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मध्य प्रदेश : चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की जीत का जश्न मना रहे लोगों पर अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर चिल्लाती भीड़ ने कर दिया हमला: महू में आगजनी-पत्थरबाजी के बाद बुलानी पड़ी सेना; जेहादियों के आकाओं को भी गिरफ्तार करो

                                         इंदौर में कई जगह आगजनी भी हुई (साभार: Nai Dunia)
मध्य प्रदेश के इंदौर में चैंपियंस ट्रॉफी का जश्न मनाते लोगों पर मस्जिद से निकली मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। रमजान में मस्जिद में मौजूद लोगों ने चैंपियंस ट्रॉफी का जश्न मनाने वालों पर पथराव किया। इंदौर के कुछ इलाकों में कई गाड़ियों में आग लगाई गई। इस घटना के कई वीडियो भी वायरल हुए हैं।

जेहादियों को भटका, गरीब और नादान बताने वाले हिन्दू विरोधी छद्दम सेक्युलरिस्ट्स कहाँ है? इन पाखंडियों से पूछो भारत की जीत का जश्न भारत में नहीं मनेगा फिर कहाँ मनेगा? इन भटके, गरीब और नादान लोगों के पास पेट्रोल बम के लिए पेट्रोल के पैसे किसने दिए? पत्थर किसने सप्लाई किये और पत्थरबाज़ी के पैसे किसने दिए? जब तक इनके आकाओं को नहीं गिरफ्तार जेलों में डाला जाएगा जेहादी काबू में नहीं आएंगे। और अगर कोई कोर्ट इनकी गिरफ़्तारी पर प्रश्नचिन्ह लगा जेल से बाहर करती है उन जजों से उसी वक़्त पूछा जाए कि जब इसी तरह की पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बमों का इस्तेमाल होने की स्थिति में क्या निर्णय लोगे? जब तक तमाम अदालतें इन जेहादियों और इनके आकाओं के साथ सख्ती से पेश नहीं आएँगी हिंसा रुकेगी नहीं।         

रविवार(9 मार्च, 2025) को भारत ने न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हरा चैंपियंस ट्रॉफी जीत ली थी। इसके बाद पूरे देश में जश्न का माहौल था। इंदौर में भी युवा इसका जश्न मना रहे थे। उन्होंने बाइक पर बैठ कर इंदौर के अलग-अलग इलाकों में जुलूस निकाला।

जब यह सभी इंदौर के महू शहर में जामा मस्जिद रोड पर पहुँचे तो मस्जिद के सामने विवाद हो गया। एक वायरल वीडियो में दिखता है कि जुलूस के यहाँ पहुँचते ही मस्जिद से मुस्लिम भीड़ निकल आती है। इसके बाद शोर मचने लगता है। इस दौरान जुलूस में शामिल लोग टीम की जीत पर नारे लगा रहे होते हैं।

कुछ ही देर में यहाँ जुलूस पर हमला हो जाता है। वायरल वीडियो में अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के शोर भी सुनाई पड़ते हैं। इसके बाद लोग इधर उधर भागते हैं और पथराव होने लगता है। एक और वीडियो में दिखाई पड़ता है कि अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाती भीड़ एक स्कूटी तोड़ रही है।

इसके बाद यह पथराव जामा मस्जिद के अलावा पत्ती बाजार, सब्जी मार्केट, गफ्फार होटल समेत कई इलाके हिंसा की चपेट में आ गए। यहाँ भारतीय क्रिकेट टीम के फैन्स पर जम कर पथराव हुआ। इस पथराव के बाद दंगाई भीड़ ने कई गाड़ियों में आग भी लगा दी।

पेट्रोल बम भी चलाए जाने की सूचना है। दंगाई भीड़ ने कई जगह काफी गाड़ियाँ तोड़ी भी हैं। पथराव-आगजनी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। दंगे की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस के साथ ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ भी शहर में अलग-अलग जगह भेजी गईं।

इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वत्सल ने इस घटना के बारे में कहा, “इंडिया न्यूजीलैंड मैच के बाद जुलूस निकल रहे थे, इसमें मस्जिद के बाहर पटाखे चले तो विवाद हो गया। इसके बाद दो पक्षों के बीच पथराव हो गया। पुलिस बल अब मौजूद है। स्थिति नियंत्रण में है। अभी कुछ लोगों को चिन्हित किया गया है। रात को ही उनको पकड़ा गया है।”

एसपी ने अपील की कि लोग अफवाह ना फैलाएँ और उन पर विश्वास भी करें। एसपी वत्सल के अनुसार, 3 लोग इस पथराव में घायल हुए हैं। पुलिस ने घटना के बाद महू में लाठीचार्ज भी किया है। 300 से अधिक पुलिसवाले यहाँ तैनात किए गए हैं।

महू, भारतीय सेना का भी एक प्रमुख केंद्र है। इसके चलते प्रशासन ने सेना की भी त्वरित कार्यवाही बल (QRT) की 8 टुकडियां भी बुला लीं। सेना ने भी शहर में फ्लैग मार्च किया। पथराव करने वालों कड़ी कार्रवाई की माँग कई संगठनों ने की है।

मुफ्तखोर नाम से मशहूर दिल्ली में क्या 10 में से 8 बीजेपी को और 2 केजरीवाल को बहुमत दिखाने वाले Exit Poll पिछले चुनावों की तरह 8 फरवरी को फेल होंगे या पास? लेकिन जीत रेवड़ियों की होगी


दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के लिए 5 फरवरी 2025 को वोट डाले गए। नतीजे 8 फरवरी को आने हैं। उससे पहले ज्यादातर एग्जिट पोल्स बता रहे हैं कि दिल्ली की सत्ता में 27 साल बाद बीजेपी की वापसी होने जा रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) की जीत के आसार नहीं हैं। वहीं कांग्रेस का खाता मुश्किल से ही खुलता दिख रहा है।
अगर केजरीवाल को घोटालों के विरोध में वोट दिया जाता है तो देश में इतने घोटाले हुए क्यों उन पार्टियों को वोट दिया? इस कटु सच्चाई का जवाब कौन देगा?  

वैसे पिछले कुछ चुनावों से तमाम Exit Poll फेल होते देखे गए है। इसलिए 10 में से 8 Exit Poll द्वारा बीजेपी को बहुमत दिखाने पर शंका होती है। असलियत तो EVM में कैद हो चुकी जो फरवरी 8 को बाहर आएगी। महाराष्ट्र और हरियाणा में Exit Poll फेल होने का मुख्य कारण था, महाराष्ट्र में बीजेपी विरोधियों का मुस्लिम कट्टरपंथियों के पैरों में माथा टेकना और हरियाणा में भूपेंद्र हुड्डा का पहलवान फ़ोकट का स्वागत करते ही सारे पासे पलट गए थे। 

आम आदमी पार्टी के सत्ता से बाहर होने के कारण है कि केजरीवाल की ईमानदार नेता की छवि धूमिल होना, शिक्षा मंत्री रहे मनीष सिसोदिया का शराब घोटाले में जेल जाना, फ्री पानी की आड़ में पानी माफिया का सक्रीय होना आदि। वैसे तो दिल्ली मुफ्तखोर दिल्ली नाम से मशहूर हो चुकी है और बीजेपी का केजरीवाल को सत्ता से बाहर केजरीवाल पार्टी के घोटाले नहीं बल्कि केजरीवाल से ज्यादा बीजेपी द्वारा घोषित रेवड़ियां जितवाएंगी। यानि एक रेवड़ी दूसरी रेवड़ी को हराएगी। स्पष्ट शब्दों में मुफ्तखोर दिल्लीवासियों ने आत्मसम्मान रेवड़ियों के हाथ बेच एक बाजारू माल बना दिया है। आज तक पूरे देश ने अपनी जागरूकता का परिचय नहीं दिया। किसी ने यह नहीं कहा कि हमारा वोट लेने से पहले निगम पार्षद से लेकर सांसद को मिलने वाली पेंशन क्यों नहीं बंद होती। मूर्ख जनता को नहीं मालूम कि इस पेंशन पर हर महीने करोडो रूपए बर्बाद हो रहे हैं। जितनी पेंशन इन लोगों को मिलती है किसी मजदूर को छोड़ो एक सरकारी बाबू तक को अपना कार्यकाल पूरा करने पर नहीं मिलती। 

राजनीतिक गरियारों में यह चर्चा बहुत गरमा रही है कि दिल्ली चुनाव परिणाम एक नए राजनीतिक इतिहास की ओर जाएगा। बीजेपी नहीं चाहेगी कांग्रेस के ख़त्म होने से पहले आम आदमी पार्टी की दिल्ली से बिदाई हो। दूसरे, अगर दिल्ली का मुसलमान कांग्रेस के पाले में वापस जाकर 5 से 10 सीट दिलवा देता है वह कांग्रेस को ऑक्सीजन का काम करेगा उसका सारा गाँधी परिवार को नहीं संदीप दीक्षित दीक्षित, अजय माकन और अलका लाम्बा को जाएगा।    

अगर आम आदमी पार्टी को पूर्ण बहुमत दिखाने वाले 2 Exit Poll सच हो गए और अरविन्द केजरीवाल अपनी नई दिल्ली सीट हार जाता है तो पार्टी का टूटना निश्चित है। जेल जाने पर जिस तरह केजरीवाल अपनी पत्नी सुनीता के हाथ पार्टी सौंपने तैयार थे, उस कदम/सोंच ने पार्टी ने कई गुट बना दिए। मनीष-आतिशी, राघव चड्डा, भगवंत सिंह मान और स्वाति मालीवाल आदि  गुट बन गए हैं। केजरीवाल के हारने पर भगवंत सिंह द्वारा बिभव कुमार को पंजाब से भगाया जाएगा। पार्टी में गुटबाज़ी तो उसी दिन से शुरू हो गयी थी जिस दिन सरकारी अधिकारी को घर बुलाकर पिटाई की थी। लेकिन वह गुटबाज़ी ज्यादा नहीं चली, स्वाति मालीवाल की पिटाई ने उस गुटबाज़ी में नयी ऊर्जा का काम कर दिया। चर्चा यह भी है कि केजरीवाल के हारते के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बावजूद केजरीवाल को जेल जाने से कोई नहीं रोक पाएगा।            

MATRIZE के एग्जिट पोल में बीजेपी और आप के बीच कड़ी टक्कर दिख रही है। बीजेपी 35-40 तो AAP को 32-37 सीटें मिलने के आसार जताए गए हैं। कॉन्ग्रेस को एक भी सीट मिलने के आसार नहीं हैं। चाणक्य स्ट्रैटजी के एग्जिट पोल में बीजेपी की स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बन रही है। इसके मुताबिक बीजेपी को 39-44 सीटें मिल सकती है। आप 25-28 सीटों पर सिमट सकती है। कॉन्ग्रेस को 2-3 सीटों पर जीत मिलने की संभावना दिख रही है।

पोल डायरी के एग्जिट पोल में भी AAP हार रही है। उसे 18-25 सीटें मिल सकती है। बीजेपी 42-50 सीटें हासिल कर सरकार बनाती दिख रही है। कॉन्ग्रेस को 0-2 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। पीपुल्स इनसाट के अनुसार बीजेपी को 40 से 44 सीटें मिल सकती हैं। आप को 25 से 29 सीटें मिलने का अनुमान है।

 पी-मार्क के पोल में बीजेपी को 39-49 तो आप को 21-31 सीटों का अनुमान लगाया गया है। वहीं WeePreside के एग्जिट पोल में AAP की सत्ता कायम रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके अनुसार उसे 46 से 52 सीटें तो बीजेपी को 18 से 23 सीटें मिल सकती है।

ज्यादातर एग्जिट पोल बता रहे हैं कि इस बार केंद्र शासित प्रदेश में लोगों ने डबल इंजन सरकार के लिए मतदान किया है। वहीं 15 साल तक लगातार दिल्ली पर शासन करने वाली कॉन्ग्रेस के दिन बदलने के आसार नहीं हैं, जबकि 12 साल सत्ता में रहने के बाद AAP की विदाई होती दिख रही है।

एग्जिट पोल्स के बाद बीजेपी में उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मालवीय नगर से प्रत्याशी सतीश उपाध्याय ने कहा है कि झाड़ू के तिनके बिखर गए हैं और कमल खिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। वहीं AAP ने एग्जिट पोल्स को खारिज कर दिया है। पार्टी नेता सौरव भारद्वाज ने कहा है कि इससे पहले के चुनावों में भी आप की हार दिखाई गई थी, लेकिन पार्टी बड़ी बहुमत के साथ सरकार बनाने में कामयाब रही थी।

ट्रंप और मोदी विरोधियों के समर्थक और नारों में कोई फर्क नहीं; डोनाल्ड ट्रंप ही नहीं जीते, अमेरिका ने आस्तीन के सांपों और उस मानसिकता को भी हराया जो हिंदू-भारतीय पहचान को कर रहा था टारगेट

भारत में संविधान का मजाक बनाने में हरकत में रहे नरेंद्र मोदी विरोधियों को जनता ने पहचानने की भूल करना ही सबसे भयंकर गलती की। मोदी भारत के एक राज्य के मुख्यमंत्री और अमेरिका को बार-बार मोदी को वीसा नहीं देने के लिए लिखना ही देश का अपमान था। समय बड़ा बलवान होता है, प्रधानमंत्री बनने पर सबसे पहला निमंत्रण अमेरिका ने दिया नहीं बल्कि उन सभी विरोधियों को करारा जवाब था। प्रधानमंत्री बनने पर मोदी का पहले विदेशी दौरा अमेरिका का ही था।   
कल (7 नवंबर) डोनाल्ड ट्रम्प की जीत के बाद लिखा था कि ट्रम्प की जीत ने अमेरिका में पल रहे भारत विरोधियों, विशेषकर भारतीय विपक्ष को करारा जवाब है। ट्रम्प और मोदी विरोधियों और उनके नारों में कोई फर्क नहीं होना अपने आपमें सबसे बड़ा सबूत है इनका देश विरोधी ताकतों की कठपुतली होने का। काश कमला हैरिस जीत गयी होती, भारत में सारे आन्दोलनजीवियों को ऑक्सीजन मिल गयी होती। आज मुस्लिम कट्टरपंथियों और विपक्ष में हड़कंप मच गया है। टीवी चर्चों में इनके चेहरे और बौखलाहट देखते बनती थी। जिस तरह भारत में लोक सभा चुनावों में 'संविधान खतरे में', 'लोकतंत्र खतरे में', 'फिर दुबारा चुनाव नहीं होंगे' और हिटलर आदि नारे लगे थे वही नारे अमेरिका में भी लगे। मतलब दोनों देशों में विपक्ष देश विरोधी ताकतों की गुलाम बनी हुई थी। यानि जिसे देश से प्रेम नहीं जनता से क्या होगा? अगर भारत में जनता 'खटाखट' के नाम पर लालची और भिखमंगों की तरह दुम हिलाते हुए नहीं भागते विपक्ष सिकड़ा हुआ होता। 
भारत में जिन घुसपैठियों को विपक्ष अपना समर्थन दे रहा है, अमेरिका में भी यही मुद्दा चुनाव में गर्म रहा और जनता में सरकार द्वारा घुसपैठियों को संरक्षण देना भी कमला हैरिस की हार का मुख्य कारण बना। यह कमला हैरिस की हार नहीं बल्कि विश्व में राष्ट्र विरोधियों की हार है। जो पार्टी या पार्टियां देश विरोधियों के हाथ कठपुतली बन नाचते हो उन पर विश्वास करना जनता की सबसे बड़ी भयंकर भूल होगी, अगर वर्तमान पीढ़ी ने होश से काम नहीं लिया आने वाली पीढ़ियां ही तुम्हे पानी पी-पी कर कोसेगी। भारत से लेकर अमेरिका तक विपक्ष के एक ही समर्थक और नारों में समानता अपने आपमें ही सारे सबूत दे रहे हैं।     
ट्रम्प की जीत से अमेरिका में पल रहे ट्रम्प लू और पुन्नू आदि भी अब सोंच समझकर भारत के विरुद्ध कोई बात बोलेंगे। यह अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की जीत नहीं वास्तव में भारत की सबसे बड़ी जीत है। बांग्लादेश और कनाडा में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध पूरे विश्व में बोलने वाले डोनाल्ड ट्रम्प है। अभी भी समय रहते भारतीयों खासतौर पर सनातनियों को इन आस्तीन के सांपों के फन को कुचलने एकजुट हों। कोई ताकत भारत को बांग्लादेश नहीं बना पायेगी। उन सबकी कमर टूट गयी है।         
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका के पावरसेंटर से एक भारतवंशी बाहर हो गई हैं। इस भारतवंशी का नाम कमला हैरिस है। ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनावों में उन्हें 270 इलेक्टोरल वोट पाकर करारी हार दी। मतलब साफ है कि इस बार अमेरिकी जनता ट्रंप के साथ थी। हालाँकि, कमला के सत्ता से बाहर होने का मतलब ये नहीं है कि उनके जाने से भारतीयों की दखल अमेरिकी राजनीति में खत्म हो गई हो।

ट्रंप ने अपनी जीत से पहले ही ये सुनिश्चित कर दिया था कि भारतीयों की भागीदारी उनके कार्यकाल में भी बनी रहे। दरअसल, उन्होंने अपनी सरकार में जिन्हें उपराष्ट्रपति चुना है वो जेडी वेंस है और वेंस की पत्नी उषा चिलुकुरी एक भारतीय हैं।

वामपंथियों के निशाने पर उषा चिलुकुरी

जेडी के उपराष्ट्रपति बनने के बाद उषा चिलुकुरी अमेरिका की द्वितीय महिला होंगी। इन चुनावों से पहले जब जेडी वेंस के नाम का ऐलान हुआ था तब वामपंथियों ने सोशल मीडिया पर उषा को बहुत ट्रोल किया था। उन्हें उनके हिंदू होने के कारण सोशल मीडिया पर निशाना बनाया गया था। उन्हें गालियाँ दी गई थीं। उनकी और जेडी की शादी पर सवाल उठाए गए थे। कहा गया था कि ये सब सिर्फ हिंदू वोट पाने के लिए किया गया है। हालाँकि अब इन सबपर विराम है। चारों ओर अगर किस्से हैं तो सिर्फ इसके कैसे उषा के आने से जेडी वेंस की जिंदगी बदली।

भारत से कैसे जुड़े जेडी वेंस

आपको जानकर हैरानी होगी कि वेंस की सफलता में उषा का बड़ा हाथ रहा है और आज JD वेंस भी अपने स्पष्ट विचारों के लिए जाने जाते हैं। उषा से उनकी मुलाकात येल यूनिवर्सिटी में पढ़ने के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों में प्रेम सबंध हो गए 2014 में दोनों ने शादी कर ली। दिलचस्प बात ये है कि जेडी वेंस और उषा की शादी हिंदू पंडित द्वारा तमिल रीति-रिवाज ही कराई गई थी। इसके बाद जेडी वेंस भारत और भारतीयों से, उनकी संस्कृति से स्वत: जुड़ते गए। आज उनकी छवि भारत के समर्थक के तौर पर जानी चाती है। उन्होंने 2022 में रिपब्लिकन पार्टी से चुनाव लड़के सांसद पद हासिल किया था और 2024 में वह उपराष्ट्रपति पद के लिए चुने गए।
भारतीय लोगों का उनसे लगाव उनके भारतीय कनेक्शन यानी उषा के कारण अधिक है। पेशे से सफल वकील उषा भले अमेरिका में जन्मीं लेकिन उनकी जड़े भारत की है। उनके माता-पिता का नाता भारत के आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले से है। 1980 के दशक में अमेरिका जाने के बाद भी उषा के परिवार ने अपने धर्म को नहीं छोड़ा और बेटी को संस्कृति से जोड़े रखा।

अमेरिका में भारतीयों का रुतबा

अमेरिका में हुए चुनाव सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप की जीत या जेडी वेंस के उपराष्ट्रपति बनने को लेकर नहीं हैं। अमेरिका के लोगों ने ट्रंप को राष्ट्रपति बनाकर उस सोच भी हराया है जो हिंदुओं को और भारतीयों को अपना निशाना बनाते हैं। इसके अलावा ये यह भी बताता है कि अमेरिका की आबादी में भले ही भारतवंशी कम हैं लेकिन उनका प्रभाव बहुत ज्यादा है। कारण दो हैं। राजनीति और बिजनेस।
अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियों में टॉप पोस्ट पर कई भारतीयों का बोलबाला रहा है। फिर चाहे माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ के तौर पर चुने गए सत्या नडेला हों, गूगल के सीईओ रहे सुंदर पिचई हों, हॉटमेल के सहसंस्थापक सबीर भाटिया हों। इन सभी नामों के कारण भारत हमेशा से अमेरिका में अपनी शीर्ष जगह पाता रहा है। रही बात वामपंथियों की तो उन्हें उस व्यक्ति से समस्या है जिसकी जड़ें हिंदुत्व से जुड़ी हों। उषा अकेली नहीं है जिन्हें निशाना बनाया गया।
तुलसी गबार्ड को भी इससे पहले उनकी हिंदू पहचान के कारण निशाना बनाया जा चुका है। 2020 में तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी कॉन्ग्रेस की सदस्य चुने जाने के बाद सोशल मीडिया पर कहा भी था कि कॉन्ग्रेस के लिए जब भी वो चुनावी तैयारी करती हैं या राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल होती हैं, तब-तब उन्हें हिंदूफोबिया का अनुभव होता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में नेता और मीडिया न सिर्फ इसे बर्दास्त करते हैं, बल्कि इसे बढ़ावा भी देते हैं।

राहुल ने करा ली इंटरनेशनल बेइज्जती, गैरी कास्परोव ने तंज कसते हुए कहा- पहले रायबरेली तो जीत लो

                                                    राहुल गाँधी पर गैरी कास्परोव का तंज!
नेता लोग के बीच में सबसे धाँसू चेस कौन खेलता है? राहुल गाँधी। अपने आप को चेस का सरताज (Rahul Gandhi best chess player among politicians) खुद राहुल गाँधी ने ही बताया है। वैसे उनका फेवरिट चेस प्लेयर है गैरी कास्परोव। यह भी उन्होंने खुद ही बताया है। जिस दिन उन्होंने यह सब कुछ बताया, उसी दिन गैरी कास्परोव (Garry Kasparov) ने उनको पहले रायबरेली से जीतने और तब जाकर टॉप के लोगों को चैलेंज करने की सलाह दे डाली है – एकदम इंटरनेशनल बेइज्जती टाइप फील करवा दिया।

राहुल गाँधी को भारत के लोग सिरियसली नहीं लेते हैं। यह बात सबको पता है, कॉन्ग्रेसियों तक को! लेकिन सबसे महान चेस खिलाड़ियों में से एक, रूस के गैरी कास्परोव, जो अब अमेरिका में रहते हैं, उन्हें भी राहुल गाँधी एक मजाक से ज्यादा कुछ नहीं लगते, यह एक ट्वीट से पता चल गया। लेकिन यह हुआ कैसे?

हुआ यह कि राजनीतिक विश्लेषक और स्तंभकार संदीप घोष ने एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने गैरी कास्परोव और विश्वनाथन आनंद को टैग किया और तंज करते हुए लिखा – “मुझे बहुत राहत महसूस हो रही है कि गैरी कास्परोव और विश्वनाथन आनंद जल्दी रिटायर हो गए। इस कारण से इन दोनों को हमारे समय के सबसे बड़े शतरंज खिलाड़ी (राहुल गाँधी की ओर इशारा) का सामना नहीं करना पड़ रहा।”  

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी ने अपनी इंटरनेशनल बेइज्जती करा ली है। सोशल मीडिया पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी की काफी किरकिरी हो रही है। असल में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अमेठी की जगह रायबरेली से चुनाव लड़ने के फैसले को पार्टी के सीनियर लीडर ने शतरंज की चाल बताया। कांग्रेस ने यह भी कहा कि राहुल गांधी सियासत और शतरंज के मजे हुए खिलाड़ी हैं।

कांग्रेस ने चेस पर बात करते हुए राहुल गांधी का एक वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में कांग्रेस सांसद के बारे में कहा गया कि वे शतरंज के माहिर खिलाड़ी हैं और हमेशा आगे की कई चालें सोच लेते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पोते राहुल गांधी के बारे में इतनी बातें सुनने के बाद राजनीतिक विश्लेषक संदीप घोष ने कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया कि ‘इससे मुझे बहुत राहत महसूस हो रही है कि गैरी कास्परोव और विश्वनाथन आनंद जल्दी रिटायर हो गए और उन्हें हमारे समय के सबसे बड़े शतरंज खिलाड़ी का सामना नहीं करना पड़ रहा।’

 इसके बाद मैदान में चेस के असली खिलाड़ी ग्रैंडमास्टर गैरी कास्परोव की भी एंट्री हो गई। शतरंज के चैंपियन रहे रूसी ग्रैंडमास्टर गैरी कास्परोव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि चेस की परपंरा के अनुसार राजा को चुनौती देने से पहले रायबरेली सीट तो जीत लो।

अवलोकन करें:-

अमेठी-रायबरेली में हार का डर: डरो मत, भागो मत: इंडो-पाक युद्ध के दौरान पायलट राजीव छुट्टी पर क्यों

कास्परोव के यह ट्वीट करते ही सोशल मीडिया पर लोग मजे लेने लगे। सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की किरकिरी होने लगी।

नीदरलैंड : नुपूर शर्मा के ‘हमदर्द’ गीर्ट वाइल्डर्स के प्रधानमंत्री बनने की प्रबल संभावनाएं

नुपुर शर्मा का समर्थन कर चुके गीर्ट वाइल्डर्स के नीदरलैंड के पीएम बनने के आसार (फोटो साभार: Britannica/ABP)
यूरोपीय देश नीदरलैंड के चुनाव नतीजों ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा (Nupur Sharma) को चर्चा में ला दिया है। वजह हैं गीर्ट वाइल्डर्स (Geert Wilders)। वाइल्डर्स की पहचान एक ऐसे नेता के तौर पर है जो इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ मुखर हैं।

बीते साल जब ‘ऑल्ट न्यूज’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने नूपुर शर्मा को टारगेट किया था, तब वाइल्डर्स ने बीजेपी की इस पूर्व नेता का समर्थन किया था। जुबैर के उकसावे के बाद से नुपुर शर्मा को जिहादी हत्या की धमकी दे रहे हैं। वे सार्वजनिक जीवन से दूर रहने को मजबूर हैं।

हालिया चुनावों के बाद गीर्ट वाइल्डर्स के नीदरलैंड के प्रधानमंत्री बनने के आसार हैं। दक्षिणपंथी वाइल्डर्स की पार्टी को एग्जिट पोल में सर्वाधिक सीट मिलती दिख रही है। 22 नवम्बर 2023 को नीदरलैंड के आम चुनावों के लिए सामने आए एग्जिट पोल में यह स्पष्ट हो गया है कि वाइल्डर्स की कंजर्वेटिव पार्टी फॉर फ्रीडम (PVV) सर्वाधिक 35 सीटें जीतने की ओर है। उनकी पार्टी नीदरलैंड में इस्लाम के प्रसार के विरुद्ध रही है। ऐसे में इन नतीजों का पूरे यूरोप पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।

PVV नीदरलैंड में मस्जिदों, कुरान और हिजाब पर प्रतिबंध लगाने की माँग करती रही है। अब 150 सीटों वाली नीदरलैंड की संसद में यह सबसे अधिक सीटों वाला दल बनने की और अग्रसर है। उनकी पार्टी को यूरोप के अन्य दक्षिणपंथी नेताओं और पार्टियों की तरफ से बधाई मिल रही है।

PVV सरकार बनाने में सबसे आगे होगी। सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। उसे 35 सीटें मिल सकती हैं। यह 2021 के मुकाबले दोगुनी है। हालाँकि, स्पष्ट बहुमत ना होने के कारण उसे अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन करना होगा। लेकिन इस बात की पूरी संभावना है कि गठबंधन का नेतृत्व करते हुए गीर्ट वाइल्डर्स प्रधानमंत्री बनेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में अभी 8-10 महीने का समय लगने की संभावना है।

कौन हैं गीर्ट वाइल्डर्स?

गीर्ट वाइल्डर्स एक दक्षिणपंथी डच नेता हैं। वह अपने इस्लाम विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं। वह वर्ष 2004 के बाद से लगातार पुलिस सुरक्षा में रहते हैं। उनके एक बार मोरक्को के लोगों को कूड़ा बोलने पर काफी विवाद हुआ था।
वाइल्डर्स पिछले ढाई दशकों से नीदरलैंड की राजनीति में सक्रिय हैं, वह 1998 के बाद से डच संसद में हैं। उनका ताल्लुक एक सामान्य माध्यम वर्गीय परिवार से है। वह 1981 से 1983 के बीच इजरायल में भी रहे हैं। इस दौरान उन्होंने मध्य एशियाई देशों की यात्रा की, जिस दौरान उनके इस्लाम विरोधी विचार बने।
वाइल्डर्स को अवैध प्रवासियों के प्रति उनके कठोर रवैए और डच हितों को सबसे आगे रखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने जुलाई 2022 में भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा और बांग्लादेशियों का मुद्दा भी डच संसद में उठाया था। उन्होंने अक्टूबर 2022 में भी नुपुर शर्मा के समर्थन में ट्वीट किया था।
गीर्ट वाइल्डर्स ने हिन्दुओं से सहिष्णुता छोड़ने का अपील भी की थी।
डच सांसद ने भारत में हिंदुओं पर हमले की घटनाओं का भी जिक्र किया था। उन्होंने नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा एक हिंदू दर्जी (कन्हैया लाल) का सिर कलम करने की घटना पर भी प्रकाश डाला था।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर भी वे सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय से बांग्लादेश में हिंदू घरों, पूजा स्थलों और दुकानों में आग लगानी वाली घटना पर विचार करने को कहा था। मालूम हो कि 15 जुलाई 2022 को बांग्लादेश में लोहागारा के सहपारा इलाके में कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हिन्दुओं के एक मंदिर, किराने की दुकान और कई घरों को तोड़ दिया था।