‘घुसपैठियों को खुश करना बंद करो’: कर्नाटक हाई कोर्ट की दो टूक, अवैध बांग्लादेशियों की पोल खोलने वाले डॉक्टर पर FIR करने पर पुलिस को फटकार

कर्नाटक हाई कोर्ट (फोटो साभार : Bar & Bench
कर्नाटक हाई कोर्ट ने अवैध बांग्लादेशी की पहचान कराने वाले डॉक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नागेंद्र के खिलाफ दर्ज 2 आपराधिक मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने दोनों मामलों की आगे की जाँच पर अंतरिम रोक लगा दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य पुलिस और गृह विभाग के कामकाज पर सवाल उठाए।

कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि घुसपैठियों को रोकने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, न कि ऐसे लोगों को संरक्षण देने पर। कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को पहली नजर में आपराधिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का मामला माना है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को होगी।

डॉक्टर ने दी थी घुसपैठियों की जानकारी

 याचिकाकर्ता डॉ नागेंद्र की ओर से अदालत में बताया गया कि वह पेशे से डॉक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह लंबे समय से बेंगलुरु में रह रहे कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान करने में पुलिस की मदद कर रहे थे।

वकील ने बताया कि 22 जुलाई 2026 को डॉ नागेंद्र ने जाँच अधिकारी को बांग्लादेशी घुसपैठियों की मौजूदगी की जानकारी दी थी। यह सूचना विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को भी भेजी गई। लेकिन इसके कुछ ही मिनट बाद घटनाक्रम पूरी तरह बदल गया।

15 मिनट बाद डॉक्टर के खिलाफ दर्ज हो गई FIR

कोर्ट में बताया गया कि FRRO को सूचना भेजे जाने के करीब 15 मिनट बाद ही एक कथित अवैध प्रवासी ने डॉ नागेंद्र के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज करा दी। इतना ही नहीं, उसी दिन बाद में डॉ नागेंद्र की ओर से की गई दूसरी शिकायत के बाद भी दूसरे थाने में उनके खिलाफ एक और आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया। उन्हें गिरफ्तार किया गया, न्यायिक हिरासत में भेजा गया और अगले ही दिन जमानत मिल गई।

सुनवाई के दौरान जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने पूछा कि यदि कोई व्यक्ति घुसपैठियों की जानकारी देता है तो उसी घुसपैठी की शिकायत के आधार पर उसके खिलाफ मामला कैसे दर्ज किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि शिकायत में खुद बांग्लादेश का पता दर्ज है। ऐसे में पुलिस ने बिना प्रारंभिक जाँच के एफआईआर कैसे दर्ज कर ली। कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।

‘घुसपैठ रोकिए, दूसरी बातों में समय मत गँवाइए’

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य के गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले अवैध घुसपैठ को नियंत्रित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस इस तरह अवैध प्रवासियों के पक्ष में काम करेगी तो यह देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी व्यवस्था को किसी भी हालत में बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए।

विशेष लोक अभियोजक बीएन जगदीश ने अदालत को बताया कि जिन लोगों को अवैध प्रवासी बताया गया है, उन्हें पहले ही FRRO के सामने पेश किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन लोगों को डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। अभियोजन पक्ष का कहना था कि शिकायतकर्ता ने डॉ नागेंद्र पर मारपीट का आरोप लगाया है। वहीं कोर्ट ने FRRO को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया और उसकी ओर से पूरी स्थिति रिपोर्ट माँगी है।

‘घरों में जगह देने वालों पर भी हो कार्रवाई’

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उन लोगों पर भी चिंता जताई जो बिना वैध दस्तावेज वाले विदेशी नागरिकों को किराए पर मकान देते हैं। कोर्ट ने कहा कि कुछ लोग थोड़े ज्यादा पैसे के लालच में ऐसे लोगों को रहने की जगह दे देते हैं। अगर लालच देश की सुरक्षा पर भारी पड़ने लगे तो यह गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने कहा कि ऐसे मकान मालिकों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

उमर खालिद से शरजील इमाम तक, जंतर-मंतर पर Gen Z की रील्स में ही देशविरोधी इरादों का खुलासा


कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर पर चल रहे धरने में प्रदर्शनकारियों में छात्र भी हैं, लेकिन केवल छात्र भर ही नहीं है। सिमी के फाउण्डर से लेकर उमर खालिद, शरजील समर्थक तक सब हैं। ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ वाली पूरी ढपली गैंग, लेफ्ट लिबरल गैंग और पूरी तरह एक्सपोज्ड केजरीवाल टीम भी। देशविरोधी तत्व भी हैं और मोदी सरकार के सियासी विरोधी भी। जंतर-मंतर पर Gen Z के बयानों की रील्स से ही देशविरोधी इरादों का खुलासा हो गया है। पेपरलीक पर प्रदर्शन करने वालों का शर्मनाक और एक संगठित गिरोह है। इसे नेस्तनाबूद करना जरूरी है। दरअसल, नीट पेपरलीक से शुरू हुए आंदोलन का स्वरूप और स्वर धीरे-धीरे बदल गए हैं। परीक्षा सुधार, दोषियों पर कार्रवाई और युवाओं के भविष्य जैसे मूल मुद्दे पीछे छूटने लगे हैं, जबकि भारत विरोधी, सरकार विरोधी, भाजपा विरोधी, संघ विरोधी, वैचारिक संघर्ष और राजनीतिक नारे केंद्र में आ गए हैं। इससे सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं छात्रों का हुआ है, जिनके लिए आंदोलन शुरू हुआ था।

लोकतंत्र में विरोध का अधिकार हर नागरिक को है, लेकिन किसी भी जनआंदोलन की विश्वसनीयता इस बात से तय होती है कि वह अपने मूल उद्देश्य पर कितना केंद्रित रहता है। अब ये आंदोलनकारी नहीं, बल्कि उपद्रवकारी बनकर कह रहे हैं कि उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे देशद्रोहियों को रिहा करना होगा।

छात्र हितों के नाम पर आंदोलन करने वालों का एजेंडा सामने आने लगा है कि बीजेपी के फोलोअर्स कम करो। ये यहां पर छात्र हितों की बातें कम और बीजेपी-संघ का विरोध करने वाली बातें ज्यादा करते हैं।

छात्र हितों की बात करने के नाम पर जंतर मंतर पर ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ जैसे नारे लग रहे हैं। इससे युवाओं को खासा आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि यहां पर ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद या बीजेपी-आरएसएस हो बर्बाद के नारे लगे तो वे इनका यहीं पर इलाज कर देंगे।

जंतर मंतर पर कॉकरोचों की भीड़ में कई ऐसे कॉकरोच भी शामिल हैं, जो न छात्र हैं, न उनका नीट से कोई लेना देना है। न उनको मुद्दे का पता है। बस जंतर-मंतर पर पहुंच गए और बंट रहे मास्क को पहनकर खुद भी कॉकरोच बन गए। 

जंतर मंतर पर जमा जेन जी को छोड़िए कॉकरोज जनता पार्टी के मुखिया अभिजीत दीपके तक गलत नैरेटिव सैट करने में पीछे नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं और लड़कियों के पुलिस ने फोटो खींचे और खुद लड़कियों के साथ सेल्फी खिंचवाकर हीरोगिरी करते नजर आए।

जंतर मंतर के मंच पर अब हिंदू-मुस्लिम भी होने लगा है। आंदोलनरत होने के बजाए जेन जी वहां मस्ती में गा रही है- बस नाम रहेगा अल्लाह का! ये दिखावे भर के लिए छात्र हितैषी होने का दम भरते हैं। असल में तो यह लेफ्ट लिबरल गैंग से ही हैं।

जंतर-मंतर में कॉकरोचों की पैरवी में दिन रात एक कर रहे जेन जी कॉकरोचों को उस NEET का फुल फॉर्म तक नहीं मालूम है, जिसके लिए उन्होंने एक महीने बवाल मचाया हुआ है। 

मैडम जी, मैं तो बस यूं ही सपोर्ट करने आ गया। मैं कोई पढ़ाई-वढ़ाई नहीं करता हूं। मैं तो जॉब करता हूं। मुझे तो कॉकरोच पार्टी के प्रवक्ता का नाम तक नहीं मालूम है।

जंतर-मंतर पर इस बंदे ने तो सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का भी एजेंडा खोलकर रख दिया। जम्मू-कश्मीर का रहने वाला सोनम क्या यह कभी कश्मीरी पंडितों पर हमले के खिलाफ धरने पर बैठा। क्या यह कभी आतंकियों के खिलाफ धरने पर बैठा। क्यों नहीं बैठा, क्योंकि उस समय कोई एजेंडा नहीं था।

ये कॉकरोच जनता पार्टी नहीं है, बल्कि असल में टुकड़े-टुकड़े गैंग है। इसमें भारत से ही नहीं, बल्कि अमेरिका और विदेशों से भी लोग आए हैं। ये बांग्लादेशी हैं, ये नारे लगा रहे हैं कश्मीर की आजादी-भारत की बर्बादी। इनका भारत से कोई लेना-देना नहीं है।

जंतर मंतर पर जमा जेन जी को कुछ भी पता नहीं कि मुद्दा कहां से शुरू हुआ। पार्टी कैसे अस्तित्व में आई। जेन जी ने कहा कि मंत्री ने हमें कॉकरोच बोला है। जब इनसे पूछा कि किस मंत्री ने तो चुप्पी साध ली।

विपक्ष इनको निर्दोष बच्चे बता रहा है, जबकि जंतर-मंतर पर एक आंदोलनकारी महिलाओं को अश्लील इशारे करता नजर आया। महिला पत्रकार से बदसलूकी का मामला भी सामने आया है।

अभिजीत दीपके को पांच बजे तक परमीशन मिली थी, लेकिन दो बजे ही भाग छूटा। मतलब पसीने छूट गए, एसी में बैठाया। ये वहां का वाशरूम इस्तेमाल नहीं करता। वहां खाना नहीं खाऊंगा, फाइव स्टार का खाना खाऊंगा। मैं अनशन पर नहीं बैठूंगा, सोनम अनशन करें। असल में यह जार्ज सोरोस फंडेड हैं। जो लोग नीट के पेपर लीक पर राजनीति कर रहे हैं, उन्हे चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए।

कॉकरोच जनता पार्टी के कर्ताधर्ता अभिजीत दीपके को अब निहंगों ने भी चेतावनी दे दी है। उन्होंने साफ-साफ कहा के कि दीपके या तो तत्काल माफी मांग ले, अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।

 

जनता कॉकरोचों का मजाक बना रही है और कॉकरोचों का मुखिया अपने ही समर्थकों का मजाक उड़ाने में मशगूल है। अभीजीत दीपके एक वीडियो में तंज कसते नजर आता है और कहता है- सबसे फनी चीज क्या है कि मैं सुबह उठता हूं तो ये लोग चिल्लाना शुरू कर देते हैं। धर्मेंद्र प्रधान आउट। मैं कहता हूं अरे अभी उठने तो दो। इनका बस चले तो ये प्रधान को भी न उठने दें।

बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी कहते हैं कि अगर मुद्दा शिक्षा व्यवस्था है तो इसका मोदी को पीटेंगे…मोदी को उखा फेंकेगे इससे क्या लेना-देना है। मोदी का लास्ट डे होगा- इसका शिक्षा व्यवस्था से क्या लेना-देना है। और  प्रेमानंद महाराज पाखंडी हैं इसका शिक्षा से क्या लेना-देना है। वहां गाना गाया जाता है कि नाम रहेगा अल्लाह का….इसका धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से क्या लेना-देना है।

कॉकरोचों के बर्बर आंदोलन की पोल कांस्टेबल अंकित कसाना ने खोली। वे आंदोलनकारियों की पत्थरबाजी में जख्मी हो गए थे। उन्होंने बताया कि इन लोगों को शांत रखने के लिए कहा गया था। लेकिन अचानक हम पर पथराव शुरू हो गया। यह पथराव सुलभ शौचालय की छत से पत्थरबाजी हो रही थी। टाइलों को घिस-घिसकर वैपन के रूप में फेंक रहे थे। वे किसी भी तरह छात्र नहीं लग रहे थे। से वे लोग तो मुझे जान से मारने वाले थे।

सनातन का अपमान, स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’ विकसित करने वाले वैज्ञानिक का उड़ाया मजाक


कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की सनातन धर्म में कोई आस्था नहीं है। सनातन संस्कृति, गौ माता और भारतीय वैज्ञानिकों का अपमान करना इनकी आदत बन चुकी है। 7 नवंबर 1966 (गोपाष्टमी) को गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर स्वामी करपात्री जी महाराज और कई हिंदू संगठनों ने संसद भवन के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साधु-संतों पर गोली चलाने का निर्देश दिया था, जिसमें सैकड़ों साधु-संत मारे गए थे। पार्लियामेंट स्ट्रीट साधुओं के खून से लाल हो गयी थी। आज फिर इंदिरा गांधी की पोती प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटना की याद ताजा कर दी है। उन्होंने संसद में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन, पुलिस लाठीचार्ज और परीक्षा सुधार को लेकर गठित समितियों पर बोलते हुए गौ माता और वैज्ञानिक का अपमान किया।
चुनावों में हिन्दुओं को गुमराह करने रुद्राक्ष की माला पहन मन्दिरों में जाती है लेकिन मुस्लिम क्षेत्रों में हाथ में कलावा तक नहीं होता। आखिर मुस्लिमपरस्त पार्टी से सनातन का गुणगान कैसे कर सकती है? कुछ लोग कहते थे कि प्रियंका गाँधी कांग्रेस के लिए राहुल गाँधी से बेहतर विकल्प हो सकता है, मुझे भी लगता था!
लेकिन शायद कांग्रेस को हकीकत पता थी, शायद इसीलिए राहुल के लगातार फेलियर के बावजूद प्रियंका को कभी कांग्रेस अध्यक्ष या PM मेटेरियल के रूप में प्रोजेक्ट करने का साहस नही किया!
जुलाई 28 को संसद में छात्रों के भविष्य और पेपर लीक विरोधी कानून जैसे गम्भीर मुद्दे पर प्रियंका गाँधी ने सिर्फ एक लाइन बोली कि ये पूरा कानून ही बेकार है, इससे पेपर लीक नही रुक सकता है!
आपको याद होगा इसी मानसिकता से इसने राजस्थान में लगभग हर पेपर लीक पर गहलोत का बचाव करते हुए कहा था कि गहलोत जी प्रयास कर रहे है! फिर भी पेपर लीक हो रहे है तो क्या करे?
क्योकि मंशा छात्रहित न होकर सिर्फ छात्रों के नाम पर राजनीति करना हो तो फिर सुझाव कहाँ से आएंगे?
अपनी योग्यता से IIT मद्रास जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के निदेशक पद पर बैठे प्रोफेसर कामाकोटी वीझिनाथन को गोमूत्र विशेषज्ञ बताकर हंसने लगी जैसे तो सनातन आस्था का मजाक बना रही हो? और गुलाम हिन्दू कांग्रेसी हंस रहे थे।
प्रियंका का कहना कि IIT मद्रास के निदेशक को शिक्षा बारे में क्या पता, अब कोई इनसे पूछे कि वो इस पद पर किसी खानदान में पैदा होने से नही पँहुचे बल्कि शिक्षा के दम पर ही पँहुचे है!
तुम दोनो बहन भाइयों को शिक्षा के बारे में क्या पता? एक खानदान में पैदा होने के अलावा तुम्हारी क्या योग्यता है जो तुम लोगो की लांचिंग ही सीधे राष्ट्रीय पदों पर होती है?
तुम दोनो भाई बहिन कांग्रेस का लीक नही रोक पा रहे तुम से पेपर लीक पर सुझाव की वैसे भी कोई उम्मीद नही है!
कभी नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर अनर्गल आरोप लगाने लगी!
न किसी क्लोज की बात की, न कोई और सुझाव दिया सीधे बोल दिया, नई कमेटियां बनाने से काम नहीं चलेगा। राधाकृष्णन कमेटी भी बनी थी लेकिन उसकी एक भी सिफारिश लागू नहीं की गई।
यहाँ भी साफ झूठ बोला, राधाकृष्ण कमेटी की 60% सिफारिश लागू हो चुकी है!
अभी तक इस मुद्दे पर विपक्ष के किसी वक्ता की तरफ से इस मुद्दे पर कोई सुझाव नही आया, आएगा भी कैसे, इनके पास सुझाव ही होते तो पहले इनकी सरकारों में ही कोई ठोस कानून बन गए होते, पेपर लीक तो पहले भी होते थे लेकिन इन्होंने तो कोई कानून लाने का प्रयास ही नही किया था!
आज सरकार प्रयास कर रही है तो ये लोग इसे सिर्फ सरकार को गरियाने का मुद्दा समझकर चुनावी भाषण दे रहे है, गम्भीर मुद्दे को सदन में मजाक बनाकर रखा है!
प्रियंका वाड्रा ऐसे बोल रही थी जैसे वो देश के मालिक है और दुनिया मे सब लोग उनके आगे तुच्छ है!
उसका मकसद मुद्दे पर गम्भीर चर्चा के बजाय, इस विषय से जुड़े लोगों की मजाक बनाकर तालिया बजवाने और ठहाके लगवाने के अलावा कुछ नही लगा !  

प्रियंका गांधी ने लोकसभा में गौ माता का किया अपमान
दरअसल नीट (NEET) और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ियों को रोकने और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड रिफॉर्म टास्क फोर्स का गठन किया है। लोकसभा में इस कार्यबल पर तंज कसते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि इस नई समिति में तो पूर्व आईबी चीफ, एक आईटी कंपनी के मालिक, और एक गौ-मूत्र के विशेषज्ञ भी है। इन्हें शिक्षा के बारे में क्या पता जी। इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा के चेहरे पर कुटिल मुस्कान और लोकसभा में बैठे कांग्रेस सांसदों द्वारा मेज थप-थपाकर हंसना साबित करता हैं कि इन्हें सनातन संस्कृति और गौ-माता का अपमान करने में मजा आता है।

प्रियंका गांधी ने वैज्ञानिक वी.कामकोटि का उड़ाया मजाक
प्रियंका गांधी वाड्रा ने जिस गौ मूत्र विशेषज्ञ पर तंज कसा, उनका नाम प्रो.वी.कामकोटि हैं। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स में देश के चुनिंदा शिक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इसमें आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो.वी.कामकोटि का नाम भी शामिल है। प्रो. कामकोटि सिर्फ एक शिक्षाविद ही नहीं, बल्कि भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’के विकास का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक भी हैं।

विकसित किया भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’
प्रो. कामकोटि को सबसे ज्यादा पहचान भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर परियोजना से मिली। उन्होंने उस रिसर्च टीम का नेतृत्व किया जिसने भारत का पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकसित किया। इस परियोजना का उद्देश्य भारत को चिप डिजाइन और सेमीकंडक्टर तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना था। आज SHAKTI को देश की महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धियों में गिना जाता है। प्रो.वी.कामकोटि का कंप्यूटर साइंस, साइबर सुरक्षा और टेक्‍नोलॉजी इनोवेशन के क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। ऐसे में अब उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे NTA की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

पेपर लीक बिल पास तो हो जाएगा लेकिन क्या ट्रायल कोर्ट 3 महीने में फैसले कर सकेंगे

सुभाष चन्द्र 

पेपर लीक बिल यानी Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 संसद से बहुमत से पास हो जाएगा क्योंकि उसे पारित करने के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता है और वह भाजपा के NDA गठबंधन के पास दोनों सदनों में है। 

इस बिल में सजा और जुर्माने के प्रावधानों के अलावा यह भी प्रावधान किया गया कि सभी जांच प्रक्रिया 2 महीने यानी 60 दिन में पूरी की जाएगी इसके अलावा Fast Track Courts स्थापित कर चार्जशीट दायर होने के बाद रोज सुनवाई करके 3 महीने में ट्रायल पूरा कर दिया जाएगा जिसका मतलब है, 3 महीने में सजा का ऐलान कर दिया जाएगा 

क्या भारत की अदालतों में 3 महीने में सुनवाई पूरी होना संभव है? ट्रायल कोर्ट चार्जशीट दायर होने के बाद अभियुक्तों को कम से कम एक महीना का समय देकर “समन” जारी करता है जिसे अभियुक्त तुरंत सेशन कोर्ट या हाई कोर्ट में चुनौती देता है जहां जितनी मर्जी जल्दी हो, 3-4 महीने लग ही  जाते हैं मतलब सेशन और हाई कोर्ट में फिर भी बात न बने तो सुप्रीम कोर्ट जाता है जहां कोई समय सीमा नहीं रहती 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
मैं इस लेटलतीफी के बारे में 3 किस्से बता रहा हूँ जबकि ऐसे मामलों की भरमार है

अमित शाह को 2018 में “हत्यारा” कहने के लिए लिए राहुल गांधी पर सुल्तानपुर MP/MLA कोर्ट में 4 अगस्त, 2018 को केस दर्ज किया गया था जिस पर कोर्ट ने 5 साल बाद 27 नवंबर, 2023 को राहुल गांधी के खिलाफ “समन” जारी किए मुकदमा अभी भी लंबित है;

बीआरओ के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव की शिकायत पर (जिसमें उन्होंने राहुल गांधी पर सेना का अपमान करने का आरोप लगाया था) लखनऊ के MP/MLA कोर्ट ने 11 फरवरी, 2025 को राहुल गांधी को “समन” जारी किए राहुल गांधी “समन” रद्द कराने इलाहाबाद हाई कोर्ट चला गया लेकिन हाई कोर्ट ने उसकी अपील ख़ारिज कर दी राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट चला गया और सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त, 2025 को राहुल गांधी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगा दी अगली तारीख 5 महीने बाद 22 अप्रैल, 2026 तय की सुप्रीम कोर्ट के जज थे जस्टिस SR Sharma और जस्टिस MM Sundresh. सुंदरेश जी सबरीमाला मंदिर की पुनर्विचार याचिका की सुनवाई की बेंच में शामिल थे अब भगवान ही जाने सुप्रीम कोर्ट क्या कर रहा है इस केस का?

केजरीवाल के 2014 के आपत्तिजनक भाषण पर सुल्तानपुर कोर्ट ने 6 सितंबर, 2014 को “समन” जारी किए केजरीवाल ने कहा था “जो कांग्रेस को वोट देगा, वो देश के साथ गद्दारी करेगा और जो भाजपा को वोट देगा, उसे भगवान भी माफ़ नहीं करेगा” Section 125 of the Representaion of People Act, 1951 में FIR दर्ज हुई थी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने के लिए मना कर दिया एक अन्य केस में सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर, 2016 को केजरीवाल पर सड़क जाम कर ट्रैफिक में अवरोध करने के आरोप में “समन” पर रोक लगा दी लेकिन आगे कुछ नहीं किया जिसका मतलब है मामला ठंडे बस्ते में भेज दिया 6 सितंबर, 2014 के ‘समन” के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी, 2023 को को स्टे कर दिया और उसके खिलाफ चल रही Criminal Proceedings को भी अगले आदेश तक स्टे कर दिया उसके बाद क्या हुआ किसी को कुछ पता नहीं मतलब मामला 12 साल से चल रहा है 

सुप्रीम कोर्ट तो वैसे भी स्टे कोर्ट और बेल कोर्ट बन चुका है  

इसलिए मेरा मानना है कि पेपर लीक पर सही मंशा से कानून बनाया जा रहा है लेकिन उसके प्रभावी होने पर मुझे संदेह है

PM मोदी का Insta पोस्ट हटाने पर Meta ने दी सफाई, कहा- गलती से हट गया था: अब कर दिया है रीस्टोर, सरकार ने कंपनी के टॉप अधिकारियों को किया तलब

              मोदी का पोस्ट हटाने पर मेटा ने माँगी माफी (फोटो साभार: Insta/Meta/NarendraModi)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंस्टाग्राम पोस्ट (PM Modi Insta Reel) डिलीट हो जाने पर मेटा की सफाई आई है। मेटा ने कहा है कि पीएम मोदी का पोस्ट गलती से डिलीट हो गया था।

सोशल मीडिया कंपनी मेटा (Meta) ने सफाई में बताया कि यह सब एक तकनीकी खराबी (Technical Glitch) के कारण हुआ था। कंपनी ने अपनी गलती मानते हुए माफी माँगी है और पीएम मोदी के उस वीडियो को दोबारा रीस्टोर (Restore) यानी बहाल कर दिया है। इसके बावजूद भारत सरकार इस पूरे मामले को काफी गंभीरता से ले रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने मेटा और इंस्टाग्राम के दुनियाभर के बड़े अधिकारियों को पेश होने के लिए समन भेजा है। आईटी मंत्रालय कंपनी के इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है और वह उन तकनीकी वजहों की गहराई से जांच कर रहा है, जिनकी वजह से देश के प्रधानमंत्री का पोस्ट ब्लॉक हो गया था। सरकार का मानना है कि इतने बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मामला तूल पकड़ने के बाद मेटा के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति साफ की। मेटा ने कहा, “वह कंटेंट गलती से हट गया था और अब उसे पूरी तरह से बहाल कर दिया गया है। यह किसी कानूनी पाबंदी (Legal Restriction) की वजह से नहीं, बल्कि एक तकनीकी खराबी (Technical Glitch) की वजह से हुआ था। हमें इस असुविधा के लिए खेद है।” शुरुआत में जब लोगों ने वीडियो देखने की कोशिश की, तो स्क्रीन पर कानूनी कारणों से रोक का संदेश दिखाई दे रहा था, जिस पर भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति (Objection) जताई थी।

दरअसल, यह मामला 23 जुलाई को पोस्ट किए गए एक बेहद अहम वीडियो से जुड़ा हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जनरेशन-जेड (Gen-Z) यानी युवाओं के नाम अपना पहला संदेश जारी किया था। इस वीडियो में पीएम ने छात्रों को भरोसा दिलाया था कि सरकार देश में परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए बेहद कड़े कदम उठाने जा रही है। वीडियो के अचानक ब्लॉक होने से पहले इसे लाखों लोग देख चुके थे।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा था, “सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। पेपर लीक मामलों से निपटने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही दोषियों को कड़ी सजा देने और विशेष अदालतों के गठन के लिए एक सख्त नया कानून कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा, जिसे जल्द ही संसद में लाया जाएगा।”  

प्रधानमंत्री के महत्वपूर्ण संदेश वाले वीडियो पर इस तरह रोक दिखने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी। हालाँकि अब वीडियो वापस दिखने लगा है, लेकिन केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी गड़बड़ी दोहराई न जाए। इसी वजह से आईटी मंत्रालय ने मेटा के शीर्ष प्रबंधन को समन भेजकर जवाब-तलब करने की पूरी तैयारी कर ली है।

अब CJP की ‘टूलकिट’ वाली ग्रेटा थनबर्ग हुईं मुरीद: SFI UK के मंच से की तारीफ, बोलीं- ‘प्रदर्शन करने पर ही मिलती हैं बड़ी चीजें’

किसान आंदोलन की 'टूलकिट' से चर्चित ग्रेटा थनबर्ग ने SFI UK कार्यक्रम में CJP के नेतृत्व वाले प्रदर्शन के प्रति जताई एकजुटता (फोटो साभार: SFI UK)
लंदन में SFI यूके द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में ग्रेटा थनबर्ग ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले प्रदर्शन का समर्थन किया है। खुद को जलवायु कार्यकर्ता बताने वाली ग्रेटा थनबर्ग इससे पहले किसान आंदोलन की टूलकिट को लेकर भी चर्चा में रही थीं।

कार्यक्रम में बोलते हुए ग्रेटा थनबर्ग ने कहा कि भारत में छात्रों के प्रदर्शन ने पूरी दुनिया के लोगों को गर्व महसूस कराया है। उन्होंने आगे कहा कि इन प्रदर्शनों ने यह साबित कर दिया है कि जब आम लोग मिलकर विरोध करते हैं, तो बड़ी चीजें हासिल की जा सकती हैं।

उन्होंने कहा, “ये प्रदर्शन लोगों की ताकत का सही अर्थ बताते हैं। न्याय के लिए भारतीय छात्रों का संघर्ष और लोकतंत्र व आजादी के लिए व्यापक लड़ाई हमारी भी लड़ाई है।” इसके साथ ही उन्होंने समर्थकों से ‘भारत के साथ एकजुट होकर खड़े होने’ की अपील की।

सप्ताह के अंत में में आयोजित इस कार्यक्रम को SFI UK ने आंदोलन की ‘जीत का जश्न’ बताया। संगठन ने दावा किया कि इस आंदोलन के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। SFI UK ने यह भी आरोप लगाया कि NEET मामले को संभालने के दौरान 21 छात्रों की जान गई और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने ‘क्रूर दमन’ किया।

हालाँकि कार्यक्रम में उन घटनाओं का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिनमें छात्र प्रदर्शनकारियों के रूप में मौजूद उपद्रवियों पर पथराव करने, पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों के साथ धक्का-मुक्की और हमले करने के आरोप लगे थे।

इससे पहले SFI ने अपने एक बयान में कहा था कि ‘लड़ाई जारी रहेगी’, जिससे भविष्य में भी ऐसे प्रदर्शन होने के संकेत मिले थे।

यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ, जब CJP ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को अपना 36 दिन लंबा आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया था। संगठन ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उसकी बची हुई माँगें भी मान ली हैं। इनमें NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले बताए गए छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने जैसी माँगें शामिल थीं।

लंदन में आयोजित यह कार्यक्रम SFI UK की ओर से इस आंदोलन के समर्थन में किया गया पहला प्रयास नहीं था। इससे पहले Opindia ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि SFI UK की विभिन्न इकाइयों ने लंदन, लीड्स और एडिनबर्ग में पहले से तय कार्यक्रमों के जरिए समर्थकों को जुटाया था।

संगठन ने प्रदर्शन के स्थान और समय पहले ही तय किए, पोस्टर जारी किए और अपने नेटवर्क के माध्यम से इन कार्यक्रमों का समन्वय किया। हालाँकि कुछ मीडिया संस्थानों, जिनमें The Wire भी शामिल है, ने लंदन में हुए इस कार्यक्रम को भारतीय प्रवासी समुदाय की स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया के रूप में पेश करने की कोशिश की।

ग्रेटा थनबर्ग इससे पहले 2021 के किसान आंदोलन के दौरान भी भारत के राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनी थीं। उस समय उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ऑनलाइन ‘टूलकिट’ साझा की थी, जिसका उद्देश्य किसान आंदोलन के समर्थन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान को समन्वित करना बताया गया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उस टूलकिट के तैयार करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, हालाँकि उस FIR में ग्रेटा थनबर्ग का नाम शामिल नहीं था।

2873 संदिग्ध, 989 का आपराधिक रिकॉर्ड, 101 पर हत्या तो 284 पर डकैती-लूट के केस: CJP प्रदर्शन में शामिल चेहरों पर खुलासा, पुलिस ने हिंसा की जाँच की तेज

भारत के विरोधियों ने भारत की सांस्कृतिक पहचान नैतिकता और गरिमा को भीतर से खंडित किया है,भारत टूट रहा है,ऐसी बेहया और बदतमीज पीढ़ी का नेतृत्व करते हुए नेतृत्व का भी सिर शर्म से झुक गया है,कौन से माँ बाप को गर्व है ऐसी संतान पर ? आज भारत को शिक्षा से अधिक संस्कार और नैतिक मूल्यों को पुर्नजीवित करने की आवश्यकता है।
आहत है भारत माता की आत्मा !
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में 20 जुलाई 2026 को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर चले प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की जाँच में बड़े खुलासे सामने आए हैं।

पुलिस के हवाले से खबरों में बताया जा रहा है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, जिनमें से 989 लोगों पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, लूट, दुष्कर्म, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध, आर्म्स एक्ट, अपहरण, स्नैचिंग और NDPS जैसे गंभीर मामलों में केस दर्ज हैं।

पुलिस का कहना है कि इन लोगों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS), सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों और आम लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो तथा अन्य तकनीकी माध्यमों से की गई है। जाँच में यह भी सामने आया कि कई आरोपित 20 से 25 जुलाई के बीच बार-बार प्रदर्शन स्थल पर लौटे।

पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या इन्हीं लोगों ने जंतर-मंतर और नई दिल्ली के आसपास हुई हिंसा में सक्रिय भूमिका निभाई थी। पुलिस के मुताबिक, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी और जाँच की कार्रवाई जारी रहेगी, जबकि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की तैयारी है।

प्रदर्शन में मिले हत्या, डकैती, दुष्कर्म और पॉक्सो समेत कई गंभीर मामलों के आरोपित

दिल्ली पुलिस की जाँच के अनुसार, हिंसा में शामिल लोगों में 101 ऐसे आरोपित पाए गए जिन पर हत्या के मामले दर्ज हैं, जबकि 62 लोगों पर हत्या के प्रयास, 284 लोगों पर डकैती और लूट, 61 लोगों पर दुष्कर्म, 25 लोगों पर छेड़छाड़, 6 लोगों पर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं।
इसके अलावा 229 लोग आर्म्स एक्ट, 135 स्नैचिंग, 19 अपहरण और 67 लोग नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के मामलों में आरोपित पाए गए। पुलिस के अनुसार, इन आरोपितों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जो आदतन अपराधी हैं। हत्या के मामलों में शामिल 101 आरोपितों में से 42 पर दो या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
वहीं 12 लोगों का आपराधिक इतिहास 10 या उससे अधिक मामलों तक फैला हुआ है। हत्या के प्रयास के 62 आरोपितों में से 25 पर कई मामले दर्ज हैं। वहीं डकैती और लूट के 284 आरोपितों में से 155 पर दो या उससे अधिक केस हैं और 31 लोगों के खिलाफ 10 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दुष्कर्म के मामलों में शामिल 8 आरोपित, छेड़छाड़ के 6 आरोपित और NDPS के 9 आरोपित भी कई मामलों में पहले से आरोपित हैं।

FRS, CCTV और तकनीकी साक्ष्यों से हुई पहचान, पुलिस ने हिंसा में भूमिका की जाँच तेज की

दिल्ली पुलिस का कहना है कि संदिग्धों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों, सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो और आम नागरिकों के वीडियो के आधार पर की गई। जाँच में कई संदिग्ध उन स्थानों पर दिखाई दिए, जहाँ हिंसा हुई थी।
पुलिस के अनुसार, ये लोग पथराव करते, पुलिसकर्मियों पर हमला करते, सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाते और सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ करते नजर आए। जाँच से स्पष्ट हुआ कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों में केवल ऐसे व्यक्ति नहीं थे जिनका एक-दो मामलों से संबंध रहा हो, बल्कि बड़ी संख्या में आदतन और बार-बार अपराध करने वाले लोग भी मौजूद थे।

जंतर-मंतर तक ही थी अनुमति, संसद मार्च पर नहीं: चेतावनी के बाद हुआ बल प्रयोग

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को केवल जंतर-मंतर पर धरना देने की अनुमति दी थी, जबकि संसद तक मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ते हुए संसद के बेहद करीब तक पहुँच गए, जिससे संसद की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव की स्थिति पैदा हो गई।
अवलोकन करें:-
 पुलिस वाले भी इंसान हैं, मार खाने के लिए नहीं हैं; पुलिस वालों का भी परिवार होता है जस्टिस साहब; व
nigamrajendra.blogspot.com
पुलिस वाले भी इंसान हैं, मार खाने के लिए नहीं हैं; पुलिस वालों का भी परिवार होता है जस्टिस साहब; व
सुभाष चन्द्र जुलाई 27 को सुप्रीम कोर्ट में जंतर मंतर पर पुलिस की कथित Exesses पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ....
दिल्ली पुलिस का कहना है कि बल प्रयोग बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद ही किया गया, क्योंकि प्रदर्शनकारी लगातार एक के बाद एक बैरिकेड तोड़ते रहे। पुलिस के मुताबिक, हिंसा के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों सहित अनेक पुलिसकर्मी घायल हुए, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने काफी देर तक संयम बरता।
घटना के बाद पूरे घटनाक्रम की समीक्षा शुरू की गई, जिसमें उन असामाजिक तत्वों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है, जो पुलिस के अनुसार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बीच घुसकर हिंसा में शामिल हुए।

पुलिस वाले भी इंसान हैं, मार खाने के लिए नहीं हैं; पुलिस वालों का भी परिवार होता है जस्टिस साहब; वीडियो

सुभाष चन्द्र

जुलाई 27 को सुप्रीम कोर्ट में जंतर मंतर पर पुलिस की कथित Exesses पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा -

Right to protest, peaceful protest, lawful protest, is absolutely guaranteed under the constitutional scheme. So long as there is a peaceful agitation, merely because there is an agitation, there can’t be excesses,” CJI Surya Kant said.

There should be a protocol in place. If they want to agitate on an issue… They should be provided with proper space… There should be no restriction or impediment in that. But if there is someone else, some anti-social element, or somebody has done anything wrong, that of course can be taken care of.”

लेखक 
चर्चित YouTuber 
नेताओं से लेकर उग्र उपद्रवियों को अदालतें विशेषकर सुप्रीम कोर्ट से संरक्षण मिलता है। इन तिलचट्टों ने किस तरह का उपद्रव मचाया हुआ सुप्रीम कोर्ट ने आंखें बंद कर रखी थी? क्या सुप्रीम कोर्ट भारत में नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका वाले हालत पैदा करना चाहती थी? अगर पुलिस कार्यवाही नहीं करती और दुर्भाग्य से वैसे ही हालत बन गए होते ये ही सुप्रीम पुलिस और केंद्र सरकार को ही जिम्मेदार ठहराने में पीछे नहीं होती। उपद्रव को देख जस्टिस सूर्यकांत को पुलिस की नरमी पर सख्त होकर कहना चाहिए कि इन उपद्रवी तिलचट्टों पर blind firing क्यों नहीं की? जस्टिस साहब अगर ये उपद्रवी संसद में घुस गए होते तो . .. जब धरना NEET को लेकर था, फिर धरने में मोदी को अभद्र गालियां, दिल्ली दंगों के आरोपियों की रिहा के नारे और सनातन को गालियां आदि क्यों?         

किसानों का आंदोलन भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर चला लेकिन कितनी शांति रही ये दुनिया ने देखा। 26 जनवरी, 2021 को कथित किसानों ने हजारो ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली मार्च निकाला। पहले का रिकॉर्ड देख कर पुलिस ने चीफ जस्टिस शरद बोबडे से अपील की थी कि इस प्रदर्शन पर रोक लगा दो क्योंकि भारी हिंसा हो सकती है। लेकिन शरद बोबडे ने टका  सा जवाब दिया था कि law and order संभालना आपका काम है। और भीषण दंगा हुआ। लाल किले पर तिरंगे का अपमान हुआ जिसके लिए केवल और केवल बोबडे साहेब जिम्मेदार थे

आप कथित छात्रों पर पुलिस ज्याददातियों पर ध्यान देने से पहले एक बात समझने की जरूरत को समझें कि पुलिस हुड़दंगियों से पिटने के लिए नहीं है, पुलिस वाले भी इंसान हैं उनके भी परिवार है और छात्रों के agitation के नाम पर उन पुलिस वालो पर हमला किया जाए, पथराव किया जाए और उनकी linching के कोशिश की जाए तो क्या इलाज है?

आप कैसे मान सकते हैं कि छात्रों के नाम पर प्रोटेस्ट में अपराधी शामिल नहीं हो सकते? आप कहते है कि if there is someone else, some anti-social element, or somebody has done anything wrong, that of course can be taken care of.”

मगर यह भी बताइए ऐसे लोगों को कैसे Taken care of किया जाएगा पुलिस  लाठीचार्ज करेगी तो आपको शिकायत पहुंच रही है कि छात्रों पर ज्यादती की गई। ऐसे लोगों पर लाठीचार्ज छात्रों के नाम पर लगा दिया जाएगा जो किया जा रहा है।

 

कल सुनवाई करते हुए यह भी Demarcation होना चाहिए कि क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन होता है और क्या हिंसक होता है? इन कथित छात्रों के रूप में चांडालों ने देश को बांग्लादेश और नेपाल बनाने की धमकियां दी

140 करोड़ जनता के प्रतिनिधि प्रधानमंत्री को भद्दी से भद्दी गालियां दी। मोदी साला भड़वा, मोदी साला चोर है, मोदी को माँ की गाली दी। किसी ने मोदी की तेरहवीं की ख़ुशी में berger पार्टी कर दी। भद्दे भद्दे पोस्टर लहराए गए, मीम बनाए गए और न जाने क्या क्या उलजुलूल अर्धनग्न लड़कियों ने मोदी जी के लिए कहा। संसद भवन को उखाड़ फेकने की धमकी दी और धमकी देने वाले के साथ अभिजीत दिपके बैठा मस्ती कर रहा था।

 

ये सब कुछ अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और ऐसी बातो के चलते “प्रदर्शन” को शांतिपूर्ण नहीं कहा जा सकता। ऐसी बाते प्रदर्शन को अलग तरीके से हिंसक रूप देती हैं

आपके सुप्रीम कोर्ट में कोई जूता फेंकने की कोशिश करता है या फाइल फेंकता है तो वह बर्दाश्त नहीं किया जाता। फिर देश और प्रधानमंत्री के लिए गाली गलौज कैसे बर्दाश्त की जा सकती है? 

मुझे बस इतना कहना है कि पुलिस वालों को भी इंसान समझें और कथित छात्रों के लिए भावनाओं में मत बह जाइए। उनमें neet से प्रभावित छात्र तो थे ही नहीं और जो भी छात्र वहां थे उन्हें न neet का और न CBSE का फुल फॉर्म पता था। शिक्षा मंत्री तक का नाम पता नहीं। 

हिंसा करना और अपने लोगों को हिंसा के लिए उकसाना एक बात है 

इरोम शर्मीला ने 2000 से 2016 तक अनशन किया था लेकिन उसके अनशन में कोई हिंसा नहीं हुई लेकिन आपने कभी उसकी चिंता नहीं की जैसे सोनम वांगचुक के लिए की

E20 मामले में Fake Video के खिलाफ मेटा-गूगल और X पर नितिन गडकरी करेंगे केस, बॉम्बे HC ने दी मंजूरी: फर्जी दावों के साथ वीडियो बनाना पड़ेगा भारी

ई20 पेट्रोल विवाद में मेटा-गूगल और एक्स पर मानहानि मुकदमा करने की मंजूरी, प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: AI ChatGPT)
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उन्हें इंटरनेट पर उनके खिलाफ चलाए जा रहे फर्जी और मानहानिकारक (Defamatory) कंटेंट के खिलाफ दीवानी मुकदमा (Civil Suit) दर्ज करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अब मेटा (Meta), गूगल (Google), यूट्यूब और एक्स (X) जैसी बड़ी कंपनियों को कोर्ट में जवाब देना होगा।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा विवाद केंद्र सरकार की ई-20 (E20 Fuel) यानी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति से जुड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर कुछ समय से ऐसे वीडियो, ऑडियो और पोस्ट लगातार फैलाए जा रहे हैं, जिनमें झूठा दावा किया गया है कि गडकरी और उनके परिवार ने इस नीति से निजी और आर्थिक मुनाफा कमाया है। इन वीडियो में एआई (AI) तकनीक का इस्तेमाल करके उनकी नकली आवाज और चेहरा (Deepfake) बनाकर भ्रामक बातें फैलाई जा रही थीं।

गडकरी की ओर से पेश हुए वकील संदीप एस लड्डा ने कोर्ट को बताया कि यह फर्जी सामग्री मुंबई के साथ-साथ पूरे देश में देखी जा रही है। याचिका में स्पष्ट किया गया कि एथेनॉल नीति का संचालन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है, न कि सड़क परिवहन मंत्रालय। इसलिए गडकरी पर लगे निजी फायदे के आरोप पूरी तरह से झूठे, निराधार और उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए बनाए गए हैं।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अभय आहूजा की पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों को स्वीकार करते हुए मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी दी। चूँकि सामग्री इंटरनेट पर हर जगह मौजूद है, इसलिए हाईकोर्ट का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) तय करने के लिए यह इजाजत जरूरी थी। अब गडकरी इस याचिका के जरिए कंपनियों को इन वीडियो को हटाने और भविष्य में ऐसा कंटेंट रोकने के लिए आदेश (Injunction) की माँग करेंगे।

याचिका में गडकरी ने साफ किया है कि इसका मकसद सरकार की नीतियों पर होने वाली निष्पक्ष आलोचना को रोकना बिल्कुल नहीं है। सही तथ्यों पर आधारित आलोचना का स्वागत है, लेकिन एआई का गलत इस्तेमाल करके बनाई गई फर्जी तस्वीरें, बनावटी आवाज और अभद्र भाषा को अभिव्यक्ति की आजादी नहीं कहा जा सकता। यह किसी व्यक्ति के सम्मान और व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) का हनन है।

इस मामले में केंद्र सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और अनजान वीडियो बनाने वालों को भी पक्षकार बनाया गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के इस कदम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी खबरें और डीपफेक कंटेंट फैलाने वालों पर नकेल कसेगी और सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय हो सकेगी।

बीजेपी शासित राज्यों में ही उपद्रव क्यों? गैर-बीजेपी राज्यों में लीक हुए पेपर पर धरने/प्रदर्शन क्यों नहीं? आंदोलन के नाम पर हिंसा करने वाले उपद्रवियों पर बिहार पुलिस ने कसा शिकंजा ; 350+ गिरफ्तार, 200+ हिरासत में, 1500+ रडार पर…:

           लखीसराय में पथराव करने वाले 19 संदिग्धों की तस्वीरें जारी (फोटो साभार: एक्स @LakhisaraiP)
कॉकरोच और इनको समर्थन देने वाली पार्टियां पेपर लीक मुद्दे पर सिर्फ बीजेपी शासित राज्यों में उपद्रव किये जा रहे हैं? जिन गैर-बीजेपी शासित राज्यों में पेपर हुए हैं वहां के शिक्षा मंत्रियों का इस्तीफा क्यों नहीं माँगा जाता? जो साबित करता है कि उपद्रव प्रायोजित है। कहाँ से कौन इसकी फंडिंग कर रहा है, गृह मंत्रालय, रॉ और गुप्तचर एजेंसियों को जाँच कर उन लोगों पर कार्यवाही करनी चाहिए। अगर मुद्दा NEET पेपर लीक का है तो खालिद उमर के नारे क्यों? सनातन विरोधी नारे क्यों? मंशा साफ है भारत विरोधियों की भीख पर नाचने वाले देश में उपद्रव कर देश को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। CAA विरोध से लेकर अब NEET पेपर लीक तक जितने भी उपद्रव हुए हैं सभी लगभग एक ही नारों का इस्तेमाल हो रहा है।       

दिल्ली के बाद NEET पेपर लीक को लेकर बिहार में भी छात्रों का आंदोलन देखा गया था। विपक्षी दलों के छात्र संगठनों ने प्रतिरोध मार्च के दौरान हिंसा फैलाई थी। अब इस मामले को लेकर बिहार पुलिस ने जाँच तेज कर दी है।

बिहार पुलिस CCTV कैमरों के जरिए दंगाइयों और उपद्रवियों की पहचान कर ली है। पुलिस के अनुसार पटना समेत पाँच जिलों में अभियान चलाकर 350 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और सबसे ज्यादा गिरफ्तारी पटना में हुई।

 पटना से 258 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं सारण जिले में पुलिस ने 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। इनमें से 30 आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

वहीं सासाराम में हिंसा में शामिल 35 लोगों की पहचान की गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस की रडार पर कुल 1500 से ज्यादा उपद्रवी हैं।

ड्रोन, सीसीटीवी और सोशल मीडिया फुटेज से हो रही पहचान

पुलिस के अनुसार, 25 जुलाई 2026 को आयोजित प्रतिरोध मार्च के दौरान समाहरणालय गेट और आसपास के इलाके में हुई पूरी घटना की रिकॉर्डिंग ड्रोन कैमरों, CCTV और अन्य Video माध्यमों से की गई थी। इन सभी डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद 19 संदिग्धों की तस्वीरें पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी की गई हैं।

अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि वे इनमें से किसी भी व्यक्ति को पहचानते हैं तो पुलिस को तत्काल सूचना दें। इसके लिए विशेष हेल्पलाइन और संबंधित अधिकारियों के मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर हिंसा में शामिल हर व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

13 नामजद, 100 अज्ञात पर प्राथमिकी, एक आरोपी गिरफ्तार

घटना के संबंध में कबैया थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। FIR में युवा राजद के जिलाध्यक्ष विनय कुमार साव, छात्र नेता रौशन कुमार सिन्हा सहित 13 लोगों को नामजद आरोपित बनाया गया है, जबकि 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

जाँच के दौरान वीडियो फुटेज के आधार पर अमहरा थाना क्षेत्र के विक्कम निवासी अनुज कुमार के पुत्र पीयूष कुमार की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपित को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। थाना अध्यक्ष रणधीर कुमार ने बताया कि अन्य संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार कार्रवाई जारी है।

नीट पेपर लीक के विरोध में निकला मार्च, पथराव में महिला सिपाही घायल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नीट परीक्षा पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और अन्य माँगों को लेकर विपक्षी दलों के छात्र संगठनों ने राज्यव्यापी आंदोलन के तहत लखीसराय में प्रतिरोध मार्च निकाला था। जब प्रशासन ने समाहरणालय गेट पर मार्च को आगे बढ़ने से रोका तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

पुलिस का कहना है कि भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया और पुलिस बल पर ईंट, पत्थर, डंडे, बोतलें तथा अन्य वस्तुएँ फेंकी। इस दौरान आसपास खड़े निजी वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई और सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाने का प्रयास किया गया।

हिंसा में महिला सिपाही वर्षा कुमारी गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनके सिर में पत्थर लगने से गहरी चोट आई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आंदोलन की आड़ में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बेल्जियम में NATO के मिलिट्री हेडक्वार्टर से चीनी मूल की कनाडाई नागरिक महिला इंटर्न जासूसी के आरोप में गिरफ्तार: रिपोर्ट


बेल्जियम में नाटो (NATO) के सैन्य मुख्यालय में काम कर रही एक कनाडाई महिला को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह महिला वहाँ इंटर्न के तौर पर काम कर रही थी और उस पर किसी ‘तीसरे देश’ के लिए जासूसी करने और एक आपराधिक संगठन का सदस्य होने का शक है।

बेल्जियम के संघीय अभियोजक कार्यालय ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को जारी अपने बयान में बताया कि आरोपित महिला चीनी मूल की कनाडाई नागरिक है। हालाँकि अभियोजकों ने न तो उसकी पहचान उजागर की और न ही यह बताया कि वह किस देश या संगठन के लिए जासूसी कर रही थी।

यह महिला नाटो के सुप्रीम हेडक्वार्टर्स अलाइड पावर्स यूरोप (SHAPE) में इंटर्न के रूप में तैनात थी, जो बेल्जियम के मोंस शहर में स्थित है। SHAPE दरअसल नाटो का सबसे बड़ा सैन्य मुख्यालय है और यह एलाइड कमांड ऑपरेशंस का आधार है, जो 32 देशों के इस सैन्य गठबंधन के सभी अभियानों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने का काम देखता है।

जाँच की शुरुआत तब हुई जब SHAPE की सुरक्षा टीम को इस महिला की गतिविधियों पर शक हुआ। सुरक्षा टीम ने अपना शक बेल्जियम की सैन्य खुफिया एजेंसी तक पहुँचाया, जिसके बाद यह मामला संघीय अभियोजक कार्यालय को सौंपा गया और वहाँ जाँच शुरू हुई। गुरुवार को अधिकारियों ने महिला के घर और नाटो मुख्यालय स्थित उसके कार्यस्थल की तलाशी ली। इस तलाशी में कंप्यूटर अपराध से जुड़ी विशेष टीम और फोरेंसिक विशेषज्ञों की भी मदद ली गई। इसके अगले दिन, यानी शुक्रवार(जुलाई 24) को महिला को गिरफ्तार कर लिया गया।

कनाडा सरकार के लोक सुरक्षा विभाग (Public Safety Canada) ने पुष्टि की है कि उसे नाटो में कार्यरत एक कनाडाई नागरिक की गिरफ्तारी की जानकारी है। विभाग ने कहा कि चूंकि मामला अभी जाँच के दायरे में है, इसलिए वह इस पर विस्तार से कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। साथ ही विभाग ने कनाडाई नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सरकार की कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियाँ अपने साझेदार देशों की एजेंसियों के साथ मजबूत संबंध बनाए हुए हैं, जो ऐसे खतरों से निपटने में मदद करती हैं।

न्यूज एजेंसी AP से बात करते हुए SHAPE के एक प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि इस घटना का नाटो या SHAPE के परिचालन कार्यों, कमांड और कंट्रोल व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है और मुख्यालय अपनी सामान्य जिम्मेदारियाँ पहले की तरह निभा रहा है।

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिमी देश लगातार चीन और अन्य विदेशी ताकतों की ओर से जासूसी की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंता जता रहे हैं। इससे पहले भी नाटो और उससे जुड़ी एजेंसियों के अधिकारियों पर जासूसी के आरोप लग चुके हैं, जिससे गठबंधन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। फिलहाल जाँच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

NEET-UG पेपर लीक और कोचिंग माफिया, CBI ने सॉल्वर गैंग से जुड़े 45 के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

                      नीट पेपर लीक और प्रशासनिक सुधारों का विश्लेषण। (फोटो साभार - AI)
साल 2024 का NEET-UG पेपर लीक किसी एक व्यक्ति द्वारा प्रश्नपत्र से भरा ट्रंक खोल देने से शुरू नहीं हुआ था। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, यह एक ऐसे संगठित नेटवर्क का नतीजा था, जिसने एडमिशन कंसल्टेंट्स, करियर काउंसलिंग ऑपरेटरों, परीक्षा केंद्र के अधिकारियों, अभ्यर्थियों तक पहुँच बनाने वाले एजेंटों, सॉल्वर के रूप में नियुक्त MBBS छात्रों, गेस्ट हाउस संचालकों, ड्राइवरों, प्रिंटरों और वित्तीय बिचौलियों को एक-दूसरे से जोड़ रखा था।

दो साल बाद तरीका भले ही बदल गया, लेकिन जाँच एजेंसी के अनुसार इस पूरे कारोबारी तंत्र का अस्तित्व बना रहा। NEET-UG 2026 मामले में CBI ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा विषय विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त लोगों ने गोपनीय प्रश्नों को निजी कोचिंग क्लासों और कोचिंग से जुड़े बिचौलियों के माध्यम से आगे पहुँचाया।

केमिस्ट्री के व्याख्याता पीवी कुलकर्णी को इस पूरे मामले में एक प्रमुख स्रोत बताया गया। जाँच के अनुसार, उनके घर पर आयोजित विशेष कक्षाओं के दौरान बताए गए प्रश्न 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाते थे।

ये दोनों मामले दिखाते हैं कि पेपर लीक को केवल सीलबंद प्रश्नपत्रों की आवाजाही में हुई चूक के रूप में नहीं देखा जा सकता। कोचिंग माफिया एक संगठित बाजार की तरह काम करता है।

यह ऐसे परिवारों की तलाश करता है जो पैसे देने को तैयार हों, गोपनीय जानकारी तक पहुँच रखने वाले अंदरूनी लोगों को खोजता है, प्रश्न हल करने या पढ़ाने में सक्षम लोगों की भर्ती करता है, उम्मीदवारों के रहने और आने-जाने की व्यवस्था करता है, पैसे और जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करता है और परीक्षा शुरू होने से पहले ही उन्हें अनुचित लाभ पहुँचाने का काम करता है।

यहाँ कोचिंग माफिया शब्द का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि देश के सभी कोचिंग संस्थान, शिक्षक या करियर काउंसलर परीक्षा से जुड़े अपराधों में शामिल हैं।

इस शब्द का उपयोग केवल उन संगठनों और व्यक्तियों के लिए किया गया है, जिन्होंने CBI के बयानों और अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार शिक्षा, काउंसलिंग या एडमिशन से जुड़े अपने नेटवर्क का इस्तेमाल अभ्यर्थियों की भर्ती करने और नकल या परीक्षा में धांधली कराने के लिए किया। ऑपइंडिया देशभर के पूरे कोचिंग नेटवर्क पर किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप नहीं लगा रहा है।

पटना-हजारीबाग से जुड़े मुख्य मामले की शुरुआत शास्त्री नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से हुई थी। इसके बाद 23 जून 2024 को यह मामला केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया, जहाँ एजेंसी ने एक नई FIR दर्ज की।

जाँच के दौरान CBI ने कुल 45 लोगों के खिलाफ कई चार्जशीट दाखिल कीं। इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए ऑपइंडिया ने मुख्य रूप से अदालत के आदेशों और FIR पर भरोसा किया है। इन सभी दस्तावेजों को लेख के अंत में उपलब्ध कराई गई एक ZIP फाइल में एक साथ जोड़ा गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह नेटवर्क 2024 की परीक्षा से पहले से था मौजूद

2024 के नीट पेपर लीक के घटनाक्रम उन दो लोगों द्वारा बनाई गई योजना से शुरू हुई जो 2015-16 से एक-दूसरे को जानते थे। CBI के अनुसार, मुख्य आरोपितों में से एक, अमित कुमार सिंह, राज कुमार सिंह उर्फ राजू सिंह को 2015-16 से जानता था।

दोनों कंसल्टेंसी या एजेंसी सेवाओं में काम करते थे जो प्रोफेशनल कोर्सेज में दाखिला दिलाने का काम करती थीं। पंकज कुमार उर्फ आदित्य उर्फ साहिल भी इसी क्षेत्र में काम करता था और 2021-22 के दौरान अमित के संपर्क में आया था।

जाँच एजेंसी ने अमित और रंजीत कुमार बेउरा उर्फ पिंटू के बीच एक पुराने जुड़ाव का भी जिक्र किया। बेउरा की जमानत कार्यवाही के दौरान, अभियोजन पक्ष ने कहा कि वे दोनों 2019 से एक-दूसरे को जानते थे और उसी साल ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी परीक्षा में गड़बड़ी के एक मामले में गिरफ्तार हुए थे।

हालाँकि यह पुराना मामला नीट पेपर लीक से जुड़ा नहीं था, लेकिन यह इसलिए प्रासंगिक था क्योंकि CBI ने 2024 के इस ऑपरेशन को दाखिले और प्रतियोगी परीक्षाओं के इर्द-गिर्द पहले से बने संबंधों के विस्तार के रूप में पेश किया।

‘करियर एकेडमी एजुकेशन ट्रस्ट’ उम्मीदवारों की भर्ती करने वाले मुख्य चैनलों में से एक बन गया। यह 3 अगस्त 2023 को ओडिशा में रजिस्टर्ड हुआ था। बेउरा ने अदालत को बताया कि यह गरीब छात्रों को शैक्षिक सुविधाएँ और परामर्श प्रदान करने के लिए बनाया गया एक NGO था।

वहीं CBI का कहना था कि इसका इस्तेमाल नीट उम्मीदवारों की पहचान करने, उनके परिवारों से कमिटमेंट लेने और गारंटी के तौर पर असली शैक्षणिक सर्टिफिकेट और चेक इकट्ठा करने के लिए किया जाता था।

बेउरा को इस संगठन का मैनेजिंग डायरेक्टर बताया गया था। अमित प्रसाद महाराणा और धीरेन कुमार पांडा की पहचान इसके पदाधिकारियों के रूप में की गई थी। एजेंसी ने कहा कि अमित कुमार सिंह ने ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश से उम्मीदवारों का इंतजाम करने के लिए उनके और संजय कुमार के साथ मिलकर काम किया।

सत्रह उम्मीदवारों को हजारीबाग भेजा गया और उन्हें ‘राज गेस्ट हाउस’ या ‘सिंदूर’ स्थित एक घर में ठहराया गया। बाकी उम्मीदवार भुवनेश्वर या पटना में ही रहे। CBI ने उम्मीदवारों, कर्मचारियों और ड्राइवरों के बयानों का हवाला दिया।

एक उम्मीदवार ने करियर एकेडमी को अपने शैक्षणिक सर्टिफिकेट सौंपे थे। एक अन्य ने कहा कि महाराणा ने हल किया हुआ नीट पेपर शेयर किया था। भुवनेश्वर की एक उम्मीदवार ने बताया कि उसे एक होटल में प्रिंटेड कॉपी मिली थी और उसने पांडा की पहचान की थी।

एजेंसी ने कहा कि महाराणा ने स्कोर्पियो से उम्मीदवारों को लाने-ले जाने का काम किया, ‘होटल ट्रीफो पैलेस’ में एक प्रिंटर की व्यवस्था की और हल किए गए पेपर बांटे। CBI ने उसके खाते में 2 लाख रुपए और ‘चिरंजीवी मल्टीवेंचर प्राइवेट लिमिटेड’ (जिसमें वह डायरेक्टर था) द्वारा प्राप्त 12 लाख रुपए का हवाला दिया।

पांडा को करियर एकेडमी का ट्रेजरर बताया गया था और वह भी ट्रांसपोर्ट, होटल ट्रीफो पैलेस में पेपर बांटने और 12 लाख रुपए के भुगतान से जुड़ा हुआ था। CBI ने कहा कि गारंटी के तौर पर असली सर्टिफिकेट और चेक लिए गए थे। इससे आयोजकों को उम्मीदवारों और उनके परिवारों पर काफी दबाव बनाने का मौका मिल गया होगा।

अगली कड़ी परीक्षा प्रणाली के भीतर थी। जमालुद्दीन उर्फ जमाल हजारीबाग का एक पत्रकार था जो ‘प्रभात खबर’ से जुड़ा हुआ था और ओएसिस स्कूल द्वारा आयोजित कार्यक्रमों को नियमित रूप से कवर करता था।

ओएसिस स्कूल वही परीक्षा केंद्र था जहाँ से प्रश्नपत्र चोरी हुआ था। CBI ने कहा कि इस वजह से वह प्रिंसिपल डॉ अहसानुल हक और वाइस-प्रिंसिपल मो इम्तियाज आलम के करीब आ गया।

एजेंसी ने 3 जून 2023 से 18 जून 2024 तक हक और जमालुद्दीन के बीच 814 कॉल्स का हवाला दिया। हालाँकि केवल कॉल की संख्या ही साजिश साबित करने के लिए काफी नहीं थी, लेकिन CBI ने इसका इस्तेमाल उनके निरंतर जुड़ाव को स्थापित करने के लिए किया।

एजेंसी के अनुसार, जमालुद्दीन ने अमित कुमार सिंह की मुलाकात हक और इम्तियाज से कराई थी। अमित ने बाद में पंकज कुमार को उनसे मिलवाया। CBI ने अमित, हक, इम्तियाज, जमालुद्दीन, पंकज, राजू सिंह और अमन कुमार सिंह की बैठकों का भी जिक्र किया।

अभियोजन पक्ष की व्यापक थ्योरी साफ थी, जमालुद्दीन ने बाहर के दाखिला नेटवर्क को उस सुरक्षित केंद्र को नियंत्रित करने वाले अधिकारियों से जोड़ा, जबकि अमित ने पंकज को उस दायरे में शामिल किया।

पेपर चोरी होने से पहले सॉल्वर और कैंडिडेट हुए इकट्ठा

एक कोरे प्रश्नपत्र का तब तक कोई खास व्यावसायिक मूल्य  नहीं था जब तक कि उसे जल्दी से हल करके पैसे देने वाले उम्मीदवारों तक न पहुँचाया जाए। CBI ने कहा कि कम से कम तीन सॉल्वर ग्रुप्स  को हजारीबाग लाया गया था। इसके कई सदस्य MBBS छात्र थे।

संजय कुमार को उस व्यक्ति के रूप में बताया गया जिसने सॉल्वर, लाभार्थियों, परिवहन और लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था की थी। अभियोजन पक्ष ने कहा कि उसने AIIMS पटना के छात्र चंदन सिंह से पढ़ाई में अच्छे मेडिकल छात्रों को भर्ती करने के लिए कहा था।

पटना ग्रुप में चंदन सिंह, कुमार शानू, राहुल आनंद, करण जैन, सुरभि कुमारी, रौनक राज और अमित कुमार शामिल थे। अमित अपने कॉलेज के साथी सनोज कुमार यादव को लाया था, हालाँकि CBI ने कहा कि सनोज पेपर हल करने के लिए ‘राज गेस्ट हाउस’ के अंदर नहीं गया था।

इन छात्रों से पहले ‘इम्पर्सनेशन’ (दूसरों के स्थान पर परीक्षा देने यानी डमी कैंडिडेट बनने) के लिए संपर्क किया गया था। CBI ने कहा कि संजय चंदन, कुमार शानू, राहुल आनंद और करण जैन को एम्स पटना के पास एक फोटो स्टूडियो में ले गया।

नीट आवेदनों के लिए उनकी तस्वीरें ली गईं। रौनक राज और अमित कुमार ने व्हाट्सएप के जरिए तस्वीरें और सिग्नेचर भेजे। डमी-कैंडिडेट की योजना को बाद में छोड़ दिया गया, लेकिन इन्हीं नए लोगों को सॉल्वर के रूप में फिर से काम सौंप दिया गया।

राजस्थान ग्रुप का संबंध अमित कुमार सिंह से था। CBI ने कहा कि उसने फरवरी 2024 में भरतपुर की यात्रा की और कुमार मंगलम विश्नोई, दीपेंद्र शर्मा और अन्य मेडिकल छात्रों से मुलाकात की।

श्री जगन्नाथ पहाड़िया सरकारी मेडिकल कॉलेज के MBBS छात्र कुमार मंगलम ने एक ग्रुप का इंतजाम किया, जिसमें दीपेंद्र शर्मा, संदीप कुमार, सुरेश कुमार और इशिता शामिल थे। इनसे भी शुरुआत में संभावित डमी उम्मीदवारों के रूप में संपर्क किया गया था। कुमार मंगलम ने बाद में ट्रेन टिकटों की व्यवस्था की और ग्रुप के सदस्यों को हजारीबाग लेकर आया।

यह ऑपरेशन परीक्षा से एक सप्ताह से भी अधिक समय पहले लोगों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने लगा था। 26 अप्रैल की रात को संजय कुमार, चंदन सिंह, कुमार शानू और राहुल आनंद गंगा दामोदर एक्सप्रेस से पटना से रवाना हुए और कोडरमा पहुँचे।

सुरभि कुमारी रांची से अलग आई थी। यह ग्रुप पहले ‘रैमसन होटल’ और फिर ‘होटल तारा टॉवर’ में रुका। बुकिंग संजय और कुमार अभिषेक द्वारा की गई थी।

अमित कुमार 2 मई को चेन्नई से रांची गया और अगले दिन कोडरमा पहुँचा। रौनक राज मुंबई से आया था। करण जैन ने कुमार अभिषेक द्वारा बुक किए गए टिकट पर पटना से यात्रा की। 3 मई को पटना ग्रुप हजारीबाग के ‘होटल श्री विनायक’ में शिफ्ट हो गया।

उनका इतनी जल्दी आना CBI के इस दावे का समर्थन करता है कि उन्हें गोपनीय सामग्री की उम्मीद में पहले से ही वहाँ तैनात किया गया था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि तैयारियाँ ओएसिस स्कूल के भीतर भी चल रही थीं।

इम्तियाज आलम की जमानत कार्यवाही में इसके जवाबी हलफनामे में कहा गया कि 3 मई को कंट्रोल रूम में एक टूलकिट बैग रखा गया था। बाद में इन टूल्स का इस्तेमाल NTA ट्रंक के पीछे के कब्जों से छेड़छाड़ करने, उसकी पैकेजिंग खोलने और पेपर की फोटो खींचने के बाद उसे वापस वैसे ही ठीक करने के लिए किया गया था।

इम्तियाज आलम के जमानत आदेश में शामिल CBI के जवाबी हलफनामे के अनुसार, आलम ने 3 मई को कंट्रोल रूम में टूलकिट बैग रखा था। एजेंसी ने कहा कि पंकज ने बाद में ट्रंक को खोलने और उसे वापस ठीक करने के लिए उन टूल्स का इस्तेमाल किया।

उम्मीदवारों का 3 और 4 मई को हजारीबाग में जुटना शुरू हो गया था। बेउरा करियर एकेडमी के कर्मचारी देबाशीष पाणिग्रही और ड्राइवर रंजन सेठी उर्फ मानस के साथ एक एमजी हेक्टर गाड़ी से पहुँचा था।

इस गाड़ी का इस्तेमाल उम्मीदवारों को लाने-ले जाने के लिए किया गया था। बेउरा ‘एके इंटरनेशनल होटल’ में रुका। ओडिशा के उम्मीदवारों को राज गेस्ट हाउस और सिंदूर भेजा गया।

राजू सिंह राज गेस्ट हाउस का प्रबंधन करता था। CBI ने कहा कि इस परिसर को जानबूझकर खाली और उपलब्ध रखा गया था। खाने-पीने की व्यवस्था की गई थी और उम्मीदवारों व सॉल्वरों को लाने-ले जाने के लिए गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया था।

राजू ने अपना पक्ष रखा कि उसने केवल कमरे किराए पर दिए थे और उसे इसके पीछे का मकसद नहीं पता था। पटना हाई कोर्ट ने शुरुआत में अभियोजन पक्ष के इस मामले का हवाला देते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था कि उम्मीदवारों को तैयार करने के लिए जानबूझकर गेस्ट हाउस उपलब्ध कराया गया था।

पटना में सिकंदर यादवेन्दु ने अखिलेश कुमार, अवधेश कुमार, शिवनंदन कुमार और उम्मीदवार अनुराग यादव के साथ तालमेल बिठाया। CBI ने कहा कि उनसे 4 मई को रात करीब 10:30 बजे सेंट करेन्स हाई स्कूल के पास उम्मीदवारों को लाने के लिए कहा गया था।

उस रात तक इस नेटवर्क की अलग-अलग शाखाएँ अपनी-अपनी जगह पर तैनात थीं, स्कूल के भीतर के अंदरूनी लोग, पास के होटलों में सॉल्वर, गेस्ट हाउसों और निजी परिसरों में उम्मीदवार, और गाड़ियाँ, प्रिंटर व ठहरने की जगह पूरी तरह तैयार थीं।

5 मई को पेपर कैसे निकाला और बांटा गया

सुबह लगभग 5:30 बजे, चंदन सिंह, राहुल आनंद, सुरभि कुमारी और करण जैन एक काले रंग की हुंडई क्रेटा कार में ‘होटल श्री विनायक’ से निकले और ‘राज गेस्ट हाउस’ पहुँचे। उनके पीछे-पीछे कुमार शानू, अमित कुमार और रौनक राज भी वहाँ पहुँचे।

CBI ने कहा कि सनोज कुमार यादव को छोड़कर पटना सॉल्वर ग्रुप का हर सदस्य चोरी का पेपर आने से पहले ही गेस्ट हाउस के अंदर मौजूद था। मोबाइल लोकेशन, ट्रैवल रिकॉर्ड और गवाहों की पहचान के जरिए राजस्थान ग्रुप के दीपेंद्र शर्मा और संदीप कुमार की मौजूदगी भी वहीं पाई गई।

                                              2024 में NEET का पेपर कैसे लीक हुआ

सुबह लगभग 7:40 बजे, ओएसिस स्कूल के प्रिंसिपल अहसानुल हक ने हजारीबाग में SBI के एक वॉल्ट से नीट के प्रश्नपत्रों से भरे दो ट्रंक लिए। हक NTA के सिटी कोऑर्डिनेटर भी थे। ये ट्रंक सेंटर सुपरिटेंडेंट और वाइस-प्रिंसिपल इम्तियाज आलम को सौंप दिए गए, जो सुबह लगभग 7:53 बजे स्कूल पहुँचे और उन्हें कंट्रोल रूम में रख दिया।

CBI ने पैकेजिंग चेन के जरिए चोरी हुई बुकलेट का पता लगाया। ट्रंक संख्या 13093 में 13560 से 13563 तक के बंच थे। बंच 13560 में पैकेट नंबर 38988, 38989 और 38990 शामिल थे।

पैकेट 38990 में 6136465 से 6136488 तक नंबर वाली 24 बुकलेट थीं। बुकलेट संख्या 6136488 की पहचान उस मूल कॉपी के रूप में की गई जिसकी स्कूल के अंदर नकल की गई थी।

CBI ने कहा कि आलम ने इशारा किया कि पंकज को अंदर आने दिया जाए। इसके बाद पंकज स्टाफ रूम में बैठ गया। गौर करने वाली बात यह है कि ‘इनोवेटिव व्यू’ परीक्षा केंद्रों पर तैनात की गई आधिकारिक सुरक्षा और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन एजेंसी थी।

शाकिब ने इसकी जानकारी आलम को और बाद में हक को दी। सादुल ने भी यह मुद्दा उठाया। CBI द्वारा उद्धृत बयानों के अनुसार, आलम इस पर चिढ़ गए और उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि वे इस मामले को उन पर छोड़ दें। शाकिब और सादुल ने बाद में मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिए। शाकिब ने एक टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड में पंकज की पहचान भी की।

जाँच एजेंसी ने कहा कि पंकज ने एक आईफोन 13  से पहले और आखिरी पन्ने को छोड़कर हर पेज की फोटो खींची, जिसके बारे में CBI का कहना है कि इसका इस्तेमाल इस पूरे ऑपरेशन में किया गया था। उसने किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके एक सिम कार्ड भी हासिल किया था।

CBI ने कहा कि अस्त-व्यस्त हो चुकी टेबल क्लॉथ को स्कूल के CCTV फुटेज में देखा जा सकता था। बाद में इन औजारों को जब्त कर लिया गया और पंकज ने CBI की कस्टडी में इस पूरी प्रक्रिया को दोबारा करके दिखाया।

खींची गई तस्वीरों को राज गेस्ट हाउस भेजा गया। सॉल्वरों को विषयों के हिसाब से बांट दिया गया। कुमार शानू, दीपेंद्र शर्मा और संदीप कुमार को बायोलॉजी का जिम्मा सौंपा गया था। सुरभि कुमारी और रौनक राज ने केमिस्ट्री को संभाला।

चंदन सिंह, राहुल आनंद और अमित कुमार ने फिजिक्स का पेपर हल किया। करण जैन को कठिन या अधिक समय लेने वाले प्रश्न दिए गए थे। चंदन को पटना ग्रुप के लीडर और कुमार मंगलम को राजस्थान ग्रुप के लीडर के रूप में बताया गया।

पंकज ने हल की गई सामग्री की PDF बनाई और उन्हें सिंदूर, एके इंटरनेशनल होटल, बोकारो, भुवनेश्वर और पटना में मौजूद हैंडलर्स को भेज दिया। शशिकांत पासवान ने सिंदूर ब्रांच को संभाला। एक कॉपी अमित कुमार सिंह के भाई अमन कुमार सिंह द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले व्हाट्सएप नंबर पर भेजी गई थी।

भुवनेश्वर में पंकज के भाई घनश्याम से जुड़े हैंडलर्स ने दो इलेक्ट्रीशियन, गौतम और विकास के साथ मिलकर काम किया। 2024 के इस लीक मामले में CBI की जाँच के दौरान ‘करियर एकेडमी’ सबसे व्यापक रूप से दर्ज किए गए उम्मीदवार-भर्ती और लॉजिस्टिक्स चैनलों में से एक बनकर उभरी।

केमिस्ट्री का पेपर सुबह 11:05 बजे और फिजिक्स का पेपर सुबह 11:40 बजे आया। यह क्रम दर्शाता है कि जैसे ही संबंधित सॉल्वर ग्रुप ने अपना हिस्सा पूरा किया, वैसे ही प्रत्येक सेक्शन को आगे भेज दिया गया।

चार्जशीट के विवरण के अनुसार प्रिंटिंग और वितरण के दौरान बलदेव, पिंटू कुमार, नीतीश कुमार, अभिमन्यु पटेल, आशुतोष कुमार और मनीष प्रकाश उसी परिसर में मौजूद थे। लर्न प्ले स्कूल लीक हुए पेपर नेटवर्क की पटना ब्रांच के लिए वितरण और जवाब याद कराने का एक प्रमुख केंद्र था।

पुलिस इंटरसेप्शन जिसने रैकेट का किया पर्दाफाश

लगभग 2:05 बजे, शास्त्री नगर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अमर कुमार को सूचना मिली कि एक संगठित गिरोह ने NEET प्रश्नपत्र की सुरक्षा शृंखला को तोड़ दिया है। उन्हें यह भी बताया गया कि इस नेटवर्क के सदस्य रजिस्ट्रेशन नंबर JH01BW0019 वाली एक सफेद रेनॉल्ट डस्टर कार में घूम रहे हैं।

पुलिस ने राजवंशी नगर मोड़ के पास डस्टर गाड़ी को रोका और सिकंदर यादवेन्दु, अखिलेश कुमार व बिट्टू कुमार को हिरासत में ले लिया। गाड़ी की आगे की सीट के पास से चार फोटोकॉपी किए गए एडमिट कार्ड मिले। ये एडमिट कार्ड अभिषेक कुमार, शिवनंदन कुमार, आयुष राज और अनुराग यादव के थे। सिकंदर के पास से दो फोन भी बरामद किए गए।

आयुष राज BSEB कॉलोनी के डीएवी पब्लिक स्कूल में परीक्षा दे रहा था। FIR के मुताबिक, उसने बताया कि उसे और लगभग 20 से 25 छात्रों को ‘लर्न बॉयज हॉस्टल’ और ‘लर्न प्ले स्कूल’ ले जाया गया था, जहाँ उन्हें हल किए गए प्रश्न दिए गए और उन्हें याद करने के लिए कहा गया। उसने यह भी कहा कि परीक्षा में आए प्रश्न उपलब्ध कराई गई सामग्री से मेल खाते थे। पुलिस ने उसका एडमिट कार्ड, टेस्ट बुकलेट और पहचान दस्तावेज जब्त कर लिए।

इसके बाद जाँचकर्ताओं ने लर्न प्ले स्कूल की तलाशी ली और छत से नीट पेपर के आधे जले और गीले टुकड़े बरामद किए। CBI ने बाद में कहा कि इन टुकड़ों की मदद से वे लीक के तार ओएसिस स्कूल को आवंटित की गई बुकलेट से जोड़ने में कामयाब रहे। इस बरामदगी  ने पटना के वितरण केंद्र को हजारीबाग के पेपर से जोड़ दिया।

इस तरह मात्र एक दिन के भीतर, सॉल्वर सूर्योदय से पहले राज गेस्ट हाउस में दाखिल हुए, सुबह 8 बजे के बाद पेपर की कॉपी की गई, सुबह 11:40 बजे तक विषय-वार उत्तर पटना पहुँच गए और दोपहर 12:30 बजे तक उम्मीदवार अपने केंद्रों के लिए रवाना हो चुके थे।

मुख्य ऑर्गनाइजर और उनकी बताई गई भूमिकाएँ

CBI ने किसी एक व्यक्ति को इस पूरे नेटवर्क की हर शाखा के नियंत्रक के रूप में चिन्हित नहीं किया। जाँच एजेंसी का मामला एक बहुस्तरीय ऑपरेशन को दर्शाता है, जिसमें अलग-अलग लोगों ने परीक्षा केंद्र तक पहुँच, उम्मीदवारों की भर्ती, पेपर हल करने, वितरण और पैसों के लेनदेन को संभाला।

कुमार मंगलम और दीपेंद्र शर्मा को रांची में अमित से जुड़े एक फ्लैट में ठहराया गया था। एजेंसी ने यह भी कहा कि कुमार मंगलम को रत्ना खान के एक खाते से 2.4 लाख रुपए मिले थे, जिसे अमित ऑपरेट करता था। अमित ने इस फ्लैट, भुगतान और मुलाकातों के दावों का खंडन किया। उसके घर की तलाशी में कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।

पंकज कुमार को सुरक्षित परीक्षा केंद्र और बाहरी नेटवर्क के बीच की ऑपरेशनल कड़ी बताया गया था। CBI ने उस पर टूल्स और आईफोन खरीदने, झूठी पहचान बताकर ओएसिस स्कूल में प्रवेश करने, ट्रंक खोलने, पेपर की फोटो खींचने और हल किए गए PDF भेजने का आरोप लगाया।

हाई कोर्ट ने उसकी हिरासत की अवधि और अन्य आरोपितों के साथ समानता पर विचार करने के बाद मई 2025 में उसे जमानत दे दी। हालाँकि इस आदेश ने उसे आरोपों से बरी नहीं किया।

बलदेव को विषय-वार फाइलें मिली थीं। नीतीश ने उपकरणों की व्यवस्था की और पेपर्स को अपने आवास पर ले गया। रॉकी ने इस मामले में अपनी संलिप्तता से इनकार किया और बाद में उसे जमानत मिल गई।

हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया कि अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं और अभियोजन पक्ष ने 589 गवाहों की सूची पेश की है। जमालुद्दीन को उस मध्यस्थ के रूप में बताया गया जिसने दाखिला नेटवर्क की मुलाकात हक और इम्तियाज से कराई थी।

हक और इम्तियाज ही उस सुरक्षित केंद्र के लिए जिम्मेदार अधिकारी थे। CBI ने कहा कि पंकज के प्रवेश को आसान बनाया गया, स्टाफ के विरोध के बावजूद उसकी मौजूदगी को नजरअंदाज किया गया और कंट्रोल रूम तक उसकी पहुँच सुनिश्चित की गई। दोनों ने इस मामले में शामिल होने से इनकार किया और अभियोजन पक्ष के घटनाक्रम पर सवाल उठाए।

अलग गोधरा नेटवर्क ने OMR शीट को बनाया निशाना

गोधरा मामले में एक अलग तरीका अपनाया गया था। यह पेपर चुराने और उम्मीदवारों को जवाब याद कराने पर निर्भर नहीं था। CBI ने कहा कि कोचिंग से जुड़े एक नेटवर्क ने एक परीक्षा केंद्र को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास किया था ताकि उम्मीदवारों के जाने के बाद चुनिंदा OMR शीटों पर सही उत्तर भरे जा सकें।

इस मामले में तुषार रजनीकांत भट्ट, परशुराम बिंदनाथ रॉय, आरिफ नूर मोहम्मद वोरा, विभोर उमेश्वर प्रसाद सिंह आनंद, पुरुषोत्तम शर्मा और दीक्षित कांतिभाई पटेल को नामजद किया गया था।

तुषार भट्ट ‘ज्ञान मंदिर करियर इंस्टीट्यूट’ में काम करता था, जो एक निजी कोचिंग संस्थान था। CBI ने कहा कि उसे ‘जय जलाराम स्कूल’ में एक शिक्षक और पर्यवेक्षक के रूप में पेश किया गया था ताकि उसे डिप्टी सेंटर सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया जा सके। स्कूल के प्रिंसिपल और NTA के सिटी कोऑर्डिनेटर पुरुषोत्तम शर्मा ने इस नियुक्ति को आसान बनाया।

दीक्षित पटेल ‘जय जलाराम एजुकेशन ट्रस्ट’ का चेयरमैन था, जो परीक्षा केंद्रों के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्कूलों को चलता था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि उसने केंद्रों और अधिकारियों की व्यवस्था करने में भाग लिया था। उसके वकीलों ने कहा कि वे नियुक्तियाँ NTA द्वारा की गई थीं और उसकी संलिप्तता से इनकार किया।

इसका उद्देश्य यह संभावना बढ़ाना था कि उन्हें इस नेटवर्क के प्रभाव वाले केंद्रों में आवंटित किया जाए। उम्मीदवारों से कहा गया था कि वे केवल उन्हीं प्रश्नों के उत्तर दें जो वे जानते हैं और बाकी को खाली छोड़ दें। इसके बाद उनकी OMR शीट पर सही विकल्प भर दिए जाते हैं। परिवारों से 20 लाख रुपए से 25 लाख रुपए के बीच भुगतान करने को कहा गया था।