भड़काऊ बयान दे रहे लोगों पर रासुका के तहत कार्रवाई की माँग की है। उनके इस पोस्ट पर कई अन्य यूजर भी वीडियो में दिख रहे लोगों पर एक्शन की माँग कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए केस दर्ज कर लिया है। मामले में 2 लोगों को आरोपित किया गया है जिन पर IPC की धारा 505,295 और 34 के तहत FIR दर्ज की है।

केस दर्ज होने के बाद दोनों आरोपित फरार हैं जिसमें से एक की लोकेशन अजमेर और दूसरे की रतलाम में मिलना बताया जा रहा है। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है।

पूरा मामला

25 जनवरी, 2023 को हिन्दू संगठन के सदस्य इंदौर के कस्तूरी सिनेमा के आगे पठान फिल्म का विरोध कर रहे थे। इस दौरान आरोप है कि किसी व्यक्ति ने मुस्लिमों के पैगम्बर के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए। इस नारेबाजी का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो के आधार पर मुफ़्ती सैयद साबिर अली ने छत्रीपुरा थाने में तन्नू शर्मा नाम के व्यक्ति को मुख्य आरोपित करते हुए FIR दर्ज करवाई। पुलिस ने केस दर्ज कर के हिन्दू संगठन से जुड़े 7 आरोपितों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
इस नारेबाजी के विरोध में मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों ने मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन किया है। इस हिंसा में शामिल लोगों को पुलिस चिह्नित कर के गिरफ्तार भी कर रही है। इंदौर का वायरल वीडियो इसी हिंसक विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बताया जा रहा है।

मध्य प्रदेश : सरकारी टीचर के साथ बिल्डर की हैवानियत : पोर्न दिखा अप्राकृतिक सेक्स, नौकरों-दोस्तों से गैंगरेप, प्राइवेट पार्ट को सिगरेट से दाग देता था

                                                                 प्रतीकात्मक तस्वीर

मध्य प्रदेश के इंदौर से दिल को दहाने वाली एक खबर सामने आई है। यहाँ एक महिला से उसके पति ने अपने नौकर और दोस्तों के साथ मिलकर गैंगरेप (Gang rape In Indore) किया। रविवार (16 जनवरी 2022) को मामला प्रकाश में आने के बाद क्षिप्रा पुलिस ने इंदौर के एक बिल्डर और उसके चार दोस्तों को सामूहिक बलात्कार करने, प्रताड़ित करने और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि पति की बात ना मानने पर वह उसके प्राइवेट पार्ट्स और शरीर के दूसरे अंगों को सिगरेट से दाग देता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता छत्तीसगढ़ की रहने वाली है। 32 वर्षीय महिला की पहचान इंदौर के नामी बिल्डर 45 वर्षीय राजेश विश्वकर्मा से मेट्रिमोनियल साइट जीवनसाथी के जरिए हुई थी। पीड़िता छत्तीसगढ़ के एक सरकारी स्कूल में टीचर है। वेबसाइट पर बातचीत के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए। 24 अक्टूबर 2021 को आरोपित ने छत्तीसगढ़ के बेमतरा में जाकर महिला के साथ शादी की थी। बिल्डर ने शादी में अपने घरवालों को भी नहीं बुलाया था। इसको लेकर जब पीड़िता ने सवाल किया तो उसने कहा था कि घर के लोग शादी से नाराज हैं। कुछ दिन बाद सब ठीक हो जाएगा तो उनके पास चलेंगे।

बताया जा रहा है कि राजेश विश्वकर्मा नागदा के एक रईस परिवार से ताल्लुक रखता है। शादी के बाद वह पत्नी को लेकर इंदौर के एबी रोड पर मांगलिया स्थित अपने फॉर्म हाउस में ले आया था। फॉर्म हाउस में कुछ दिन ठीक से रहने के बाद अय्याश पति उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट कर अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने लगा। महिला के मना करने पर वह उसके प्राइवेट पार्ट को सिगरेट से जला देता। उसे इतना मारता की हाथ-पैरों से खून निकलने लगता। हद तो तब हो गई जब वह उसे निर्वस्त्र करके अपने नौकरों अंकेश बघेल, विपिन भदौरिया और दोस्त विवेक विश्वकर्मा के पास भेजता और सभी मिलकर महिला के साथ दुष्कर्म करते। विरोध करने पर राजेश उसकी गर्दन पर चाकू रखकर उसे जान से मारने की धमकी देता।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि विश्वकर्मा ने अपने नौकर और दोस्तों के सामने उसे परोस दिया था। वह महिला को पोर्न मूवी दिखाता और उसी के हिसाब से अप्राकृतिक यौन संबंध बनाता था। महिला ने यह भी बताया कि फॉर्म हाउस में पार्टी के लिए वह अक्सर बाहर से लड़कियाँ बुलाता था। वहाँ न्यूड पार्टी चलती थी। इस दौरान बिल्डर महिला को भी न्यूड होकर डांस करने के लिए कहता था। डांस खत्म होने के बाद वो और उसके दोस्त पीड़िता के साथ रेप करते थे। यही नहीं, महिला को गर्भ न ठहरे इसके लिए वह उसे गर्भ निरोधक गोलियाँ खिला देता था। पति ने कई बार नग्न और अर्धनग्न अवस्था में उसके फोटो लिए और वीडियो बनाए और कहा कि उसने यदि किसी से शिकायत की तो वह इन्हें वायरल कर देगा।

महिला ने बताया कि एक दिन मौका पाकर वह वहाँ से भाग निकली और छत्तीसगढ़ पहुँच गई। कुछ दिनों बाद उसने इंदौर के क्षिप्रा थाने में शिकायत दर्ज करवाई। मामले की जाँच कर रही सुमन तिवारी ने टीओआई को बताया कि प्रारंभिक जाँच से पता चलता है कि पति मुख्य आरोपित है। उसने महिला को धमकी दी थी कि अगर उसने पुलिस में उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई तो वह उसे जान से मार देगा। पाँच आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 377 और 323 और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मध्य प्रदेश : किसने थमाया गणेश के हाथ सैनेटरी नैपकिन?

            इंदौर के महू में भगवान गणेश की प्रतिमा के हाथ में थमाया सेनेटरी नैपकिन (फोटो साभार: News18)
मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित महू (डॉक्टर आंबेडकर नगर) शहर में गणेश चतुर्थी के मौके पर भगवान गणेश की प्रतिमा के हाथ में सेनेटरी नैपकिन थमा दिए गए। एक NGO ने ये करतूत की, जिसके बाद लोग नाराज़ हो गए और इस तरह हिन्दू त्योहारों व देवी-देवताओं के साथ छेड़छाड़ किए जाने पर आपत्ति जताई। NGO का कहना था कि उसने ‘मेन्सुरल हाइजीन’ को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया।

भगवान गणेश की प्रतिमा के दो हाथों में सेनेटरी नैपकिन्स थमाए हुए देखे जा सकते हैं। ‘अनिवार्य’ नामक NGO ने भगवान गणेश को एक ‘जिम्मेदार पति’ के रूप में प्रदर्शित करने के लिए ऐसा किया। ये संस्था लोगों के बीच ‘मेन्सुरल हाइजीन’ को लेकर जागरूकता फैलाने और सेनेटरी नैपकिन्स के वितरण का दावा करती है। भगवान गणेश की प्रतिमा के दोनों तरफ देवियों रिद्धि और सिद्धि को दिखाया गया था। 

महू में भगवान गणेश की प्रतिमा के हाथों में थमा दी सेनेटरी नैपकिन्स

NGO के संस्थापक और युवा लेखक अंकित बागड़ी ने कहा कि ‘बाहुबली’ फिल्म सीरीज की सफलता के बाद बाप्पा को बाहुबली की वेशभूषा में दिखाया गया था, तभी उन्हें ये आईडिया आया कि क्यों न गणेश चतुर्थी के जरिए ‘मासिक धर्म’ को लेकर जागरूकता फैलाई जाए। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2020 से अब तक वो अपने खुद के बचाव हुए रुपयों से 20 लाख सेनेटरी पैड्स का वितरण कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि अब जब हम ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं, क्योंकि न महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए इस तरह के क्रियाकलाप किए जाएँ। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर भी उनकी पहल की प्रशंसा की गई है। हालाँकि, सच्चाई इसके उलट है। सोशल मीडिया पर कई ऐसे हिन्दू भी हैं जिन्हें इस तरह की चीजें पसंद नहीं आईं और उन्होंने ऐसे छेड़छाड़ किए जाने के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

सुमित गुप्ता ने पूछा कि विज्ञापन करने के लिए ये किस तरह की हरकत है? वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि ये सही तरीका नहीं है। एक यूजर ने लिखा, “क्या हम भगवान को सिर्फ भगवान नहीं रहने दे सकते? तथाकथित जागरूकता फैलाने के लिए विज्ञापन ही काफी हैं। हम देवी-देवताओं को मास्क से लेकर ये सारी चीजें पहनना शुरू नहीं कर सकते।” जागृति खन्ना ने इसे बेवकूफी बताते हुए कहा कि जागरूकता फैलाने के और भी कई तरीके हैं।

एक अन्य महिला ने पूछा कि किसी अन्य मजहब में ऐसा क्यों नहीं होता? साथ ही उन्होंने कहा कि ये बेवकूफी है, क्योंकि पब्लिसिटी के लिए हमारे देवी-देवताओं का इस तरह से इस्तेमाल करना गलत है। वहीं अर्चि नाम की महिला ने कहा कि भगवान का सम्मान करना अलग चीज है और मेन्सुरल हाइजीन के प्रति जागरूकता अलग, दोनों को मिलाओ नहीं। लोगों ने कहा कि जागरूकता फैलाने के और भी कई तरीके हैं।

इंदौर : नकली रेमडेसिविर के साथ से कांग्रेस नेता गिरफ्तार

                                                             कांग्रेस नेता प्रशांत पाराशर (दाएँ),
एक तरफ कांग्रेस कोरोना को लेकर केंद्र में मोदी सरकार को घेरने के लिए आपदा में अवसर ढूंढ रही है, तो दूसरे तरफ मासूम जनता की जानों से खिलवाड़ करने का अवसर नहीं छोड़ रही। ऑक्सीजन सिलेंडरों की कालाबाजारी में कथित संलिप्तता के आरोप में फरीदाबाद से एक कांग्रेस  नेता को गिरफ्तार किए जाने के कुछ दिनों बाद, एक अन्य कांग्रेस नेता को फर्जी इंजेक्शन की बिक्री के लिए इंदौर में गिरफ्तार किया गया है। इंदौर पुलिस ने मई 13, 2021 को कांग्रेस नेता प्रशांत पाराशर, होम्योपैथिक डॉक्टर सरवर खान और दो अन्य को गिरफ्तार किया। इनकी गिरफ्तारी से फर्जी रेमडेसिविर नेक्सस मामले में गिरफ्तार आरोपितों की संख्या 11 हो गई है।

पाराशर को राज्य में बढ़ रहे कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर SOS मुहिम को सुचारू रूप से संपूर्ण मध्य प्रदेश में संचालित करने के लिए तत्काल प्रभाव से इस कैम्पेन का स्टेट कॉर्डिनेटर नियुक्त किया गया था। पुलिस के अनुसार, प्रशांत पाराशर मध्य प्रदेश में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के बड़े पैमाने पर वितरण में शामिल एक नेक्सस का हिस्सा था।

                                                                     Source: Twitter/@IYCMadhya
अब तक, अधिकारियों ने मामले में गिरफ्तार आरोपितों की कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य पूछताछ के आधार पर गुजरात से तस्करी कर इंदौर लाए गए 700 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन में से 437 को जब्त कर लिया है।

यह मामला करीब तीन हफ्ते पहले तब सामने आया था जब अधिकारियों ने दो लोगों- दिनेश चौधरी और धीरज सजवानी को गिरफ्तार किया था और उनके पास से दो इंजेक्शन बरामद किए थे। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि नकली रेमडेसिविर बाँटने का बड़ा नेक्सस राज्य में सक्रिय था। बाद में प्रवीण उर्फ सिद्धार्थ फुलके और असीम भाले को गिरफ्तार किया गया। असीम ने इंजेक्शन के लिए सुनील मिश्रा नाम के एक व्यक्ति के साथ खरीदारी और कोऑर्डिनेट करना स्वीकार किया। पुलिस ने मिश्रा की लोकेशन चेक की तो पता चला कि वह गुजरात के सूरत का रहने वाला है। इसके बाद पुलिस ने गुजरात पुलिस को रेमडेसिविर की कालाबाजारी में मिश्रा की संलिप्तता की जानकारी दी।

गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए गुजरात पुलिस ने मोरबी इलाके में एक नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया और इस मामले में कौशल बोहरा, पुनीत शाह और बाद में सुनील मिश्रा को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ और जानकारी के आधार पर पुलिस ने पाया कि मिश्रा ने कांग्रेस  नेता प्रशांत पाराशर को 100 इंजेक्शन भेजे थे, जो युवा कांग्रेस के नेता हैं। मई 13 को भोपाल में आरोपित कांग्रेस नेता का पता लगाया गया और अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

कांग्रेस नेता की गिरफ्तारी पर बोलते हुए, एसपी आशुतोष बागरी ने कहा, “उन्होंने अपने दोस्तों और परिवार को इंजेक्शन बेचने और देने की बात स्वीकार की। हालाँकि, उन्होंने केवल 66 इंजेक्शन प्राप्त करने की बात स्वीकार की। आरोपित सुनील मिश्रा का रिमांड मिलने के बाद हम इसकी पुष्टि करेंगे।” मिश्रा ने कथित तौर पर प्रशांत को इंजेक्शन लगाने वालों के स्वास्थ्य की जाँच करने के लिए बुलाया था, जब उन्हें पता चला कि उनमें कुछ गड़बड़ है तो उन्होंने शेष 8 इंजेक्शन जलाशय में फेंक दिए।

इसके अतिरिक्त, 700 इंजेक्शनों में से 500 को कथित तौर पर जबलपुर शहर के अस्पताल में भेजा गया, जहाँ मरीजों को दिया गया। पुलिस ने कहा कि सभी इंजेक्शनों का बैच नंबर समान था, जिसका मतलब था कि वे गुजरात में एक ही कारखाने में निर्मित किए गए थे।

ऑक्सीजन सिलिंडर की काली बाज़ारी में कांग्रेस नेता गिरफ्तार 

कुछ दिन पहले, कांग्रेस के एक नेता बिजेंद्र मावी को फरीदाबाद में ऑक्सीजन सिलेंडरों की कालाबाजारी में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हरियाणा के फरीदाबाद के इंद्रा कॉम्प्लेक्स कॉलोनी में पुलिस को उसके घर से 50 ऑक्सीजन सिलेंडर मिलने के बाद कांग्रेस नेता के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने बताया कि आरोपित ने अपनी कार में ऑक्सीजन सिलेंडर छिपा रखा था।

खबरों के मुताबिक, खेड़ीपुल पुलिस फरीदाबाद के तिगाँव रोड पर पेट्रोलिंग कर रही थी, जब उनके मुखबिर ने उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी में कांग्रेस नेता के शामिल होने की सूचना दी। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की। ड्रग कंट्रोल ऑफिसर संदीप गहलान भी मौजूद थे।

कांग्रेस नेता के गाड़ी की जाँच करने पर 42 खाली व 8 भरे सिलेंडर मिले। पुलिस ने मावी से ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए लाइसेंस और जरूरी परमिट दिखाने को कहा। जब आरोपित वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका, तो पुलिस ने उन्हें अपनी कस्टडी में ले लिया और 50 ऑक्सीजन सिलेंडर जब्त कर लिए।

डॉ आमिर खान गिरफ्तार, 4,000 रूपए का इंजेक्शन बेच रहा था 60,000 रूपए में

इंदौर के एक अस्पताल में कोरोना वायरस संक्रमण का फायदा उठा कर मरीजों को लूटने वाले दो लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें से एक डॉक्टर है तो एक मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव(MR)। जिन पर लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी है, उन्हें ही मरीजों की आपात स्थिति का फायदा उठा कर अपनी कमाई करते हुए दबोचा गया। अस्सिस्टेंट ड्यूटी डॉक्टर आमिर खान और MR इमरान खान के खिलाफ अंकिता यादव नामक महिला ने शिकायत की थी।

दोनों पर आरोप है कि उन्होंने कोरोना पीड़ित को दिए जाने वाले इंजेक्शन का न सिर्फ नकली बिल बनाया, बल्कि उसे 60,000 रुपए में बेचा। ये घटना मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित मयूर अस्पताल की है। खजराना TI दिनेश वर्मा ने बताया कि अंकिता यादव की बहन प्रीति कोरोना पीड़ित हो गई थीं और उन्हें इसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहाँ डॉक्टर ने एक अर्जेन्ट इंजेक्शन लिखा और उसे खरीद कर लाने को कहा।

उसी अस्पताल में मौजूद डॉक्टर आमिर खान ने महिला से कहा कि वो इस इंजेक्शन को उपलब्ध करा सकता है। जब महिला ने बिल माँगा तो उसने इनकार कर दिया। फिर 60,000 रुपए का ऑनलाइन पेमेंट लेकर इंजेक्शन दे दिया। बाद में उसने महिला के मोबाइल नंबर पर बिल भेज दिया। पड़ताल में पता चला कि बिल पर छपा नंबर MR इमरान खान का था। बिल उसने ही छपवाए थे। वो लंबे समय से आमिर के साथ मिल कर ठगी के कारोबार में लगा था।

आमिर खान इससे पहले स्वर्णबाग कॉलोनी में हेल्थ प्लस नाम से क्लिनिक चलाता था। दोनों के खिलाफ जयदीप साधवानी नामक शख्स ने भी शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि वो लाइफ विजन नामक फर्म चलाते हैं, जो किसी व्यक्ति को सीधे दवाई नहीं देता। सिर्फ अस्पताल और मेडिकल स्टोर्स को ही दवाई सप्लाई की जाती है। अंकिता यादव बिल लेकर उनके पास ही पहुँची थीं और साइन करने को कहा था।

लेकिन, उन्होंने भाँप लिया कि वो एक फर्जी बिल था। उन्होंने नंबर पर कॉल किया तो इमरान ने बताया कि वो इन्फोबेल में कार्यरत है। अंसार खान का बेटा आमिर सिल्वर कॉलोनी का रहने वाला है, जबकि जबकि बाबू खान का बेटा इमरान शाहीबाग का निवासी है। जिस इम्युनोसीन अल्फा इंजेक्शन को वो 60,000 में बेचते थे, उसकी सामान्य कीमत 4000 रुपए है। मयूर अस्पताल इंदौर के रोतला रिंग रोड पर स्थित है। 

2800 रूपए का Remdesivir 35000 रूपए में : डॉक्टर मोहम्मद अबीर मेडिकल स्टूडेंट के साथ मिल कर रहा था कालाबाजारी

राजस्थान के उदयपुर में एक डॉक्टर और एक एमबीबीएस छात्र रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए पकड़ा गया है। कोरोना वायरस से संक्रमित एक मरीज के परिजन की शिकायत पर पुलिस ने कालाबाजारी कर रहे डॉक्टर मोहम्मद अबीर और और उसके साथी को गिरफ्तार किया। आरोपियों से उनके पूरे गिरोह की जानकारी प्राप्त करने के लिए पूछताछ की जा रही है।

उदयपुर पुलिस ने बताया कि उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की सूचना मिली थी। इसके बाद एक पुलिसकर्मी को ग्राहक बनाकर आरोपितों के पास भेजा गया। आरोपितों ने 2800 रुपए का रेमडेसिविर इंजेक्शन 35,000 रुपए में बेचने का सौदा तय किया। इसके बाद निजी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर मोहम्मद अबीर और उसके साथी एमबीबीएस छात्र मोहित पाटीदार को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। रुपयों के लेन-देन में डॉक्टर ने 2 इंजेक्शन लेने पर प्रति इंजेक्शन 35,000 रुपए की बात कही। डॉक्टर ने एक इंजेक्शन के लिए इससे भी अधिक कीमत बताई।

गिरफ्तार डॉक्टर मोहम्मद अबीर उदयपुर के गीतांजलि मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट है। अबीर मूल रूप से उदयपुर के सवीना का रहने वाला है। दूसरा आरोपित गीतांजलि मेडिकल कॉलेज में ही एमबीबीएस के सेकेंड ईयर का छात्र है।

अवलोकन करें:-

उत्तर प्रदेश : मर चुके कोरोना मरीज की Remdesivir इंजेक्शन को नर्स आबिद और अंकित 32000 रूपए में बेचते गिरफ्

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उत्तर प्रदेश : मर चुके कोरोना मरीज की Remdesivir इंजेक्शन को नर्स आबिद और अंकित 32000 रूपए में बेचते गिरफ्

उदयपुर के एकलिंगपुरा चौराहे से पुलिस बुधवार (21अप्रैल 2021) दोनों को पकड़ा। ग्राहक बनकर आए पुलिसकर्मी ने अपने साथियों की सहायता से दोनों को गिरफ्तार किया। इनके पास से इंजेक्शन भी बरामद किए गए।

बार डांसर के साथ मादक डांस करते दरगाह के सदर अरब अली

                             खजराना स्थित नाहरशाहवली दरगाह के सदर अरब अली पटेल का वीडियो वायरल
इंदौर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़े स्तर पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में खजराना स्थित नाहरशाहवली दरगाह के सदर, अरब अली पटेल बार डांसर के साथ डांस करते और उसे गले लगाते हुए देखे जा रहे हैं।

बृहस्पतिवार (फरवरी 11, 2021) को इस वीडियो के वायरल होने के बाद इस पर विवाद गहराता जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस वीडियो के सामने आने के बाद शहर काजी भी इस हरक़त से बहुत नाराज हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वीडियो में बार डांसर के साथ नजर आ रहे सदर अरब अली पटेल ने कहा कि ये दो साल पुराना वीडियो उनके भांजे की शादी समारोह का है और अब ये वीडियो सिर्फ उन्हें बदनाम करने के लिए शेयर किया जा रहा है।
इस वीडियो में सूट-बूट में नजर आ रहे खजराना के नाहरशाहवली दरगाह के सदर, अरब अली पटेल पहले बार डांसर को गले लगाया और बाद में उसकी कमर में हाथ डालकर नाचते नजर आ रहे हैं। अरब अली पटेल कांग्रेस नेता अंसार पटेल के भाई बताए जा रह हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अंसार पटेल ने ही कांग्रेस के राज में विधायक सज्जन वर्मा के जरिए अरब अली को दरगाह का सदर नियुक्त करवाया था।
शहरकाजी डॉ इशरत अली ने इस वीडियो की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि किसी भी धार्मिक स्थल पर पर अच्छी मानसिकता के लोग ही होने चाहिए।
इशरत अली ने कहा कि ऐसी प्रकृति के लोगों को किसी भी धार्मिक दरगाह का सदर बनने की अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि पता नहीं कैसे ऐसे लोगों को ऐसी गरिमामयी जिम्मेदारियाँ मिल जाती हैं। उन्होंने कहा कि वो अरब अली को पद से हटाने के सम्बन्ध में कलेक्टर मनीष सिंह से भी बात करेंगे।
दरअसल, प्राचीन नाहरशाह वली की दरगाह पर हर साल श्रद्धालु जाकर चादर चढ़ाते हैं। इस वीडियो पर जिला हज कमेटी के पूर्व अध्यक्ष फारुक राइन ने भी आपत्ति जताई और कहा कि इस घटना के बाद वक्फ बोर्ड को सदर को बर्खास्त करने के लिए पत्र लिखेंगे। वीडियो को आप इस यूट्यूब लिंक पर भी देख सकते हैं –

इंदौर : ‘हम मोदी को मारेंगे’: इंडेक्स मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज हुए परिवार के 6 साल के बच्चे ने लगाया नारा

इंदौर इंडेक्स मेडिकल कॉलेजएक वीडियो सामने आया है। इसमें एक बच्चा ‘हम मोदी को मारेंगे’ का नारा लगाता सुनाई पड़ रहा है। वीडियो इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज का बताया जा रहा है। यह तब शूट किया गया जब कोरोना संक्रमण का इलाज कराकर एक परिवार अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ था। नारा लगाने वाला बच्चा इसी परिवार का बताया जाता है।
जिस इंडेक्स मेडिकल कॉलेज (Index Medical College) की यह घटना है, वहाँ बतौर अतिथि कोरोना से डिस्चार्ज होने वाले मरीजों का उत्साहवर्धन करने के लिए पूर्व विधायक डॉ राजेश सोनकर भी उपस्थित थे।
ऑपइंडिया से बात करते हुए पूर्व विधायक और भाजपा नेता राजेश सोनकर ने कहा कि इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के हॉस्पिटल से ठीक हो चुके कोरोना मरीजों को 13 मई को घर भेज गया था। उन्होंने बताया कि ये सभी लोग तबलीगी जमात से जुड़े थे।
इस मौके पर अस्पताल का स्टाफ, मैनेजमेंट, पूर्व विधायक और भाजपा नेता राजेश सोनकर डिस्चार्ज हुए मरीजों का हौसला बढ़ाने के लिए वहाँ मौजूद थे। जिस वक़्त सभी लोग सभी ताली बजाकर संक्रमण मुक्त हुए लोगों का हौसला बढ़ा रहे थे तभी उस परिवार के एक 6 साल के बच्चे ने जोर से नारा लगाते हुए कहा कि हम मोदी को मारेंगे।
पूर्व विधायक ने बताया कि डिस्चार्ज किए गए मरीज समुदाय विशेष से ताल्लुक रखते हैं और विभिन्न राज्यों से थे। बच्चे ने जैसे ही मोदी को मारने का नारा लगाया मोबाइल की रिकॉर्डिंग बंद कर दी गई।
हालाँकि, बच्चे के चिल्लाने की आवाज मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड हो चुकी थी और अब यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
भाजपा नेता राजेश सोनकर ने बच्चे के मुँह से ये बात सुनकर उसे और उसके परिवार को समझाने का भी प्रयास किया कि इस प्रकार की दुर्भावना गलत है। राजेश सोनकर ने कहा कि मोदी सरकार और राज्य सरकार मिल-जुलकर कोरोना वायरस से लड़ाई में समाज के हर वर्ग को हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध करा रही है। ऐसे में समुदाय विशेष के लोगों का यह व्यवहार दुखद है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ मौजूद उनके अभिभावकों के चेहरे पर ग्लानि के बजाए हँसी थी और उन्होंने बच्चे को चुप कराने का भी प्रयास नहीं किया।

ट्विटर पर भी सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत पटेल उमराव ने यह वीडियो शेयर करते हुए लिखा है –
“2019 में सरकार द्वारा दी गई कुल छात्रवृत्ति में से 80% मुस्लिम बच्चों को दी गई। 88 लाख मुस्लिम, 8.26 ईसाई बच्चे, 5.45 लाख सिख और 5.2 लाख हिन्दू बच्चों को स्कॉलरशिप दी गई है। परिणाम में सरकारी अस्पताल से कोरोना का इलाज कराकर निकले परिवार का बच्चा कह रहा है- हम मोदी को मारेंगे।”
उल्लेखनीय है कि इंदौर मध्य प्रदेश का कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक पीड़ित शहर है। यहॉं से पुलिस और मेडिकल टीम पर हमले और बदसलूकी की भी घटनाएँ सामने आ चुकी है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन इस महामारी पर नियंत्रण करने का प्रयास कर रही है और काफी हद तक सफल भी रही है।

मालेगाँव कब्रिस्तान से खौफनाक आँकड़ा: 140 के मुकाबले 457 शव

मालेगांव कब्रिस्तान कोरोना
                                                                                                                                                                               प्रतीकात्मक 
मध्य प्रदेश के इंदौर के बाद कब्रिस्तान में दफन होने वाले शवों की संख्या ने महाराष्ट्र के मालेगाँव की स्थिति पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से लेकर अब तक यहाँ कोविड-19 के कारण मरने वाले केवल 12 लोग हैं। मगर, शहर में हुई मौतों की संख्या पिछले साल के आँकड़ों और पिछले महीने के आँकड़ों से कहीं ज्यादा हैं। 
इंडियन एक्सप्रेस की खबर में पेश किए गए आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल में मालेगाँव में कुल 580 मौतें हुई हैं। जबकि पिछले साल इसी महीने में केवल 277 मौतें हुई थीं। इसके अलावा इस साल के मार्च में भी ये संख्या 314 थी। अब इस ग्राफ में औचक बढ़ोतरी देखकर संदेह जताया जा रहा है कि कोरोना काल में इस प्रकार की वृद्धि दर्शाती है कि इनमें से कुछ लोग कोरोना पॉजिटिव भी हो सकते थे।
साभार : Indian Express 
इससे पहले, अप्रैल महीने में स्वास्थ्य विभाग ने भी मालेगाँव पर अपना संदेह प्रकट किया था। उस समय तक कोविड-19 से केवल 8 मौतें हुईं थी। तब स्वास्थ्य विभाग ने बताया था कि मालेगाँव में इस महीने सिर्फ 8 लोगों की मौत कोरोना से हुई है। लेकिन अन्य कारणों से हुई 221 मौतों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ा कब्रिस्तान का सालाना औसत भी रोज 7-8 जनाजों का है। ऐसे में 10 अप्रैल के बाद जनाजों में बढ़ोतरी सवालों के घेरे में है। 
मालेगाँव में कोरोना के पहले मरीज की शिनाख्त 8 अप्रैल को हुई थी। इसके बाद यहाँ करीब 229 केस आए और रविवार तक यहाँ 12 मौतें हुईं। अधिकारियों की मानें तो नगर में 27 अप्रैल के बाद कोई मृत्यु कोरोना के कारण नहीं हुई है। लेकिन, एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि बड़ा कब्रिस्तान में करीब 2 घंटे में 9 शवों को लाते देखा गया।
मालेगाँव में अनुमानित तौर पर 79% आबादी मुस्लिमों की है। यहाँ कब्रिस्तान के एडमिनिस्ट्रेटर रईस अहमद अंसारी, इस संबंध में कहते हैं कि आम दिनों में यहाँ केवल 6 से 7 शव दफनाने के लिए लाए जाते थे। मगर, पिछले तीन दिनों में उन्होंने 30 शवों को दफनाया है। खबर की मानें तो पिछले साल अप्रैल में शवों को दफनाने की संख्या जहाँ केवल 140 गिनी गई थी, वहीं इस अप्रैल में ये आँकड़ा 457 पहुँच गया है।
कुछ अधिकारियों ने इस स्थिति के लिए लॉकडाउन में बंद हुए निजी अस्पतालों को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही निर्णय लिया है कि वे शहर में 10 अप्रैल के बाद मरने वाले सभी लोगों के परिवार वालों का रैंडम टेस्ट करेंगे। इसके अलावा मालेगाँव के स्वास्थ्य अधिकारी गोविंद चौधरी ने कहा, “हमें अभी भी यह अध्ययन करना है कि क्या कुछ मौतें कोविड-19 की वजह से हुईं, जिन्हें रिपोर्ट नहीं किया गया।”
वहीं आईएएस पंकज आशिया का कहना है, “यहाँ अप्रैल में जो मौतों में वृद्धि हुई है, उसके बारे में बिना गहन अध्ययन के कहना मुश्किल होगा कि इनमें से कुछ मौतें कोविड-19 के कारण हुईं। हमने उन सभी के परिवार के सदस्यों का औचक ढंग से परीक्षण करने का निर्णय लिया है, जिनकी मृत्यु 10 अप्रैल को हुई है ताकि यह जाँचा जा सके कि क्या उनमें से किसी को संक्रमण है।”
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डॉक्टर जेली (बाएँ) ने सफूरा जरगर (दाएँ) आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्र नेता सफूरा जर.....
इससे पहले पिछले महीने की शुरुआत में ऐसा संदेह इंदौर में दफन होते शवों को लेकर लगाया गया था। तब वहाँ मात्र एक हफ्ते में मुस्लिमों के कब्रगाह पर आने वाले शवों में औचक बढ़ोतरी देखने को मिली थी। मौजूदा जानकारी के अनुसार, इंदौर में मुस्लिमों के 4 कब्रिस्तान हैं, जिनमें 1 अप्रैल से 6 अप्रैल के बीच में 127 लोगों के शवों को दफनाया गया था और 7 वें दिन तक ये आँकड़ा 145 पहुँच गया था।

इंदौर : मच्छी बाजार की आड़ में दवाओं का गोरखधंधा: 227 लाशों से पटा कब्रिस्तान

इंदौर के मच्छी बाजार और बंबई बाजार में मछलियों की ख़रीद-बिक्री के बीच दवाओं का कारोबार चल रहा है। सिर्फ़ दवाएँ ही नहीं, ऑक्सीजन जनरेटर, मास्क, पीपीई किट और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन (HCQ) जैसी चीजों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
भारत सरकार द्वारा गठित टास्क फोर्स ने कोरोना के मरीजों के लिए HCQ का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। हालाँकि, आमजनों को इसे बिना डॉक्टर की सलाह के लेने के लिए मना किया गया है। बावजूद इसके लोग इसे ख़रीदने के लिए लालायित हैं।
जिन इलाकों में ये सब हो रहा है, वो कोरोना से बुरी तरह प्रभावित है। वहाँ चोरी-छिपे इलाज भी चल रहा है। कई मौतें हो चुकी हैं। ‘दैनिक भास्कर’ के एक स्टिंग के मुताबिक, मेडिकल उपकरणों की ख़रीद-बिक्री और चोरी-छिपे कारोबार के बीच कई लाशों का गिरना संदिग्ध परिस्थितियों की ओर इशारा करता है।
इन चीजों की डिलीवरी के लिए गाड़ी आती है। लॉकडाउन में गाड़ी निकालना संभव नहीं है, इसीलिए उस गाड़ी ने खाद्य सामग्रियों के वितरण का कर्फ्यू पास ले रखा है और उसकी आड़ में ये सब किया जा रहा है।
मुंबई की एक कुरियर कम्पनी के खाते से इन दवाओं के सप्लायर को राशि का भुगतान किया जाता है। स्टिंग में ये भी खुलासा हुआ है कि अप्रैल से लेकर अब तक वहाँ 227 लोगों की मौत हो चुकी है। अप्रैल के शुरुआती सप्ताह में ही यहाँ 127 लोग काल के गाल में समा गए थे। इन सभी की लाशों को वहीं के कब्रिस्तानों में दफनाया गया।
इंदौर पहले से ही कोरोना के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित है, ऐसे में वहाँ ये सब होना चिंता का विषय है। स्टिंग के बाद माँग की जा रही है कि प्रशासन मेडिकल इक्विपमेंट सप्लायर से पिछले एक माह में सप्लाई किए गए मशीनों की सूची ले। इसमें ऑक्सीजन कंस्ट्रेटर और बायपेप मशीनें शामिल हैं।
ऑक्सीजन सिलिंडर की सप्लाई को लेकर भी नज़र रखने की माँग की जा रही है। ‘दैनिक भास्कर’ ने एक ख़रीददार वाजिद और सप्लायर के बीच के बातचीत को एक्सेस किया है, जिसमें सप्लायर कह रहा है कि मामला स्ट्रिक्ट होने के कारण डिलीवरी में दिक्कत है। इसमें ऑक्सीजन के लिए फिलिप्स के मशीनों के लेन-देन की बात चल रही है। एक पेशेंट के मरने की बात भी कही जा रही है। इससे पता चलता है कि लोगों की मौतें हो रही हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार देश में जारी कोरोना के कहर के बीच शुक्रवार (अप्रैल 17, 2020) को गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों .....
एक सप्लायर को पहली बार 93 हज़ार रुपए और दूसरी बार 1.28 लाख रुपए भुगतान किए गए। इंडेक्स लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड के जरिए भुगतान की बात पता चली है। इसी नाम से एक प्रतिष्ठित कम्पनी भी है। , इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र ने बताया कि पुलिस के पास इस बात की सूचना है कि एक सामानांतर चिकित्सा व्यवस्था चलाई जा रही है। इसकी जाँच क्राइम ब्रांच से कराने का आश्वासन दिया गया है।

कोरोना प्रभावित इलाके के 4 कब्रिस्तानों में 7 दिन में 145 दफन

मुस्लिम कब्रगाह, इंदौर
इंदौर के कब्रिस्तानों में बढ़ी शवों की संख्या (प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार: India21news)
इंदौर में पिछले एक हफ्ते में मुस्लिमों के कब्रगाह पर आने वाले शवों में औचक बढ़ौतरी देखने को मिली है। जानकारी के अनुसार, इंदौर में मुस्लिमों के 4 कब्रिस्तान हैं जिनमें 1 से 6 तारीख के बीच में 127 लोगों के शवों को दफनाया गया और 7 वें दिन तक ये आँकड़ा 145 पहुँच गया। जबकि पुरानी डेटा को देखें तो मालूम पड़ता है कि पूरे मार्च में इन 4 कब्रिस्तान में सिर्फ़ 130 लोगों के शव आए।
भास्कर का दावा है कि एक दिन में ही 18 जनाजे सिर्फ उन्हीं चार कब्रिस्तान में पहुँचे जो क्वारंटाइन एरिया के लिए ही हैं। बता दें 7 अप्रैल तक जितने भी कोरोना के कारण मौत के मामले आए उनमें से अकेले 13 सिर्फ़ इंदौर से हैं। इसलिए प्रशासन के लिए ये खुलासा एक चिंता का विषय है।
रिपोर्ट के अनुसार, खजराना, चंदनगर, रानीपुर-दौलतगंज-हाथीपाला, आज़ादनगर, टाटपट्टी बाखल-सिलावटपुरा और बॉम्बे बाज़ार क्षेत्रों में कोरोनोवायरस पॉजिटिव के सबसे ज्यादा मामले पाए गए।
इसके बाद ही भास्कर ने इन क्षेत्रों के चार प्रमुख मुस्लिम कब्रिस्तानों में अप्रैल के पहले सप्ताह में दफनाए गए शवों की संख्या की पड़ताल की। हालाँकि, कब्रिस्तान में बनाए गए रजिस्टर में इन लोगों के मौत का कारण ब्लडप्रेशर, डायबिटीज़, आदि का उल्लेख किया गया। मगर, यदि मार्च के आँकड़ों के साथ इनकी तुलना करें तो ये काफी खतरनाक है।
रिपोर्ट् के मुताबिक महू नाका मुस्लिम कब्रिस्तान में मार्च माह में 46 शवों को दफनाया गया था, जबकि अप्रैल में ये आँकड़ा केवल 6 दिन में (1-6 अप्रैल) 42 था। इसी तरह टाटपट्टी बाखल और आसपास के इलाकों के लिए मुस्लिम कब्रिस्तान में मार्च में दफन किए गए शवों की संख्या 36 थी और अप्रैल के 6 दिनों में ये संख्या 44 है। अन्य दो मुस्लिम कब्रिस्तानों में भी मार्च माह में 20 और 28 शव दफन किए गए। लेकिन, अप्रैल के 6 दिनों में यहाँ 20 और 21 शव दफन किए गए।
एक ओर जहाँ मुस्लिम कब्रगाह में शवों के दफनाए जाने की सूचना इस तरह अचानक बढ़ी है। वहीं शमशान घाटों में हिंदुओं के दाह संस्कार करने की संख्या पहले जैसी है।
भास्कर की रिपोर्ट से यह पता चलता है कि मृतकों के मामले में, उनके यात्रा के इतिहास और कोरोना लक्षण दिखने के बावजूद उनके नमूने नहीं लिए गए। जैसे, इस बीच ट्रेवल हिस्ट्री का इतिहास रखने वाले 42 वर्षीय नावेद की मृत्यु हुई। मगर, उनका न तो परीक्षण हुआ और न इलाज हुआ।
इसके बाद नावेद के 48 वर्षीय चचेरे भाई इरफान को 26 मार्च को साँस लेने की समस्या हुई। जिसे सीएचएल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन हालत गंभीर होने के कारण उन्हें गोकुलदास अस्पताल में भर्ती करवाया लेकिन अगले दिन उनकी मृत्यु हो गई। बाद में इरफान की टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आई। और उनके भाई ने कहा कि इरफान तो दहशत में ही चले गए।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने बदजबान शोएब जमाई को अपने शो से निकाल ब.....
भास्कर की रिपोर्ट में ऐसे चौंकाने वाले नंबर सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियों ने अब इसकी जाँच शुरू कर दी है। साथ ही इन आँकड़ों पर रिपोर्ट माँगी है। भास्कर द्वारा प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को उपरोक्त चार मुस्लिम कब्रिस्तानों में 20 और शवों को दफनाया गया था।

कांग्रेस ने पोस्टर पर भोपाल की बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर को 'हिंसा की पुजारन' लिखा!

कांग्रेस ने पोस्टर पर भोपाल की बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर को 'हिंसा की पुजारन' लिखा!
भोपाल की बीजेपी की सांसद प्रज्ञा ठाकुर को
कांग्रेस ने गांधी जयंती पर एक पोस्टर में निशाना बनाया.
महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में कांग्रेस नेताओं द्वारा लगवाया गया एक पोस्टर बुधवार को चर्चा का विषय बन गया. राज्य में सत्तासीन कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने पोस्टर में भोपाल की सांसद प्रज्ञा ठाकुर का फोटो इस्तेमाल किया और उसके नीचे 'हिंसा की पुजारन' लिखा. पोस्टर में महात्मा गांधी की भी तस्वीर है जिसके नीचे 'अहिंसा के पुजारी' लिखा गया है. बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर पर कांग्रेस नेताओं द्वारा इस तरह निशाना बनाने का यह पहला मामला है. इंदौर शहर के बींचोंबीच स्थित रीगल चौराहे पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने बुधवार(अक्टूबर 2) को एक बड़े पोस्टर ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया.
पोस्टर पर ऊपर एक ओर महात्मा गांधी और दूसरी ओर भोपाल की बीजेपी की सांसद प्रज्ञा ठाकुर की तस्वीर है. गांधी जी की फोटो के नीचे 'अहिंसा के पुजारी' लिखा और प्रज्ञा ठाकुर के चित्र के नीचे 'हिंसा की पुजारन' लिखा गया.
पोस्टर में नीचे विवेक खंडेलवाल और गिरीश जोशी के नाम हैं और उनकी तस्वीरें भी हैं. पोस्टर पर लिखा है कि 'गोडसे को मानने वाली पार्टी क्या कभी प्रज्ञा ठाकुर को भाजपा से निकालेगी? गांधी जयंती पर ढकोसला करने आने वाले भाजपाई जवाब दें? राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अमर रहें..'
यह पोस्टर शहर के उस स्थल पर लगाया गया जहां बाद में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, राज्य के गृह मंत्री बाला बच्चन और स्वस्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने गांधी जयंती पर आयोजित समारोह को संबोधित किया.
उधर छत्तीसगढ़ की विधानसभा में बुधवार को महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय विशेष सत्र में कांग्रेस के सदस्यों ने गोडसे मुर्दाबाद के नारे लगाए. संभवतः यह पहली बार है जब किसी सदन में नाथूराम गोडसे के मुर्दाबाद के नारे लगाए गए.

इंदौर : भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय की गुंडागर्दी, गिरफ्तार


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
सत्ता का नशा नेताओं पर किस कदर हावी होता है, इसका नमूना मध्य प्रदेश के इंदौर में देखने को मिला। यहां से भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय ने नगर निगम के अधिकारियों पर क्रिकेट बैट से हमला बोला। आकाश विजयवर्गीय के समर्थकों ने भी अपनी स्वामी भक्ति दिखाने के लिए जमकर हाथ चलाये। 
मध्यप्रदेश के इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा क्रिकेट के बल्ले से निगम कर्मचारी को पीटने का मामला सामने आया है। दरअसल, नगर निगम द्वारा शहर में चिन्हित किए गए 26 अति खतरनाक मकानों को तोड़ने की कार्रवाई की जा रही थी। 
जून 26 को जब गंजी कंपाउंड स्थित एक मकान को तोड़ने के लिए नगर निगम की टीम पहुंची तो उनकी बहस आकाश विजयवर्गीय से हो गई। विधायक आकाश ने नगर निगम अधिकारियों और कर्मचारियों को धमकी देते हुए 10 मिनट में वहां से निकल जाने को कहा। बाद में विधायक भड़क गए और उन्होंने क्रिकेट के बल्ले से निगम कर्मचारी पर हमला कर दिया।
नगर निगम की टीम जब गंजी कंपाउंड पहुंची तो वहां रहने वाले लोगों ने टीम का विरोध करना शुरू कर दिया। साथ में उन्होंने स्थानीय विधायक आकाश को सूचना देकर मौके पर बुला लिया। आकाश के आते ही कार्यकर्ताओं ने जेसीबी की चाबी निकाल ली।
आकाश ने कर्मचारियों को 10 मिनट में वहां से निकलने की चेतावनी दी। निगम कर्मचारियों ने विधायक को समझाने का प्रयास किया। इस दौरान जमकर तू-तू मैं-मैं हुई और विवाद बढ़ गया। विधायक आकाश अपना आपा खो बैठे और क्रिकेट के बल्ले से निगम कर्मचारी की पिटाई कर दी। बड़ी मुश्किल से विधायक को शांत कराया गया।
आकाश वर्गीय गिरफ्तार 
इंदौर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक आकाश विजय वर्गीय को पुलिस ने गिरफ्तार कर दिया है। आकाश पर अतिक्रमण हटाने गए नगर निगम अधिकारियों पर बैट से हमला करने का आरोप है। इसका वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है। विधायक आकाश के खिलाफ एमजी रोड थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। उनके खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, मारपीट और बलवा की धारा 353 , 294 , 506, 147, 148 में केस दर्ज किया गया है। इसके बाद आकाश को गिरफ्तार कर लिया गया। आकाश को कोर्ट में पेश किया जाएगा। गिरफ्तारी के दौरान एमजी रोड थाने के बाद बड़ी संख्‍या में आकाश के समर्थक जमा हो गए थे। 
मध्य प्रदेश जहाँ लोकसभा चुनावों में जनता ने मोदी पर भरोसा कर उम्मीद से अधिक अपना समर्थन क्या इसलिए दिया था कि उनके विधायक इस तरह गुंडागर्दी करेंगे तो उनकी पार्टी और अन्यों में क्या अन्तर है? क्या प्रधानमन्त्री मोदी विधायकों को सरकारी काम में बाधा डालने और मारपीट करने वाले विधायकों को पार्टी में रखेंगे या बाहर का रास्ता दिखाएंगे?
इतना ही नहीं विधायक आकाश विजयवर्गीय के समर्थकों ने भी निगम अधिकारियों के साथ मारपीट की। दरअसल, इस क्षेत्र में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ऐसे में जो भी जर्जर मकान हैं और काफी पुराने घर हैं उन्हें सरकार की तरफ से खाली कराया जा रहा है ताकि किस तरह की घटना न हो। बता दें कि इससे पहले भी आकाश विजयवर्गीय अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। तब उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी पहले तो पप्पू थे, लेकिन अब गधों के सरताज बन गए हैं। उस वक्त भी उनकी टिप्पणी पर काफी बवाल हुआ था।

‘मैंने क्या कर दिया मुझे याद नहीं’

विवाद के बाद आकाश ने कहा कि मैं बहुत गुस्से में था। मैंने क्या कर दिया मुझे नहीं पता। जनता और सरकारी कर्मचारी पूछ रहे हैं कि गुस्से में बल्ला अपने सिर पर क्यों नहीं मार लिया? आखिर नेताओं द्वारा कब तक गुंडागर्दी होती रहेगी? आखिर इस सफेदपोशी गुंडागर्दी का कब अंत होगा? यदि यही अपराध किसी नागरिक ने किया होता, कानून की क्या कार्यवाही होती? क्या समाजसेवा के नाम पर इस तरह की गुंडागर्दी होती रहेगी? निगम के अफसर ने एक महिला के साथ गाली-गलौज की और हाथ पकड़ा, जिससे मुझे गुस्सा आ गया। विवाद के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने एमजी रोड थाने का घेराव किया। वहीं, दूसरी तरफ मारपीट के विरोध में नगर निगम कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया। नगर निगम द्वारा विधायक के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाने की तैयारी की जा रही है।

विधायक समर्थकों ने वहां खड़ी पोकलेन मशीन और नगर निगम की गाड़ी पर पथराव कर उन्हें फोड़ दिया

भवन निरीक्षण धीरेंद्र बायस का कहना है कि खाली मकान जो जर्जर था उसे तोड़ने गए थे, विधायक आकाश और उनके 8 साथियों ने की मारपीट की। इस दौरान तीन नंबर क्षेत्र से विधायक आकाश विजयवर्गीय भी वहां पहुंच गए। उन्होंने निगम अधिकारियों को धमकी देते हुए कहा कि आप 5 मिनट में यहां से नहीं गए तो आगे जो होगा इसकी जिम्मेदारी आपकी होगी, उनके साथ मौजूद लोगों ने पोकलेन की चाबी भी निकाल ली। इसके बाद निगम के अधिकारियों और विधायक के बीच जमकर विवाद हो गया और मारपीट होने लगी।
इस दौरान विधायक समर्थकों ने वहां खड़ी पोकलेन मशीन और नगर निगम की गाड़ी पर पथराव कर उन्हें फोड़ दिया। विधायक आकाश विजयवर्गीय ने निगम कर्मियों पर पैसे लेकर मकान तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और उनका भाग इस मकान पर कब्जा करना चाहते हैं। आवेदन, निवेदन फिर दे-दना दन हमारे काम का तरीका है। अब नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार खत्म करेंगे।

विवाद के बाद एमजी रोड थाने का घेराव

विधायक आकाश विजयवर्गीय और उनके समर्थकों द्वारा नगर निगम अधिकारियों के साथ मारपीट के बाद जमकर हंगामा खड़ा हो गया। विधायक और भाजपा कार्यकर्ता वहां से एमजी रोड थाने पर पहुंच गए। इसके बाद भाजपा विधायक रमेश मेंदोला भी थाने पहुंच गए और निगम अधिकारियों द्वारा के खिलाफ जांच करने की बात कही। घटना की सूचना जैसे ही नगर निगम दफ्तर में लगी, सभी कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया। नगर निगम कर्मचारियों ने आज मनीष सिंह को याद किया। कहा चाटा कांड के बाद हुई कार्रवाई से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा था।

गृहमंत्री बोले सख्त कार्रवाई होगी

विधायक आकाश विजयवर्गीय ने जेडओ बायस के साथ पुलिस की मौजूदगी में मारपीट की। निगमायुक्त आशीष सिंह की समझाने के बाद कर्मियों ने हड़ताल की स्थगित। आयुक्त बोले जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई। भाजपा विधायक द्वारा निगम अधिकारियों की पिटाई मामले में गृहमंत्री बाला बच्चन ने कहा कि आकाश विजयवर्गीय के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। घटना से भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा उजागर हुआ है।
भाजपा को सत्ता का नशा 
उम्मीद की जा रही थी वो अपने बेटे की इस करतूत पर माफी मांगेंगे। माफी न भी मांगें तो अफसोस तो जरूर जताएंगे, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि सत्ता का नशा केवल उनके बेटे ही नहीं, उनके सिर चढ़कर भी बोल रहा है। ‘न्यूज24’ के एंकर रवि ठाकुर ने जब मारपीट की घटना पर कैलाश विजयवर्गीय की प्रतिक्रिया जाननी चाही तो वह अपना आपा खो बैठे। इतना ही नहीं, उन्होंने तो रवि ठाकुर से उनकी आौकात ही पूछ ली।
दरअसल, एंकर रवि ठाकुर ने फोन पर कैलाश विजयवर्गीय से संपर्क करके जानना चाहा कि वो अपने बेटे की करतूत पर क्या सोचते हैं। रवि ठाकुर ने पूछा,‘ये कौन से विधायक होते हैं तो कानून अपने हाथ में लेते हैं, बल्ला अपने हाथ में लेते हैं। एक विधायक की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था को कायम करने की होती है, लेकिन जब विधायक हाथ में बल्ला लेकर लोगों को मारने निकले तो....आपको अपने बेटे की निंदा करनी चाहिए।’
आप भी फैसला नहीं सुना सकते, आप कौन हैं? क्या है आपकी हैसियत, आप ऐसी बात करेंगे किसी विधायक के बारे में, अपनी औकात देखिये पहले।’--कैलाश विजयवर्गीय
यह सुनते ही कैलाश भड़क गए। उन्होंने खीजते हुए उल्टा सवाल किया, ‘आप जज हैं क्या? आप जजमेंट कर रहे हैं? जज मत बनिए।’ जब रवि ठाकुर ने कहा कि आप किसी पर बल्ला नहीं उठा सकते तो कैलाश ने जवाब में कहा कि आप भी फैसला नहीं सुना सकते, आप कौन हैं? क्या है आपकी हैसियत, आप ऐसी बात करेंगे किसी विधायक के बारे में, अपनी औकात देखिये पहले।’ इतना कहते ही कैलाश विजयवर्गीय ने फोन काट दिया।
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बेटे की गुंडागर्दी पर सवाल पूछा तो न्यूज़ 24 के ऐंकर से बोले कैलाश विजयवर्गीय - “तुम्हारी औक़ात क्या है?”
विधायक बेटे की इस गुंडागर्दी पर वरिष्ठ भाजपा नेता का यह बयान दर्शाता है कि उनकी नजर में कानून और मीडिया की कोई हैसियत नहीं है। जो उनके खिलाफ आवाज उठाएगा, उसे ये लोग इसी तरह हैसियत याद दिलाएंगे।
क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा केन्द्रीय वरिष्ठ नेता संज्ञान लेगे? मारो-पीटो फिर भी निर्दोष? क्या फोटुएं झूठ बोल रही हैं?