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क्या योगी को मारने की साज़िश थी? सर्वे की आड़ में बहराइच में बिछाया जा रहा था विस्फोटक, योगी के दौरे से पहले 500 किलो का जखीरा मिला; बंगाल के 70 लोग गिरफ्तार: मजार को बुलडोजर से किया समतल

500 किग्रा विस्फोटक के साथ पकड़े गए बंगाली लोग (बाएँ), मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (दाएँ), (फोटो साभार : Panchanjya & News18)
पंजाब में कांग्रेस राज में भी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने की साज़िश विफल हो गयी थी। रास्ता रोकने पर कुछ देर इंतज़ार कर, पंजाब में कांग्रेस सरकार को सन्देश दे दिया कि "मैं जिन्दा वापस आ गया हूँ।" हैरानी की बात यह है कि जिन ताकतों ने भारत के दो प्रधानमंत्रियों की जान ली कांग्रेस समेत सारा विपक्ष उन्ही ताकतों को अपना समर्थन दे रही हैं।    

बहराइच में हाल ही में दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। एक तरफ 500 किलो विस्फोटक पकड़ा गया है, तो दूसरी तरफ 700 साल पुरानी मजार पर बुलडोजर चला है। ये ऐसे समय विस्फोटक मिला है, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 10 जून 2025 को बहराइच के दौरे पर है।

भेड़िए के भेष में बिछाया विस्फोटक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहराइच जाने वाले हैं, लेकिन उनके दौरे से ठीक पहले ही जिले में एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने करीब 500 किलो विस्फोटक पकड़ा है और इस मामले में पश्चिम बंगाल के 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

यह सब तब शुरू हुआ जब हरदी इलाके के सिकंदरपुर गाँव के पास करीब 200 लोग तीन गाड़ियों में आए। उन्होंने खुद को एक तेल कंपनी का सर्वे करने वाला बताया। जब गाँव वालों ने उनसे पूछा कि वे क्या कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि वे भेड़िए ढूँढने आए हैं।

इसके बाद उन्होंने करीब 20 किलोमीटर के इलाके में जमीन में छेद करके अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक बिछाना शुरू कर दिया। ये विस्फोटक बालासराय, लखनापुर, सधुवापुर, सिकंदरपुर और औराही जैसे कई गाँवों में बिछाए गए थे।

ग्रामीणों की शिकायत से मचा हड़कंप

रविवार (8 जून 2025) को जब गाँव वालों को इस बारे में पता चला तो उन्होंने तुरंत महसी के विधायक सुरेश्वर सिंह को बताया। विधायक तुरंत मौके पर पहुँचे और अधिकारियों को सूचना दी, लेकिन शुरुआत में कोई नहीं आया।

जब इसकी जानकारी बड़े अधिकारियों तक पहुँची, तो हड़कंप मच गया। तुरंत एसडीएम, एसपी और अन्य बड़े अधिकारी मौके पर पहुँचे। वहाँ गाड़ियों में भारी मात्रा में विस्फोटक लदा हुआ मिला। विधायक सुरेश्वर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि इतना विस्फोटक मिलने के बाद भी स्थानीय पुलिस अधिकारी गाँव वालों पर गाड़ियों को छोड़ने का दबाव डाल रहे थे।

मुख्यमंत्री योगी के दौरे से पहले विस्फोटक मिलना एक साजिश?

विधायक सुरेश्वर सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे से ठीक एक दिन पहले इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक का मिलना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। वहीं, बहराइच के ग्रामीण एएसपी डीपी तिवारी ने बताया कि अब तक 70 लोगों को पकड़ा गया है और इनमें से ज़्यादातर पश्चिम बंगाल के हैं।
वहीं सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने पहले ही सुरक्षा एजेंसियों को चेतावनी दी थी कि 37 लोग नेपाल की सीमा से होते हुए बहराइच में घुसपैठ कर सकते हैं। इनमें बांग्लादेशी और रोहिंग्या भी हो सकते थे।

700 साल पुरानी मजार पर चला बुलडोजर

बहराइच में सिर्फ विस्फोटक ही नहीं, बल्कि 700 साल पुरानी लक्कड़ शाह बाबा की मजार पर भी बुलडोजर चला है। इसके अलावा चमन शाह, भंवर शाह और शहंशाह बाबा की मजारें भी हटा दी गई हैं। यह दावा किया जा रहा है कि मजार 700 साल पुरानी है।
वन विभाग ने मजार कमेटी को पहले ही बता दिया था कि उन्हें ये मजारें हटानी होंगी, क्योंकि उनके पास जमीन के कोई कानूनी कागज़ात नहीं थे। यह कार्रवाई कतर्नियाघाट जंगल में हुई है। मजार को चलाने वाले लोग कह रहे थे कि यह जमीन वक्फ की है (जो धार्मिक कामों के लिए दी जाती है), लेकिन वे इसका कोई सबूत नहीं दिखा पाए।
लक्कड़ शाह मजार चलाने वाली कमेटी के अध्यक्ष रईस अहमद ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक थी और यहाँ ज़्यादातर हिंदू लोग आते थे।

सरकार का क्या कहना है?

प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सरकारी ज़मीन से कब्ज़ा हटाने के अभियान का हिस्सा है। वे बता रहे हैं कि यह बिना किसी भेदभाव के किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पूरे उत्तर प्रदेश में सरकारी ज़मीनों से अवैध कब्ज़े हटाने पर ज़ोर दे रही है।

मस्जिद से उकसाने के दावे को ‘भ्रामक’ बताने का क्या आधार, नहीं बता पाई बहराइच पुलिस: जानिए चश्मदीदों के बयान और उसकी मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर क्या कहता है कानून

                                 बहराइच दंगे के घायल विनोद मिश्रा और वहाँ की मस्जिद (फोटो: राहुल पाण्डेय)
उत्तर प्रदेश के बहराइच में माँ दुर्गा की प्रतिमा की विसर्जन के दौरान 13 अक्टूबर 2024 को जुलूस पर हमले किए गए थे। इस हमले में कई लोग घायल हो गए थे। वहीं, राम गोपाल मिश्रा नाम के एक शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना में घटना अन्य हिंदू भी घायल हो हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमले के लिए मुस्लिम भीड़ को मस्जिद से उकसाया गया था।

इस जुलूस में शामिल 70 वर्षीय बुजुर्ग विनोद मिश्रा उन पीड़ितों में हैं, जिन्हें इस हमले में गंभीर चोटें आई थीं। विनोद मिश्रा ने दावा किया था कि मस्जिद से उकसाए जाने के बाद मुस्लिम भीड़ ने हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला किया था। उन्होंने कहा, “पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो हिंदू तितर-बितर हो गए। तब, मस्जिद से अल्लाह-हू-अकबर बोला गया और उसके बाद आवाज आई कि जो जहाँ मिले उसे मार दो काट दो।”

उन्होंने आगे कहा, “उधर से 200-300 की संख्या में भीड़ बाँस बल्लम, अवैध असलहे, तमंचे जैसे औजार लेके दौड़ी। सामने हमारी गाड़ी थी। उसे हम इस पार लेकर आने। हमने गाड़ी स्टार्ट की हुई थी ये सोचकर ये सब लोग हमें जानते-पहचानते हैं हमें कुछ नहीं करेंगे। लेकिन वो 5-7 की संख्या में आए और फरसा से वार कर दिया।”

घटना को याद करते हुए विनोद मिश्रा ने आगे कहा, “हमने हाथ उठाया तो वहाँ गहरा घाव हो गया और कुर्ता खून से सराबोर हो गया। हम लहूलुहान थे और उन्होंने तब तक गाड़ी का तार काट दिया। हम इतने में वहाँ से भागने लगे। जब भागे तो उन्होंने लाठी चला दी। हमारी पीठ पर काफी चोट के निशान हैं और हाथ भी टूट गया। बाद में पता चला कि गाड़ी में भी आग लगा दी गई है।”

बहराइच पुलिस ने सोशल मीडिया पर उनके दावे को ‘भ्रामक‘ करार दिया था। बहराइच पुलिस ने ऑपइंडिया की X पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा था, “ऐसे भ्रामक तथ्य जिनके सम्बन्ध में अभी कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं हुआ है, उन्हें बिना जानकारी के प्रसारित न करें । इससे जनपद की कानून व्यवस्था बिगड़ने की प्रबल सम्भावना है जिस पर विधिक कार्यवाही अमल पर लायी जाएगी।”

विनोद मिश्रा के बाद सामने आए दिव्यांग सत्यवान मिश्रा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि उस दिन मस्जिद से ऐलान हुआ था, “जो हिन्दू जहाँ मिले, उसको काट दो।” उन्होंने बताया है कि इसी ऐलान के बाद मुस्लिमों की भीड़ ने अब्दुल हमीद के घर के आगे मौजूद हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला किया था। कट्टरपंथी भीड़ कह रही थी, “ऐ हिन्दुओं, यहाँ से भाग जाओ वरना गोलियों से भून दूँगा।”

इतना ही नहीं, पद्माकर दीक्षित नाम के एक व्यक्ति ने भी इसी तरह का दावा किया है। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे लोग मूर्ति के साथ आगे बढ़ रहे थे, तभी एक पत्थर आकर लगा। इससे माँ दुर्गा की प्रतिमा का हाथ टूट गया। इस बीच मस्जिद से ऐलान हुआ, “अल्लाह हु अकबर। जो मिले उनको काट दो।” पद्माकर के अनुसार, मुस्लिम भीड़ कह रही थी कि जितना हिंदू मारेंगे, उतना सवाब मिलेगा।

जिस स्टोरी बहराइच पुलिस ने भ्रामक और तथ्यहीन बताया था, उसे कई मीडिया हाउस ने छापा था। ये स्टोरी हमले में घायल विनोद मिश्रा के बयान के आधार पर की गई थी। आजतक से लेकर दैनिक जागरण ने मस्जिद से ऐलान वाली बात पर अपनी खबरें लिखी थीं। दैनिक जागरण की खबर को भी बहराइच पुलिस ने भ्रामक बताते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही थी।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट पर बहराइच पुलिस ने जवाब देते हुए कहा था, “इस समाचार पत्र द्वारा प्रकाशित सूचना के संबंध में कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने के बावजूद इसके प्रसारण का संज्ञान लिया गया है तथा इन्हें विधिक कार्रवाई हेतु नोटिस निर्गत की जा रही है।”

ऑपइंडिया ने पूछे 3 सवाल, बहराइच पुलिस का गोलमोल जवाब

बहराइच में मस्जिद से भीड़ को उकसाने को लेकर ऑपइंडिया द्वारा की गई कवरेज पर पुलिस द्वारा सवाल उठाने के बाद कुछ ऐसे सवाल थे, जो एक मीडिया हाउस को जानना जरूरी था। इसको लेकर ऑपइंडिया ने बहराइच पुलिस से तीन सवाल पूछे थे, जिनका पुलिस ने जवाब भी दिया। इन सवाल और जवाबों को हम यहाँ रख रहे हैं।
प्रश्न 1. क्या विनोद मिश्रा हिंसा के पीड़ित, चश्मदीद हैं? क्या पुलिस ने उनका बयान दर्ज किया है?
उत्तर: बहराइच (महसी) के डिप्टी एसपी रवि खोखर ने बताया कि विनोद मिश्रा ने अभी तक पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई है। जब वो शिकायत दर्ज करवाएँगे, उसके बाद उस पर जाँच होगी।
प्रश्न 2. क्या मस्जिद से उकसाने को लेकर उन्होंने जो दावे किए हैं, उसकी पुलिस ने जाँच की है? यदि की है तो उसका निष्कर्ष क्या निकला है? नहीं की है तो क्या उनके दावों को जाँच में शामिल किया है?
उत्तर: बहराइच की एसपी वृंदा शुक्ला के आधिकारिक फोन नंबर पर ऑपइंडिया ने कॉल किया तो फोन उठाने वाले PRO ने कहा कि मस्जिद से हमले वाली बात गलत है। यह आरोप भ्रमित करने वाला है।
प्रश्न 3. मस्जिद से हमले वाली मीडिया रिपोर्ट्स को बहराइच पुलिस सोशल मीडिया पर भ्रामक बता रही है, इसका आधार क्या है?
उत्तर: बहराइच की एसपी वृंदा शुक्ला के आधिकारिक नंबर पर की गई कॉल को उठाने वाले PRO ने कहा कि इस मामले को लेकर उनका स्टैंड पहले जैसा है।

चश्मदीद के बयान को लेकर क्या कहता है कानून

किसी घटना के पीड़ित/चश्मदीद के बयान पर मीडिया रिपोर्टिंग की जा सकती है या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रीना एन सिंह का कहना है कि मीडिया किसी भी पीड़ित या चश्मदीद का बयान ले सकती है जब तक कि कानूनी या प्रशासनिक रूप से किसी आदेश के अंतर्गत ऐसे बयान या मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक ना लगी हो। उन्होंने कहा कि सभी बड़े घोटालों का भंडाफोड़ प्रेस द्वारा ही किया गया है।
चश्मदीद को लेकर भारत में कानून भी है। इसको लेकर हमारा कानून क्या कहता है, इस पर रीना सिंह कहती हैं कि मीडिया में दिए गए बयान की कानूनी अहमियत सीमित होती है और अदालत में दिए गए शपथ-पत्रीय बयान को ही मुख्य साक्ष्य माना जाता है। गवाहों की सुरक्षा के लिए गवाह संरक्षण योजना और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी गवाहों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
रीना सिंह कहती हैं कि संविधान के अनुच्छेद 20(3) के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को साक्ष्य प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसका मतलब ये है कि किसी आरोपित के ख़िलाफ़ गवाह बनने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता, जो उसे दोषी ठहरा सके। भारतीय कानूनों में चश्मदीद गवाह का बयान बहुत महत्वपूर्ण होता है, लेकिन उसकी वैधता और विश्वसनीयता अदालत में दी गई गवाही और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ी होती है।
इस अधिनियम के अनुसार, गवाह का बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है। यदि गवाह का बयान सुसंगत और विश्वसनीय है तो उसे निर्णायक साक्ष्य माना जा सकता है। अदालत गवाह से उसकी गवाही लेने के लिए उसे समन भेज सकती है। गवाह के बयान को दोनों पक्षों द्वारा जाँचा और परखा जाता है। यह प्रक्रिया गवाह की विश्वसनीयता की पुष्टि करती है और यदि बयान में विरोधाभास है तो उसका खुलासा करती है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 186 (गवाहों के बयान) के अनुसार, पुलिस जाँच के दौरान गवाहों का बयान दर्ज कर सकती है। पुलिस गवाह को उसके निवास स्थान पर जाकर भी बयान दर्ज कर सकती है और ये जरूरी नहीं है कि गवाह थाने आकर ही बयान दे। दरअसल, BNSS (भारतीय न्याय संहिता) में गवाहों की सुरक्षा, गवाही देने की प्रक्रिया हैं।
वहीं, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 179 (गवाह को समन) में कहा गया है कि पुलिस गवाह को नोटिस या समन देकर थाने बुला सकती है। हालाँकि, महिला गवाहों के लिए विशेष प्रावधान है कि उन्हें उनके निवास स्थान पर ही बयान देने की अनुमति होती है और उन्हें थाने आने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
इसी तरह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 183 (न्यायिक बयान) के अनुसार, मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयान को न्यायिक बयान के रूप में दर्ज किया जाता है। यह बयान बाद में जाँच के दौरान और अदालती कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह विशेषकर तब आवश्यक होता है जब बयान के बाद गवाह की जान को खतरा हो या गवाह पर दबाव हो।
रीना सिंह कहती हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में गवाहों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया है। कोर्ट ने गवाहों को धमकाने या प्रभावित करने के मामलों में सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है, ताकि गवाह बिना किसी डर के न्यायालय में बयान दे सकें। भारतीय कानून गवाहों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा पर जोर देता है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम और बीएनएसएस जैसे कानूनों के तहत गवाहों के कुछ अधिकार हैं।
गोपनीयता का अधिकार: गवाह को धमकी मिलने पर उसकी पहचान को गुप्त रखा जा सकता है।
सुरक्षा का अधिकार: अगर गवाह को बयान देने के बाद खतरा हो तो उसे पुलिस या राज्य द्वारा सुरक्षा प्रदान की जा सकती है।
स्वतंत्र बयान देने का अधिकार: गवाह को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से बयान देने का अधिकार है और उसे किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी से बचाने का प्रावधान है।
अब जबकि, बहराइच पुलिस ने ऑपइंडिया की खबर को भ्रामक बता दिया तो हमने रीना सिंह से चश्मदीद के मीडिया में दिए गए बयान के बारे में भी उनसे जानना चाहा। उन्होंने कहा कि चश्मदीद का पुलिस के समक्ष दिया गया बयान जाँच का विषय है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 398 में कहा गया है कि प्रत्येक राज्य सरकार गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दृष्टि से राज्य के लिए एक गवाह संरक्षण योजना/डब्ल्यूपीएस तैयार और अधिसूचित करेगी। कानून की नजर में चश्मदीद (Eyewitness) के मीडिया में दिए गए बयान की बहुत सीमित और अक्सर अप्रत्यक्ष अहमियत होती है।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (बीएनएसएस) के अनुसार, मीडिया में दिया गया बयान कुछ स्थितियों में संदर्भ या संकेत के रूप में उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यह न्यायालय के लिए स्वीकार्य साक्ष्य (admissible evidence) नहीं माना जाता। यह न्यायालय में मान्य साक्ष्य के रूप में तब तक स्वीकार्य नहीं होता, जब तक कि उसे पुलिस द्वारा या अदालत के समक्ष विधिवत दर्ज नहीं किया जाता।
रीना सिंह कहती हैं कि मीडिया में दिया गया बयान बाहरी प्रभाव में हो सकता है, इसलिए उसे न्यायालय की निष्पक्ष प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जाता। गवाह पर दबाव, डर या पक्षपात के चलते ऐसे बयान दिए जा सकते हैं। मीडिया में दिया गया बयान संकेतक (indicator) या प्राथमिक जानकारी के रूप में पुलिस या अदालत के ध्यान में लाया जा सकता है।
बकौल रीना सिंह, “अगर यह बयान मामले की जाँच या अदालत में महत्वपूर्ण हो सकता है तो पुलिस या अदालत उस गवाह को समन भेजकर उसका बयान दर्ज कर सकती है। अदालत में दिए गए बयान के दौरान गवाह के बयान को प्रतिपरीक्षण के माध्यम से सत्यापित किया जा सकता है। मीडिया में दिए गए बयानों को प्रतिपरीक्षण का मौका नहीं मिलता, इसलिए इसे पूर्ण रूप से सत्य नहीं माना जा सकता।”
मीडिया में दिए गए बयान को अक्सर गैर-स्वीकृत साक्ष्य (hearsay evidence) के रूप में माना जाता है, क्योंकि यह अदालत में दिए गए साक्ष्य से प्रमाणित नहीं होता है। न्यायालय में मान्य गवाही वही होती है जो अदालत के सामने, शपथ के तहत दी गई हो और जिसका प्रतिपरीक्षण (cross-examination) किया जा सके।
अगर कोई पीड़ित या चश्मदीद मीडिया में इस तरह का बयान देता है तो पुलिस को खुद उस तक पहुँचना चाहिए या फिर उसके थाने आने का इंतजार करना चाहिए? इस सवाल पर रीना सिंह कहती हैं, “भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) की धारा 181 के तहत पुलिस गवाहों का बयान दर्ज कर सकती है। इस प्रक्रिया में पुलिस गवाह से मिलने उसके निवास स्थान पर जा सकती है और वहीं पर उसका बयान दर्ज कर सकती है।”
रीना सिंह कहती हैं कि गवाह को थाने आने की आवश्यकता नहीं होती है, जब तक कि पुलिस द्वारा उसे समन या नोटिस न भेजा गया हो। पुलिस गवाह को जाँच में सहयोग देने के लिए थाने आने का नोटिस या समन भेज सकती है। यह केवल तब किया जाता है जब पुलिस को उसकी मौजूदगी आवश्यक लगे। वर्तमान में भारतीय कानून के तहत पुलिस का यह उत्तरदायित्व है कि वह गवाह तक पहुँचे और उसका बयान ले, न कि थाने आने का इंतजार करे।

बहराइच : हिंदू बुजुर्ग चीख-चीखकर कह रहे- मस्जिद से ऐलान हुआ… लेकिन जाँच की जगह मोहम्मद जुबैर संग की लाइन पकड़ रही बहराइच पुलिस, क्यों? पुलिस सच्चाई से क्यों पीछे भाग रही है?

                                                    ग्राउंड रिपोर्टिंग पर बहराइच पुलिस
बहराइच के महाराजगंज में 13 अक्तूबर 2024 को दुर्गा पूजा विसर्जन के मौके पर इस्लामी भीड़ ने हमला किया था। इस हमले में 23 साल के युवक रामगोपाल मिश्रा की हत्या कर दी गई थी। वहीं अन्य जो हिंदू घायल हुए थे उनमें से एक 70 साल के विनोद मिश्रा भी हैं, जिन्होंने अलग-अलग मीडिया संस्थानों के सामने बार-बार कहा है कि घटना वाले दिन पहले मूर्ति पर पत्थर मारा गया, फिर उसके बाद मस्जिद से ऐलान हुआ और फिर हिंदुओं पर हमला हुआ।

ये बात उन्होंने आजतक के साथ भी बातचीत में कही थी और यही बात उन्होंने ऑपइंडिया के पत्रकार राहुल पांडेय के सामने कैमरे में भी कही, फिर दैनिक जागरण ने भी उनके बयान पर रिपोर्ट की और कई मीडिया संस्थानों ने भी उनकी आवाज उठाई।

अब चूँकि हर मीडिया संस्थान का पत्रकार इस घटना की सच्चाई जानने के लिए ग्राउंड पर गया था तो उन्होंने वहाँ चोटिल पीड़ित की आवाज को उठाया और स्थानीयों से बात करके पता लगाया कि आखिर इतना बवाल उस दिन शुरू कैसे हुआ।ऑपइंडिया के पत्रकार राहुल मिश्रा भी ग्राउंड जीरो से स्थिति हमारे पाठकों के सामने महाराजगंज पहुँचे। उन्होंने पीड़ितों से बात की और जो उन्होंने कहा उसकी वीडियो रिकॉर्ड की।

इसी में एक वीडियो विनोद कुमार मिश्रा की भी है। विनोद उन घायलों में से हैं जिन्हें 13 अक्तूबर को इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने निशाना बनाया। उनके अनुसार अगर वो उस दिन भागे नहीं होते तो भीड़ उन्हें मार देती। उन्होंने क्या कहा, इसे पहले पढ़िए: “पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो हिंदू तितर-बितर होगए। तब, मस्जिद से अल्लाह-हू-अकबर करके बोला गया और उसके बाद आवाज आई कि जो जहाँ मिले उसे मार दो काट दो।”

वीडियो में विनोद मिश्रा की यह बात आप साफ तौर पर 1 मिनट से पहले ही सुन सकते हैं और बाद में राहुल पांडेय को पूछते भी सुना जा सकता है कि क्या आपने ये खुद सुना?

इस पर विनोद मिश्रा ने हाँ बिलकुल सुना में जवाब देते हुए कहा, “उधर से 200-300 की संख्या में भीड़ बाँका बल्लम, अवैध असलहे, तमंचे जैसे औजार लेके दौड़ी। सामने हमारी गड़ी थी। उसे हम इस बार लेकर आने। हमने गाड़ी स्टार्ट की हुई थी ये सोचकर ये सब लोग हमें जानते-पहचानते हैं हमें कुछ नहीं करेंगे। लेकिन वो 5-7 की संख्या में आए और फरसा से वार कर दिया। हमने हाथ उठाया तो वहाँ गहरा घाव हो गया और कुर्ता खून से सराबोर हो गया। हम लहूलुहान थे और उन्होंने तब तक गाड़ी का तार काट दिया। हम इतने में वहाँ से भागने लगे। जब भागे तो उन्होंने लाठी चला दी। हमारी पीठ पर काफी चोट के निशान हैं और हाथ भी टूट गया। बाद में पता चला कि गाड़ी में भी आग लगा दी गई है।”

ये पूरा बयान वीडियो में हिंसा में घायल हुए विनोद मिश्रा का है। उन्होंने ये बयान कैमरे पर दिया, बिना रुके दिया। ऐसा भी नहीं था कि राहुल पांडेय उनसे कुछ चुनिंदा सवाल कर रहे हों, उन्होंने सिर्फ घटना के बारे में पूछा और ये बयान सामने आया।

जैसा कि ऊपर बताया ऐसा नहीं था कि विनोद मिश्रा ने ये बयान सिर्फ ऑपइंडिया रिपोर्टर को दिया। उन्होंने यही घटना का विवरण हमारे रिपोर्टर से पहले आजतक को भी दिया था। जिसे उन्होंने एक्सक्लूसिव कहकर चलाया। इसके बाद जी न्यूज पर उनके बयान की कवरेज साफ तौर पर देखी जा सकती हैं और अन्य समाचार पोर्टलों पर भी।

                                                        आजतक की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

सामान्य तौर पर जब किसी क्षेत्र में ऐसे बवाल सामने आते हैं तो पत्रकारों के पास दिखाने का यही तरीका होता है कि वो पीड़ित की बात जस की तस रखें। राहुल पांडेय ने भी यही किया।

उनकी इसी रिपोर्ट को जब ऑपइंडिया के पेज पर पब्लिक किया गया तो मोहम्मद जुबैर जैसे लोग एक्टिव हो गए। उन्होंने हिंदू पीड़ित के पूरे बयान को खारिज कर इसे तथ्यहीन बता दिया और बहराइच पुलिस को टैग कर दिया। इसके बाद खुद बहराइच पुलिस ने उस रिपोर्ट के नीचे रिप्लाई कर विनोद मिश्रा के बयान को ‘भ्रामक तथ्य’ करार दिया। साथ ही कहा कि जिन घटना के संबंध में साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, उन्हें बिन जानकारी प्रसारित न करें।

ग्राउंड पर उतरे पत्रकार की रिपोर्ट जिसमें वह पीड़ित की आवाज उठा रहा हो, उसे लेकर ऐसी चेतावनी मिलनी थोड़ी अजीब थी। हमने अन्य संस्थानों की रिपोर्ट चेक की जहाँ विनोद मिश्रा का बयान आधार बनाया गया था वहाँ भी पुलिस का यही कहना था। देख सकते हैं कि दैनिक जागरण की रिपोर्ट के नीचे भी ऐसा कुछ लिखा गया।

अब जब तक सोशल मीडिया पर एक हिंदू पीड़ितों के दिए बयान को खारिज करने का काम मोहम्मद जुबैर जैसे लोग कर रहे थे तब तक हमें फर्क नहीं पड़ा क्योंकि ऐसे लोगों तो रामगोपाल की हत्या को भी जायज बताने में कोई कसर नहीं छोड़े और सरफराज-तालिब के पकड़े जाने पर रोना रोते हैं… पुलिस प्रशासन द्वारा हिंदू पीड़ित (जिनका हाथ टूटा है, पीठ पर निशान हैं, गाड़ी में आग लगा दी गई है) के बयान को संज्ञान में न लेना और उसे भ्रामक कहना सबको अजीब लगा। लोगों ने बहराइच पुलिस से पूछना शुरू कर दिया कि साक्ष्य का मतलब क्या होता है। क्या पीड़ित का बयान जाँच का आधार नहीं बनाया जाता?

अगर पत्रकार ग्राउंड पर उतरेगा तो जाहिर है स्थानीयों और पीड़ितों का भी पक्ष रखेगा। अगर खुद हिंसा का शिकार पीड़ित वही बयान दे तो संस्थान इसमें कैसे भ्रामक खबर फैलाने के लिए उत्तरदायी हुआ?

बहराइच पुलिस इस मामले में क्या एक्शन लेगी ये तो नहीं पता लेकिन पत्रकारिता में पीड़ितों की आवाज जस की तस उठाने को भ्रामक जानकारी फैलाना नहीं कहा जा सकता। अगर ऐसा है रिपोर्टिंग करने के अन्य तरीके भी पुलिस को साफ कर देना चाहिए।

फिलहाल, बता दें कि इस मामले में सिर्फ दंगा करने वालों पर ही कार्रवाई नहीं हुई बल्कि घटना वाले दिन बहराइच पुलिस की सक्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। सीओ को इस मामले में सस्पेंड भी किया जा चुका है और मीडिया में ही ये बताया जा रहा है कि अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा दिखाई गई लापरवाही की भी जाँच हो रही है। जिस घर में 23 साल के रामगोपाल की हत्या हुई है उस घर के लोगों का साफ कहना है कि अगर पुलिस उस दिन थोड़ी सक्रियता दिखाती तो शायद रामगोपाल जिंदा होते…।

सच्चाई क्या है ये प्रशासन अपनी जाँच में पता लगा ही लेगा। कार्रवाई भी होगी। मगर ग्राउंड पर उतरे पत्रकारों की रिपोर्ट पर उन्हें धमकाना उचित नहीं है। सोचकर देखिए कोई भी सच्चाई जानने यदि उतरेगा तो उसकी पहली कोशिश यही होगी कि वो उन लोगों से बात करे तो उस घटना में निशाना बनाए गए। ऑपइंडिया के राहुल पांडेय ने भी यही किया है। सवाल तोड़-मरोड़ के पेश किए बिना वो घटना पूछी जो उस दिन हुई…।

बइराइच : ईंट मार प्रतिमा तोड़ी, DJ वाले को खींचकर मारा, फिर मस्जिद से हुआ ऐलान… चश्मदीदों ने बताया- राम मंदिर से नाराज हैं मुस्लिम; अगर किसी मंदिर से ऐसा ऐलान हुआ होता तो क्या तब भी ये सब खामोश रहते?

        इसी मस्जिद से 'सबको मार डालने' के लिए कहा गया था (फोटो साभार: राहुल पाण्डेय)
बहराइच में 13 अक्टूबर 2024 को हुए सांप्रदायिक तनाव ने एक बार फिर जिले में खौफ और आतंक का माहौल बना दिया है। इस हिंसा में 22 वर्षीय रामगोपाल मिश्रा की निर्मम हत्या कर दी गई, जिससे हिंदू समुदाय में गहरा आक्रोश और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह हमला पहले से सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था, जिसमें स्थानीय मस्जिद से भड़काऊ ऐलान किए गए थे और भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया गया था। क्या मस्जिद जेहादियों की पनाहगाह है? कश्मीर में भी मस्जिदों से ऐलान हुआ था। क्या शेष भारत में भी मस्जिदों का कश्मीर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है? क्या तुष्टिकरण करने वाली पार्टियां, इस्लाम को शांति का मजहब बताने वाले जवाब देंगे? अगर किसी मंदिर से ऐसा ऐलान हुआ होता तो क्या तब भी ये सब खामोश रहते?  

मूर्ति पर हमले से झगड़े की शुरुआत, फिर मस्जिद से ‘सभी को’ मारने का ऐलान

कट्टरपंथियों की हिंसा के शिकार हुए विनोद कुमार मिश्रा ने ऑपइंडिया से बातचीत में पूरे घटनाक्रम को याद किया और अपनी आपबीती सुनाई। विनोद मिश्रा ने शुरुआत से लेकर हिंसा तक की घटना को सिलसिलेवार तरीके से बताया कि कैसे एक शांत धार्मिक जुलूस ने अचानक हिंसा का रूप ले लिया। उन्होंने कहा, “जब हमारी मूर्ति मौके पर पहुँची, तो मुस्लिम लोगों ने मूर्ति पर ईंटें फेंकी, जिससे प्रतिमा का हाथ टूट गया और फिर दूसरी मूर्ति भी ईंट-पत्थर मारने की वजह से टूट गई। इसके बाद डीजे वाले को खींचकर मारा गया।”
मिश्रा का आरोप है कि इस विवाद की शुरुआत अब्दुल हमीद के बेटे ने की, जिसने छत से पत्थर फेंककर माहौल बिगाड़ा। इसके बाद हिंदू समुदाय ने धरने पर बैठने का निर्णय लिया और प्रशासन से हस्तक्षेप की माँग की। हालाँकि पुलिस और प्रशासन ने हिंदुओं को आश्वासन दिया कि मामले को संभाला जाएगा, लेकिन हिंसा थमने के बजाय और बढ़ गई। विनोद कुमार मिश्रा ने बताया, “मुस्लिमों ने जो किया, वो अन्याय है। हमने माफी की माँग की थी, लेकिन पुलिस ने हमारी माँगें नहीं मानी।”
हिंसा को रोकने के प्रयास में विनोद कुमार मिश्रा और अन्य हिंदू नेताओं ने अब्दुल हमीद से बातचीत भी की। हालाँकि, हमीद ने अपने बेटे का बचाव करते हुए कहा कि डीजे पर पाकिस्तान का गाना बज रहा था, जिससे मुस्लिमों को आपत्ति थी। विनोद कुमार मिश्रा ने बताया, “अब्दुल हमीद मेरे साथ ही पढ़ता था, इसलिए मैंने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन उसने कहा कि उसका लड़का अब उसके काबू में नहीं है।”
विनोद ने भावुक होते हुए बताया कि उनके बचपन का दोस्त अब्दुल हमीद भी इस हिंसा में शामिल था। उन्होंने कहा, “बचपन का दोस्त था अब्दुल हमीद। मुझे कभी नहीं लगा था कि वो ऐसा करेगा। ये मेरे लिए बहुत बड़ा धक्का था।”
उन्होंने कहा कि अब्दुल हमीद से बातचीत के बावजूद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही थी। इसके बाद मस्जिद से ‘अल्लाह-हू-अकबर’ का ऐलान किया गया, और लाउडस्पीकर पर कहा गया कि ‘जो जहाँ मिले, उसे मार डालो, काट दो।’ इसके तुरंत बाद करीब 150-200 लोगों की भीड़ हथियारों के साथ निकली और हमला शुरू कर दिया।

बाइक से भागने की कोशिश की, तो टायर काट डाला

विनोद कुमार मिश्रा ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अपनी जान पर बनी आपबीती भी साझा की। जब वे अपनी बाइक से भागने की कोशिश कर रहे थे, तो उन पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। “गाड़ी स्टार्ट ही की थी, कि हमारे ऊपर हमला बोल दिया। 5-7 लोग आए और फरसे से हमला किया। मेरे अंगूठे और सर में गहरा घाव लगा। मैं लहूलुहान हो गया।” इसके बाद उनकी बाइक को आग के हवाले कर दिया गया।
विनोद ने बताया कि पुलिस की निष्क्रियता इस पूरे घटनाक्रम में बहुत ही चौंकाने वाली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक मुस्लिम भीड़ हमला करती रही, तब तक पुलिस मूकदर्शक बनी रही। जब हिंदू लोग एकत्रित होकर जवाब देने की कोशिश करने लगे, तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। “पुलिस ने हमारी कोई रिपोर्ट तक नहीं लिखी,” उन्होंने कहा। विनोद के अनुसार, इस हिंसा में 7-8 हिंदू घायल हुए, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।

‘सिर्फ झंडा उतारने पर मार डालोगे?’

ऑपइंडिया से बातचीत में घटना स्थल पर मौजूद रहे चंद्रपाल मिश्रा ने बताया कि कैसे झंडा उतारने पर ओम प्रकाश को मार डाला गया। उन्होंने कहा, “उस लड़के (ओम प्रकाश) की क्या गलती थी? उसने किसी को नहीं मारा, उसने सिर्फ हरा झंडा ही उतारा था, जो पत्थर बरसाने के बाद किया गया था।”
चंद्रपाल ने यह भी बताया कि राम मंदिर बनने के बाद से मुस्लिमों में गुस्सा है, इसके बाद से ऐसी घटनाएँ बढ़ गई हैं। मुस्लिम राम मंदिर बनने का गुस्सा उतार रहे हैं। उन्होंने ताजिया को लेकर भी अपनी बात रखी। चंद्रपाल ने कहा, “हम लोग तो ताजिया में भी शामिल रहते थे लेकिन कोरोना के दौरान ताज़िया नहीं उठने की घटना से मुस्लिम समुदाय नाराज था, और इसी कारण से उन्होंने हिंदू जुलूस को निशाना बनाया।” चंद्रपाल ने कहा, “मुस्लिमों का कहना था कि हमारा ताज़िया नहीं उठा, तो हिंदुओं की मूर्ति भी नहीं उठने देंगे।”

अतीत में भी हो चुकी है इस तरह की घटना

इस हिंसा की घटनाएँ पहली बार नहीं हुई हैं। 1994-95 में भी बहराइच में ऐसी ही सांप्रदायिक घटनाएँ हुई थीं, जब मुस्लिम समुदाय ने मूर्तियों को रोकने का प्रयास किया था। विनोद कुमार मिश्रा ने इस घटना की तुलना करते हुए कहा कि इस बार हिंसा कहीं ज्यादा संगठित और भयावह थी। उन्होंने कहा, “अगर प्रशासन सख्त होता, तो ये घटना नहीं होती।” हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू समुदाय इस घटना से डरने वाला नहीं है। उन्होंने दृढ़ता से कहा, “हम अगले साल भी यात्रा निकालेंगे, चाहे हमें बलिदान क्यों न हो जाएँ।”
बहराइच में हुई इस सांप्रदायिक हिंसा ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सांप्रदायिकता की आग कितनी घातक हो सकती है, जब इसे सही समय पर नियंत्रित नहीं किया जाता।

उत्तर प्रदेश : हाफ एनकाउंटर से असंतुष्ट रामगोपाल का परिवार चाहता है खून के बदले खून; ‘एनकाउंटर’ पर बोली रामगोपाल मिश्रा की विधवा, परिजन बोले- वे बिरयानी खाकर कुछ दिन में बाहर आ जाएँगे

                    हाफ एनकाउंटर से असंतुष्ट रामगोपाल का परिवार चाहता है खून के बदले खून
उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार (17 अक्टूबर 2024) को बहराइच में हुई एक मुठभेड़ के बाद तालिब और सरफराज को गिरफ्तार किया है। इस दौरान दोनों आरोपितों के पैर में गोली लगी है। पुलिस ने रविवार (13 अक्टूबर) को हुए रामगोपाल मिश्रा हत्याकांड में अब तक कुल 5 आरोपितों को गिरफ्तार करके उन पर NSA के तहत कार्रवाई का ऐलान किया है। हालाँकि रामगोपाल के परिजन व ग्रामीण इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। मुठभेड़ के बाद ऑपइंडिया ने रामगोपाल के गाँव रेहुआ से जमीनी हालातों का जायजा लिया।

एक और FIR, लगेगा NSA

रामगोपल हत्याकांड के बाद पुलिस नामजद व अज्ञात आरोपितों की तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। इस बीच पुलिस ने तालिब और सरफराज सहित 5 आरोपतितों को गिरफ्तार किया। तालिब और सरफराज को जब हथियार बरामदगी के लिए ले जाया गया तो उन्होंने पुलिस पर फायर किया। जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपितों के पैर में गोली लगी। वायरल हो रहे एक वीडियो में दोनों आरोपितों को कराहते हुए और पुलिस से माफ़ी माँगते देखा जा सकता है। घटना के एक वीडियो में घायल तालिब और सरफराज को पुलिस के कंधों में देखा जा सकता है।
ये दोनों बार-बार पुलिस से कह रहे, “दोबारा ऐसी गलती नहीं करेंगे।” पुलिस ने दोनों को सरकारी वाहन में बिठाया और अस्पताल ले गई। पुलिस ने खुद पर हुए हमले की अलग से FIR तालिब और सरफराज पर दर्ज की है। इस FIR में हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराएँ लगाई गईं हैं। इस मुठभेड़ के बहराइच की पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने बताया कि कुल 5 आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। इन सभी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की जाएगी।

हाफ एनकाउंटर से संतुष्ट नहीं परिवार

तालिब और सरफराज से हुई मुठभेड़ व 5 आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद रामगोपाल के परिवार ने पुलिस की कार्रवाई को असंतोषजनक बताया है। रामगोपाल की विधवा रोली मिश्रा ने गुरुवार (17 अक्टूबर 2024) को एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में रोली मिश्रा ने पुलिस पर रिश्वत लेने और अपनी माँगों की अनदेखी का आरोप लगाया है। वीडियो में रोली ने कहा, “उन्हें पकड़े तो जरूर हैं लेकिन मारा नहीं गया है। हम लोगों को दिखा दिया गया है कि पैर पर गोली मारी गई है।”

ऐसा एनकाउंटर रामगोपाल के परिवार के लिए न्याय नहीं

एनकाउंटर के बाद ऑपइंडिया की टीम 17 अक्टूबर (गुरुवार) को रामगोपाल मिश्रा के गाँव रेहुआ पहुँची। गाँव में पुलिस की गाड़ियाँ लगातर हूटर बजा कर गश्त कर रहीं थीं। रामगोपाल मिश्रा के घर के चारों तरफ पुलिस और PAC के जवान तैनात कर दिए गए थे। किसी को भी घर के बाहर या अंदर आने-जाने की इजाजत नहीं थी। रामगोपाल के भाई हरिमिलन और परिजन राहुल मिश्रा ने हमें फोन पर बताया कि पुलिस के पहरे में वो भी कहीं निकल नहीं पा रहे हैं। मीडियाकर्मियों को भी पीड़ितों से बातचीत की अनुमति नहीं दी गई।
हमने रामगोपाल के घर के आसपास अन्य ग्रामीणों से बातचीत की। सड़क पर मौजूद कुछ ग्रामीणों ने हमें बताया कि वो आरोपितों को जीवित पकड़ने से खुश नहीं हैं। रामगोपाल के ही चचेरे भाई किशन मिश्रा ने कहा कि जिस हिसाब से उनके भाई को मारा गया उसके आगे ऐसे पैर में गोली वाली एनकाउंटर और गिरफ्तारियाँ न्याय नहीं माना जा सकता है। किशन मिश्रा ने आगे कहा, “ऐसा पहले होता था। बाबा की सरकार में ऐसा नहीं होता।” किशन मिश्रा का मानना है कि अब सरफराज और उसका परिवार आराम से जेल काटेगा और कुछ दिनों बाद बिरयानी खाकर छूट जाएगा।

घरों और बाजारों में टीवी से चिपके रहे लोग

दोपहर 3 बजे के आसपास अचानक ही महसी व आसपास यह खबर फैली थी कि रामगोपाल मिश्रा के कातिलों का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है। इस खबर के बाद पूरे बहराइच में लोग टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ देखने लगे। हमने महसी, हरदी और नथुरपुरवा आदि इलाकों सहित बहराइच शहर में भी देखा कि लोग घरों और दुकानों में टीवी पर एक-एक पल की खबर देख रहे थे। शुरू में लोगों को लगा कि सरफराज की मौत हो गई है, हालाँकि बाद में यह बात गलत निकली। फ़िलहाल एनकाउंटर को लेकर जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

‘बहराइच के दरिंदों का हो गया इलाज’: जिस अब्दुल हमीद के घर हुई रामगोपाल मिश्रा की हत्या, उसके 2 बेटों का नेपाल बॉर्डर पर उत्तर प्रदेश STF ने किया एनकाउंटर; कांग्रेस का विलाप शुरू

                               एनकाउंटर में घायल सरफराज और तालिब (साभार: ऑपइंडिया)
उत्तर प्रदेश के बहराइच में दुर्गा पूजा के मूर्ति विसर्जन के दौरान रामगोपाल मिश्रा की गोली मारकर हत्या करने के आरोपित रिंकू उर्फ सरफराज खान और तालिब उर्फ सबलू का एनकाउंटर कर दिया गया है। एनकाउंटर में दोनों आरोपितों के पैरों में गोली लगी है। इससे वे घायल हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, यह मुठभेड़ नानपारा कोतवाली के बाइपास में हुई है। 

घायल आरोपियों को इलाज के लिए नानपारा सीएचसी में भर्ती किया गया है। सीएचसी के बाहर पुलिस का पहरा बढ़ा दिया गया है। सीएचसी ने दोनों आरोपितों को बहराइच मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया है। कहा जाता है कि गोपाल मिश्रा पर गोली सरफराज ने ही चलाई थी। तालिब और सरफराज भाई बताए जा रहे हैं। दोनों आरोपित नेपाल भागने की फिराक में थे।

उत्तर प्रदेश के ADG (Law & Order) अमिताभ यश ने बताया कि पुलिस ने पाँच आरोपित पकड़े हैं। वहीं, एनकाउंटर में दो को गोली लगी है। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपितों के नेपाल भागने की की सटीक सूचना मिलने पर दोपहर करीब 2 बजे STF और बहराइच पुलिस ने नानपारा कोतवाली क्षेत्र में हांडा बसेहरी नहर के पास आरोपितों को घेर लिया।

पुलिस ने आरोपितों को सरेंडर करने के लिए कहा तो वे पुलिस पर फायरिंग की। इसके बाद पुलिस और STF ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिसमें सरफराज और तालिब को पैरों में गोली लगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बहराइच हिंसा के आरोपियों के पुलिस मुठभेड़ में घायल होने की जानकारी दी गई है।

बहराइच की एसपी वृंदा शुक्ला का कहना है, “जब पुलिस टीम हत्या में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी के लिए नानपारा इलाके में गई थी तो मोहम्मद सरफराज उर्फ ​​रिंकू और मोहम्मद तालिब उर्फ ​​सबलू ने हत्या में इस्तेमाल हथियार को वहाँ लोड करके रखा रखा हुआ था, जिसका इस्तेमाल उन्होंने पुलिस पर फायरिंग करने के लिए किया।”

उन्होंने आगे कहा, “आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें दोनों घायल हो गए। उनका इलाज चल रहा है और वे जीवित हैं। हमने अन्य तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया है। सभी 5 को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया है। उन सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी… अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।”

पुलिस ने सरफराज के भाई फहीम, पिता अब्दुल हमीद और एक अन्य को भी पकड़ा है। इससे एक दिन पहले सरफराज की गोली चलाते हुए तस्वीर सामने आई थी। इससे पहले राम गोपाल मिश्रा की हत्या मामले में पहली गिरफ्तारी भी आज गुरुवार (17 अक्टूबर 2024) को ही हुई। आरोपित की पहचान राजा उर्फ मोहम्मद दानिश उर्फ जहीर/सहीर खान के तौर पर हुई है।

बताया जा रहा है कि जहीर नेपाल जाने की फिराक में था, लेकिन उसे माहसी खंड में राजी क्रॉसिंग पर गिरफ्तार कर लिया गया। बहराइच हिंसा मामले में अब तक 11 एफआईआर दर्ज हुई हैं, इसमें 6 नामजद और 1304 अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है। वहीं, राम गोपाल की हत्या मामले में 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है।

मोहम्मद दानिश उर्फ ​​साहिर/जहीर खान इन्हीं आरोपितों में से एक था। उसके अलावा अब्दुल हामिद, सरफराज, फहीम भी इस मामले में आरोपित हैं। गौरतलब है कि 13 अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन के दौरान हुई हिंसा मामले में अब तक 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों की पहचान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हुई है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने एनकाउंटर पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार शुरू से ही फर्जी एनकाउंटर करा रही है। वे सिर्फ अपनी विफलता को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। मृतक रामगोपाल मिश्रा के पैर के नाखूनों को उखाड़ने के सवाल पर राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार दंगा कराना चाहती है।

उत्तर प्रदेश : रामगोपाल मिश्रा की हत्या में पहली गिरफ्तारी मोहम्मद दानिश की, नेपाल भागते हुए UP पुलिस ने दबोचा; इन दंगाइयों का एक ही ईलाज सारी सरकारी सुविधाएं छीनी ही नहीं जाए ब्लैकलिस्ट भी किया जाए

दंगा कर भागने या छुपने वालों पर जब तक सख्ती नहीं की जाएगी, तब तक ये जेहादी सुधरने वाले नहीं। ये ज्यादा नहीं कुछ ही रुपयों के लालच में कट्टरपंथियों के जाल में फंस साम्प्रदायिक दंगे करते हैं। और निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को इसे गंभीरता से जब तक नहीं लेंगी, ये डरपोक जेहादी खून की होली खेलते रहेंगे। जहाँ तक 'गरीब, मजलूम, भटके हुए आदि कहकर victim card खेलना कोई नया नहीं है। यह उतना ही पुराना है जितना जितना पुराना इस्लाम। जिसे समझने के अली सिमा द्वारा लिखित Understanding Mohammad And Muslim को पढ़ना होगा। जो लगता है अनवर शेख द्वारा लिखित 7/8 पुस्तकों का निचोड़ ही नहीं बल्कि हर हादसे को आज हो रही गुंडागर्दी से जोड़ा गया है। इन्हें तालीम ही ऐसी है। 
जब तक मुसलमानों को एक भारतीय नागरिक की तरह नहीं समझा जायेगा, ये जेहादी और इनके संरक्षण नहीं सुधरने वाले। और इस काम में विपक्ष ही नहीं बीजेपी भी बराबर की शामिल है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री जवाब दें किस कारण इनकी वोट लेने के लिए खजाना खोला गया? क्या मंदिरों और मठों के लिए खजाना खोला? आखिर क्यों सरकारी धन को लुटाया जा रहा है? क्या महाराष्ट्र मुख्यमंत्री एक भी हिन्दू वोट का हक़दार है? जो भी हिन्दू हालातों को देखते हुए शिंदे या इसकी शिवसेना को वोट देता है, फिर जेहादियों द्वारा किया जा रहे हमलों पर रोने का हक़ नहीं।       

दूसरे, सरकारों से लेकर सारी अदालतें और हिन्दू पक्ष के वकील जिम्मेदार हैं किसी ने भी पत्थरबाजों और पत्थर सप्लाई करने वालों पर सख्ती से पेश नहीं आती, जो जेहादियों और कट्टरपंथियों को ऑक्सीजन का काम करता है। जिस दिन अदालतों ने इन जेहादियों से वकीलों से यह सवाल कर दिया कि जिस तरह हिन्दुओं त्योहारों और शोभा यात्राओं पर मुस्लिम इलाकों में पत्थराव किया जाता है अगर हिन्दुओं ने तुम्हारे त्योहारों पर ऐसी भाषा में पलट वार किया उस स्थिति में क्या होगा? क्या 'सिर तन से जुदा' करने वालों पर कोई सख्त कार्यवाही हुई? सिर्फ जेल में बंद करना हल नहीं। किसके कहने पर और कितने रूपए लेकर इस जेहादी काम को अंजाम दिया किसी ने नहीं पूछा, क्यों?               
उत्तर प्रदेश के बहराइच में राम गोपाल मिश्रा की हत्या मामले में पहली गिरफ्तारी हो गई है। आरोपित की पहचान राजा उर्फ मोहम्मद दानिश उर्फ जहीर/सहीर खान के तौर पर हुई है। बताया जा रहा है कि जहीर नेपाल जाने की फिराक में था, लेकिन उसे माहसी खंड में राजी क्रॉसिंग पर गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब जहीर से इस मामले में पूछताछ कर रही है। वहीं सरफराज समेत 5 अन्य आरोपितों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है।

बहराइच हिंसा मामले में अब तक 11 एफआईआर दर्ज हुई हैं इसमें 6 नामजद और 1304 अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है। वहीं राम गोपाल की हत्या मामले में 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। ​मोहम्मद दानिश उर्फ ​​साहिर/जहीर खान इन्हीं आरोपितों में से एक था। उसके अलावा अब्दुल हामिद, सरफराज, फहीम भी इस मामले में आरोपित हैं।

13 अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन के दौरान हुई हिंसा मामले में अब तक 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों की पहचान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हुई है। इसके अलावा प्रशासन ने इस मामले पर एक्शन लेते हुए महसी सीओ रूपेंद्र गौड़ा को निलंबित कर दिया है। उनकी जगह रामपुर में तैनात रहे रवि खोखर को सीओ महसी पद पर नियुक्त किया गया है।

आरोप है कि रूपेंद्र गौड़ ने यात्रा में शामिल लोगों पर लाठियाँ चलवाई थीं जिसके बाद भीड़ उग्र हो गई और हिंसा की घटना देखने को मिली। फिलहाल डीजीपी प्रशांत कुमार का कहना है कि अब बहराइच में पूरी तरह से शांति है। डीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने बहराइच की स्थिति देखने के बाद डीजीपी को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। रूपेंद्र गौड़ा के अलावा माना जा रहा है कि अभी उन पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई होगी जिन्होंने घटना वाले दिन स्थानीय स्तर पर लापरवाही की थी।

बहराइच के जिस घर में हुई राम गोपाल मिश्रा हत्या, वहाँ खून के धब्बे-काँच की बोतलें : बिजली के झटके देकर भी किया टॉर्चर, अब्दुल हमीद की लाइसेंसी बंदूक से मारी गोली; घर पर बुलडोज़र ही नहीं हर सरकारी सुविधा भी इन जालिमों की छीनी जाए

    रामगोपाल मिश्रा (दाएँ) और अब्दुल हमीद की छत पर मिले पत्थर (बाएँ) (चित्र साभार: Bhaskar & Amar ujala)
बहराइच में रविवार (13 अक्टूबर, 2024) को इस्लामी कट्टरपंथियों ने दुर्गा पूजा के जुलूस पर हमला किया था। यहाँ इस्लामी कट्टरपंथियों ने रामगोपाल मिश्रा की हत्या कर दी थी। रामगोपाल मिश्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि वह उन्हें करेंट लगाया गया था और उनके नाखून उखाड़ कर बर्बरता की गई थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि अब्दुल हमीद और उसके साथ के मुस्लिमों ने रामगोपाल मिश्रा को गोली मारने के बाद करेंट लगाया था और प्रताड़ित किया था। उनके पैर के नाखून उखाड़े गए और साथ ही में धारदार हथियारों से हमला किया गया। आँखों के पास नुकीली चीज मारी गई थी।

करेंट लगाने के कारण रामगोपाल मिश्रा को ब्रेन हैमरेज हो गया था। बर्बरता की वजह से उनका खून भी बहा था और ज्यादा इन्हीं दोनों कारणों से रामगोपाल मिश्रा की मौत हुई। इस प्रताड़ना की बात रामगोपाल मिश्रा की पत्नी ने भी बताई थी।

अमर उजाला की रिपोर्ट में बताया गया है कि रामगोपाल को अब्दुल हमीद की लाइसेंसी बंदूक से गोली मारी गई थी। इससे उनके शरीर में छर्रे फ़ैल गए थे। इस बंदूक का लाइसेंस निरस्त करने के लिए पुलिस ने रिपोर्ट भेजी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया है कि अब्दुल हमीद के घर की छत पर खून के धब्बे भी मिले हैं। यहाँ कांच की बोतलों के टुकड़े भी मिले हैं। संभवतः रामगोपाल मिश्रा पर काँच की बोतलों से वार किया गया था। यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि रामगोपाल को काँच की बोतलें लगीं जिसके कारण वह पहले घायल हुए।

रामगोपाल मिश्रा शव के साथ बर्बरता करने के बाद भी जब अब्दुल हमीद और उसके साथ के मुस्लिमों का मन नहीं भरा तो उन्होंने शव को लेने आए लोगों पर भी हमला बोला। रामगोपाल के भाई और दोस्त जब शव निकालने लगे तो उन पर फायरिंग और पथराव हुआ।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अब्दुल हमीद और उसका परिवार भाग कर अब नेपाल चला गया है। ऑपइंडिया ने इससे पहले बताया था कि अब्दुल हमीद का एक बेटा नेपाल में रहता है और अपराधी है। सूचना मिली है कि अब्दुल हमीद और उसका परिवार नेपाल के रिश्तेदार के यहाँ शरण लेकर बैठा हुआ है।

यह भी सामने आया है कि रामगोपाल मिश्रा ने भगवा झंडा मुस्लिमों के हमले के बाद लगाया था। पहले दुर्गा पूजा पर पथराव किया गया था, इसमें देवी प्रतिमा पर पत्थर लगा था और उसे नुकसान पहुँचा था। इसके बाद हिन्दू शांतिपूर्ण रूप से प्रदर्शन कर रहे थे। एक और घायल ने बताया है कि पहले मस्जिद ने निकल कर लोगों ने उन पर हमला किया था।

बहराइच में हुए दंगे के बाद अब यहाँ पुलिस की भारी तैनाती है। फरार दंगाइयों को गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। रामगोपाल मिश्रा का परिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला है। उन्होंने इस मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।